क्रेडिट स्कोर:
बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (NBFCs) पर्सनल लोन की ब्याज दरें तय करते समय आवेदकों के क्रेडिट स्कोर को विशेष महत्व देते हैं। जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर अधिक होता है, उन्हें कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन (व्यक्तिगत ऋण) प्रदान किया जाता है। इसलिए, 750 और उससे अधिक क्रेडिट स्कोर बनाए रखें।
क्रेडिट स्कोर बेहतर बनाए रखने के टिप्स:
- अपने क्रेडिट कार्ड बिल और ईएमआई के समय पर भुगतान करें।
- कम समय में कई लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें।
- क्रेडिट यूटिलाइज़ेशन रेश्यो नियंत्रित रखें। कोशिश करें कि आप अपनी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का 30% से कम उपयोग करें।
- ध्यान दें कि आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां होने से भी आपका क्रेडिट स्कोर कम हो सकता है। इसलिए, आवेदकों को समय- समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को चेक करना चाहिए जिससे ऐसी गलतियों की पहचान की जा सके और समय रहते उसको ठीक करा जा सके।
क्रेडिट रिपोर्ट कैसे चेक करें?
भारत के प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो से साल में एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा, आप पैसाबाज़ार जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर मुफ्त में अपना क्रेडिट स्कोर देख सकते हैं।
रोज़गार का प्रकार और नियोक्ता/ कंपनी की प्रतिष्ठा:
स्वरोज़गार आवेदकों की तुलना में, बैंक/ एनबीएफसी कम ब्याज दरों पर नौकरीपेशा आवेदकों को पर्सनल लोन प्रदान करते हैं क्योंकि उनकी आय हर महीने निश्चित होती है। नौकरीपेशा आवेदकों में भी, सरकारी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके बाद प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाली कर्मचारी आते हैं।
स्वरोज़गार आवेदकों के मामले में, सीए, डॉक्टर, आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल को कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन मिलने की अधिक संभावना होती है। कई बैंकों/ NBFCs में नौकरीपेशा आवेदकों के लिए अक्सर कम से कम 1 वर्ष का कार्य अनुभव होना आवश्यक है। वहीं स्वरोज़गार या व्यवसायिक आवेदक आमतौर पर कम से कम 2 वर्षों से वर्तमान बिज़नेस चला रहा हो।
आयु:
अधिकांश बैंक/ एनबीएफसी 18 वर्ष से 65 वर्ष तक की उम्र के आवेदकों को पर्सनल लोन प्रदान करते हैं। कई पब्लिक सेक्टर बैंक/ NBFCs पेंशनर को पर्सनल लोन उनकी पेंशन इनकम के आधार पर प्रदान करते हैं।
न्यूनतम आय:
आपकी आय यह दर्शाती है कि आप लोन की EMI समय पर चुकाने में कितने सक्षम हैं। अधिक आय वाले आवेदकों को बेहतर ऑफ़र मिलते हैं क्योंकि उनसे जुड़े जोखिम कम होते हैं।
- नौकरीपेशा आवेदक: अधिकतर बैंकों में पर्सनल लोन के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 15,000 रु. होना चाहिए। हालांकि, जिनकी न्यूनतम मासिक आय 25,000 रु. है, उन्हें बैंक अधिक प्राथमिकता देते हैं।
- स्वरोज़गार आवेदक: वहीं गैर- नौकरीपेशा/ स्व- रोज़गार वाले आवेदकों की सकल वार्षिक आय न्यूनतम 2 लाख रु. होनी चाहिए।
कार्य/व्यावसायिक अनुभव:
कई बैंक/ लोन संस्थानों से पर्सनल लोन लेने के लिए नौकरीपेशा आवेदकों के पास कम से कम 1 साल का अनुभव होना चाहिए जिसमें कम से कम 6 महीने से वर्तमान कंपनी/ नियोक्ता के साथ काम कर रही हों। वहीं अगर आवेदक गैर- नौकरीपेशा है तो कम से कम 3 साल से वर्तमान बिज़नेस चला रही हों।
भुगतान क्षमता:
बैंक/ एनबीएफसी आमतौर पर उन आवेदकों का पर्सनल लोन आवेदन मंजूर करते हैं जिनका ईएमआई/एनएमआई रेश्यो 50% या 55% से ज्यादा नहीं है। यह सभी लोन संस्थानों में अलग-अलग हो सकता है। आप अपनी मासिक इनकम के जितने प्रतिशत का उपयोग मौज़ूदा ईएमआई और लिए जा रहे लोन की ईएमआई के भुगतान में करते हैं, उतना ही आपका ईएमआई/ एनएमआई रेश्यो होता है।