भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा दी जाने वाली पर्सनल लोन की ब्याज दरें आवेदक की क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करती हैं, जिसमें निम्नलिखित कारक शामिल होते हैं:
CIBIL स्कोर
सिबिल स्कोर 300-900 के बीच की संख्या होती है, जो बताता है कि आवेदक ने अपने पिछले लोन या क्रेडिट कार्ड बिल का कितनी जिम्मेदारी से भुगतान किया है। स्कोर 900 के जितना करीब होता है, कम ब्याज दर और बेहतर शर्त पर पर्सनल लोन (Personal Loan) मिलने की संभावना उतनी अधिक होती है।
मासिक आय
एसबीआई उन लोगों को पर्सनल लोन देता है, जिनका EMI/NMI रेश्यो 65% से कम होता है। यानी वह अपनी कुल ईएमआई भुगतान (मौजूदा और नए लोन की EMI समेत) में अपनी मासिक आय का 65% से कम खर्च करते हों। मासिक आय से बैंक आवेदक के भुगतान क्षमता का आकलन करते हैं।
एंप्लॉयमेंट प्रोफाइल
आवेदक कहां, किस कंपनी में कितने समय से काम कर रहा है, या फिर वह बिज़नेस करता है, इस पर भी SBI पर्सनल लोन की ब्याज दरें निर्भर करती है। अगर आवेदक किसी प्रतिष्ठित कंपनी/MNCs/सरकारी संस्थान में कार्यरत है तो उसके लोन मिलने की संभावना अधिक है। बैंक स्व-रोजगार आवेदकों की तुलना में सैलरीड आवेदकों को लोन देना पंसद करते हैं।
मौजूदा बैंकिंग संबंध
कई लेंडर्स उन आवेदकों को पर्सनल लोन ब्याज दरों में छूट देते हैं, जिनका बैंक में पहले से लोन या डिपॉज़िट अकाउंट है। इसलिए पर्सनल लोन लेने की प्लानिंग कर आवेदकों को सबसे पहले अपने मौजूदा बैंक से संपर्क करना चाहिए या फिर प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन के बारे में पता करना चाहिए। प्री-अप्रूव्ड लोन की ब्याज दरें तुलनात्मक रूप से कम होती है।