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खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) का काम देश भर में ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और अन्य ग्रामोद्योगों के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाना, बढ़ावा देना, आयोजन करना और उन्हें लागू करना है। केवीआईसी, सप्लाई के लिए कच्चे माल के भंडार में भी मदद करता है। आयोग कच्चे माल जैसे- सेमी फिनिश्ड वस्तुओं यानी जो पूरी तरीके से बनकर तैयार नहीं हुई हैं, की प्रोसेसिंग के लिए कॉमन सर्विस फैसिलिटी के निर्माण पर भी ध्यान देता है। केवीआईसी ने खादी उद्योग में कई नौकरियां उत्पन्न करने में भी मदद की है।
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KVIC द्वारा प्रदान की जाने वाली ब्याज सब्सिडी योजना फाइनेंशियल एजेंसियों द्वारा दिए जाने वाले लोन पर लागू होगी। पूंजी निवेश के रूप में लोन डिसबर्समेंट के लिए केवीआईसी द्वारा दिए गए लोन और वर्किंग कैपिटल लोन इनके द्वारा ऑफर किए जाते हैं:
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केवीआईसी लोन को निम्नलिखित संस्थाओं द्वारा प्राप्त किया जा सकता है:
KVIC खादी और ग्रामोद्योग आयोग है जिसके तहत कई फंडिंग स्कीम / कार्यक्रम हैं जिनके माध्यम से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा योग्य उधारकर्ताओं को बिज़नेस या वर्किंग कैपिटल लोन ऑफर किया जाता है।
KVIC के अंतर्गत आने वाली कुछ प्रमुख योजनाओं में प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए फंड की योजना (SFURTI), इंटरेस्ट सब्सिडी एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट (ISEC), मार्केट प्रमोशन डिवेलपमेंट असिस्टेंस (MPDA), खादी रिफॉर्म एंड डिवेलपमेंट प्रोग्राम (KRDP), मधुमक्खी पालन – द हनी मिशन एंड मार्केट डिवेलपमेंट असिस्टेंस (MDA) शामिल हैं।
हर योजना या कार्यक्रम के उद्देश्य, कार्य, विशेषताएं और योग्यता शर्तें अलग- अलग होती हैं।
प्रधान मंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) को वर्ष 2008 में ग्रामीण रोज़गार सृजन कार्यक्रम (REGP) योजना के बदले शुरू किया गया था। MSME मंत्रालय ने PMEGP को शुरू किया जो एक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम है। इस योजना को शुरू करने की मुख्य वजह देशभर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नौकरी के अवसर पैदा करना है।
PMEGP के तहत, लाभार्थियों को सब्सिडी प्राप्त करने के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट के कुछ प्रतिशत के अपने योगदान का निवेश करना ज़रूरी है। लाभार्थियों द्वारा जमा की जाने वाली ज़रूरी राशि के बारे में नीचे बताया गया है:
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PMEGP के तहत फंडिंग
| PMEGP के तहत लाभार्थियों की श्रेणियाँ | लाभार्थी का योगदान (प्रोजेक्ट कॉस्ट का) | सब्सिडी की दर (प्रोजेक्ट कॉस्ट की) |
| क्षेत्र (प्रोजेक्ट/ यूनिट की लोकेशन) | शहरी / ग्रामीण | |
| सामान्य श्रेणी | 10% | 15% / 25% |
| विशेष (SC / ST / OBC सहित)/ अल्पसंख्यक/ महिला, भूतपूर्व सैनिक,
शारीरिक रूप से विकलांग, NER, पहाडी क्षेत्र और सीमा क्षेत्र आदि। |
5% | 25% / 35% |
नोट:
SFURTI पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए एक योजना है जो MSME मंत्रालय के अंतर्गत आती है और इसे वर्ष 2005 में शुरू किया गया था। SFURTI का सबसे पहला उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और उद्योगों को समूहों में संगठित करना है ताकि वो एक- दूसरे से कॉम्प्टिशन कर सकें और वे लम्बे समय के लिए चल सकें। किसी भी विशेष प्रोजेक्ट के लिए SFURTI के तहत अधिकतम 8 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। इस योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकारों और अर्ध-सरकारी संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO), पंचायती राज संस्थान (PRI), जैसे संस्थान आवेदन कर सकते हैं।
इंटरेस्ट सब्सिडी एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट (ISEC) योजना खादी कार्यक्रम के लिए फंडिंग का मुख्य स्त्रोत है। यह योजना KVIC के सभी रजिस्टर्ड संस्थानों के लिए लागू है। यह योजना बैंकिंग संस्थानों से पैसे जुटाने के लिए शुरू की गई थी ताकि जितने फंड की ज़रूरत है और बजटीय स्रोतों से कितना उपलब्ध हो सकता है, इनके बीच के अंतर को कम किया जा सके। इस योजना के अंतर्गत, ज़रूरत के मुताबिक वर्किंग कैपिटल संबंधी ज़रूरतों के लिए 4% प्रति वर्ष की रियायती ब्याज़ दर पर राशि प्रदान की जाती है।
यह योजना खादी उद्योगों के लिए मार्केट प्रमोशन और डिवेलपमेंट असिस्टेंस जैसी सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। इस योजना का उद्देश्य है कि कारीगरों के लिए बढ़ी हुई कमाई को सुनिश्चित किया जा सके।
पहली MDA योजना के तहत, फाइनेंशियल असिस्टेंस को कारीगरों (25%), सैलिंग इंस्टिट्यूशंस (45%) और प्रोड्यूसिंग इंस्टीट्यूशंस (30%) के बीच बांटा जाता था। मौज़ूदा योजना में यह सैलिंग इंस्टिट्यूशंस के लिए 20% और कारीगरों और प्रोड्यूसिंग इंस्टीट्यूशंस दोनों के लिए 40% दिया जाता है।
खादी सुधार और विकास कार्यक्रम (KRDP) का गठन नौकरियां उत्पन्न करने, कारीगरों की कमाई बढ़ाने और खादी उद्योग की वर्तमान ज़रूरतों को देखते हुए खादी की पोज़ीशन को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अन्य प्रोडक्ट की तुलना में खादी प्रोडक्ट की अपनी जगह सुनिश्चित करना और उसे बाज़ार की ज़रूरतों के मुताबिक तैयार करना, चुनिंदा सब्सिडी और बढ़ा हुआ वेतन प्रदान करना है।
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हनी मिशन का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों की आजीविका में सुधार करना है। इसकी प्रमुख विशेषतायें नीचे दी गई हैं:
MDA योजना के ज़रिए खादी के विकास में मदद मिलती है जिसमें उत्पादन पर 20% का भुगतान किया जाता है। MDA का लगभग 25% संस्थान को भुगतान किया जाता है जिसमें से 25% कारीगरों को इंसेंटिव के रूप में और संस्थाओं को 30% उत्पादन के लिए और 45% मार्केटिंग उद्देश्यों के लिए दिया जाता है। MDA योजना के तहत, पोस्ट / बैंक ऑफिस अकाउंट के माध्यम से अतिरिक्त प्रोत्साहन के रूप में बुनकरों और स्पिनरों के बीच भुगतान के लिए 25% की फाइनेंशियल असिस्टेंस रिजर्व है।
KVIC हस्तनिर्मित कागज़, पॉलीमर, एग्रो एंड केमिकल बेस्ड, मधुमक्खी पालन और अन्य वन संबंधी गतिविधियों जैसे विभिन्न ग्राम उद्योगों के विकास के लिए विभिन्न प्रमोशनल गतिविधियों को भी लागू करता है। विभिन्न फाइनेंशियल संस्थानों द्वारा आकर्षक ब्याज़ दरों पर KVIC लोन ऑफर किए जाते हैं।
इसकी स्थापना के ठीक बाद, KVIC ने ऑल इंडिया खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज बोर्ड का कार्यभार संभाला। KVIC दिल्ली, भोपाल, बैंगलोर, कोलकाता, मुंबई (HO) और गुवाहाटी में स्थित जोनल ऑफिस के अपने नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है।
प्रश्न. लाभार्थी को अपनी एप्लीकेशन या प्रोजेक्ट कहां जमा करना होता है?
उत्तर: लाभार्थी केवीआईसी की ऑफिशियल वेबसाइट: www.kvic.org.in या kviconline.gov.in/pmegpeportal/ पर जाकर अपनी एप्लीकेशन या प्रोजेक्ट ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
प्रश्न. ग्रामोद्योग (विलेज इंडस्ट्री) क्या है?
उत्तर: ग्राम उद्योग एक ऐसा उद्योग है जो सीमित संसाधनों वाले किसी देश या राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होता है। गांवों या ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग वस्तुओं का उत्पादन करते हैं और माइक्रो एंड स्मॉल बिज़नेस से संबंधित सेवाएं प्रदान करते हैं। पूंजी निवेश सीमित होता है या श्रमिकों या कारीगरों के लिए कभी-कभी पहले से तय भी होता है। श्रमिकों या कारीगरों को अक्सर दैनिक मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता है।
प्रश्न. क्या उधारकर्ता के लिए बैंक/ लोन संस्थान में कोई कोलैटरल या सिक्योरिटी जमा करना ज़रूरी है?
उत्तर: नहीं, KVIC के अंतर्गत आने वाली किसी भी योजना के लिए बैंकों/ लोन संस्थानों द्वारा कोलैटरल या सिक्योरिटी की ज़रूरत नहीं होती है।
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