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पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर

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पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर क्या है?

पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेटर एक ऐसा फ्री ऑनलाइन टूल है, जिसकी मदद से आप अपने लोन की ईएमआई जान सकते हैं। न सिर्फ ईएमआई बल्कि कुल कितना ब्याज भरना होगा और लोन की कुल लागत कितनी होगी, समझ सकते हैं। इस टूल से ईएमआई कैलकुलेट करने के लिए आपको बस लोन राशि, ब्याज दर और लोन अवधि पता होना चाहिए।

पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर से EMI कैसे कैलकुलेट करें?

अपनी लोन EMI कैलकुलेट करने के लिए पैसाबाज़ार पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर में निम्नलिखित जानकारियां दर्ज करें-

  • लोन राशि
  • लोन अवधि
  • ब्याज दरें
  • इसके बाद ‘कैलकुलेट’ पर क्लिक करें।
  • आपकी अनुमानित ईएमआई आपके मोबाइल स्क्रीन पर दिख जाएगी।

नोट- वास्तिवक ईएमआई लेंडर द्वारा दी जाने वाली अंतिम ब्याज दर के आधार पर अलग हो सकती है।

EMI की गणना का फॉर्मूला

पर्सनल लोन की ईएमआई कैलकुलेट करने के लिए बैंक आमतौर पर नीचे दिए गए फॉर्मूले का उपयोग करते हैं:

EMI= [PXRX(1+R)^N]/[(1+R)^N-1]

फॉर्मूले में उपयोग किए गए अक्षरों का मतलब

  • R- ब्याज दरें
  • EMI- मासिक किस्त
  • N- भुगतान अवधि
  • P- मूलराशि

पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर के फायदे

अपनी भुगतान क्षमता जानें

  • लोन लेने से पहले EMI जानना, आपको अपनी भुगतान क्षमता अनुसार लोन राशि लेने में मदद करता है।
  • आप कितनी ईएमआई आराम से चुका सकते हैं, ये जानने में मदद करता है।
  • ये डिफॉल्ट करने की संभावना कम करता है और क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।

लोन अवधि की तुलना करें

  • लोन अवधि आपकी ईएमआई को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
  • ऐसी अवधि चुनें जो आपकी भुगतान क्षमता और वित्तीय ज़रूरतों को प्रभावित न करें।
  • लोन की अवधि लंबी होने से ईएमआई कम और अवधि छोटी होने से ईएमआई अधिक होती है।

पार्ट- पेमेंट या बैलेंस ट्रांसफर की योजना बनाएं

  • पार्ट -प्रीपेमेंट या बैलेंस ट्रांसफर करने पर क्या होगा, इसका असर समझने के लिए कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें।
  • इससे ब्याज में संभावित बचत का अनुमान और बेहतर रिपेमेंट रणनीति बनाने में मदद मिलती है।

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EMI को प्रभावित करने वाले मुख्य फैक्टर

पर्सनल लोन EMI को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स के बारे में जान कर आप अपने लोन की कुल लागत में बचत कर सकते हैं। ईएमआई को प्रभावित करने वाले कारक निम्नप्रकार है:

लोन राशि - लोन राशि कम होने स ईएमआई भी कम होगी। लेकिन समान लोन अवधि और ब्याज दर पर अधिक लोन राशि होने से ईएमआई भी तुलनात्मक रूप से अधिक होगी। यानी जितनी ज़्यादा लोन राशि, ईएमआई भी उतनी ही अधिक।

ब्याज दर - पर्सनल लोन इंटरेस्ट रेट ज़्यादा होने से ईएमआई अधिक होगी और कुल ब्याज लागत भी ज़्यादा भरना होगा।

लोन अवधि - लंबी अवधि होने से ईएमआई कम होती है लेकिन कुल ब्याज लागत ज़्यादा लगता है, जबकि अवधि छोटी होने से ईएमआई अधिक लेकिन कुल ब्याज लागत कम होती है।

विभिन्न लोन राशि पर EMI

यहां नीचे टेबल में 1 साल की अवधि के लिए अलग-अलग ब्याज दर पर लोन राशि अनुसार ईएमआई की गणना की गई है:

₹1 लाख लोन राशि की EMI

ब्याज दरें (प्रति वर्ष) मासिक किस्त (EMI)
10% ₹8,792
12% ₹8,885
14% ₹8,979
16% ₹9,073

₹2 लाख लोन राशि की EMI

ब्याज दरें (प्रति वर्ष) मासिक किस्त (EMI)
10% ₹17,583
12% ₹17,770
14% ₹17,957
16% ₹18,146

₹5 लाख लोन राशि की EMI

ब्याज दरें (प्रति वर्ष) मासिक किस्त (EMI)
10% ₹43,958
12% ₹44,424
14% ₹44,894
16% ₹45,365

₹10 लाख लोन राशि की EMI

ब्याज दरें (प्रति वर्ष) मासिक किस्त (EMI)
10% ₹87,916
12% ₹88,849
14% ₹89,787
16% ₹90,731

EMI कम करने के तरीके

पर्सनल लोन की ईएमआई कम करने के लिए निम्नलिखित टिप्स को फॉलो करें:

  • लंबी अवधि चुनें: लंबी लोन अवधि से EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज खर्च बढ़ जाता है।
  • मौका मिलने पर पार्ट प्रीपेमेंट करें: प्रींसपल अमाउंट में अतिरिक्त भुगतान करने से लोन राशि और ब्याज का बोझ दोनों कम होता है।
  • आवेदन से पहले तुलना करें: कम ब्याज दर और बेहतर शर्त पर लोन पाने के लिए अलग-अलग लेंडर्स के पर्सनल लोन ऑफर्स की तुलना करें। आप पैसाबाज़ार पर एक ही जगह विभिन्न लेंडर्स के लोन ऑफर की तुलना कर अपने लिए उपयुक्त लोन विकल्प चुन सकते हैं।
  • बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प चुनें: कम ब्याज दर वाले लेंडर में लोन ट्रांसफर करने से EMI और कुल लोन लागत कम हो सकती है।

EMI कैलकुलेटर vs Manual Calculation

पर्सनल लोन ईएमआई मैनुअल तरीके से कैलकुलेट करना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि गलती होने की भी संभावना है। जबकि पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर की मदद से अपने लोन ईएमआई की गणना तुरंत कर सकते हैं और सही जानकरी पा सकते हैं।

पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर का उपयोग किनके लिए फायदेमंद है?

पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर उन लोगों के लिए फायदेमंद है:

  • जो लोग पर्सनल लोन लेने का विचार बना रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि उनके लोन की ईएमआई कितनी हो सकती है।
  • जो लोग अपने मासिक आय और खर्च के आधार पर आरामदायक मासिक किस्त तय करना चाहते हैं, ताकि बजट भी न बिगड़े और समय पर ईएमआई भी भरते रहें।
  • जो लोग अलग-अलग लोन अवधि के अनुसार EMI और कुल ब्याज लागत जान कर फैसला लेना चाहते हैं।
  • जो मैन्युअल गणना में समय बर्बाद किए बिना तुरंत और सटीक परिणाम चाहते हैं।

पर्सनल लोन लेने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

पर्सनल लोन लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखकर आप बेहतर लोन ऑफर पा सकते हैं:

  • क्रेडिट स्कोर चेक करें- 750 या उससे अधिक क्रेडिट स्कोर कम ब्याज दर व बेहतर शर्तों पर पर्सनल लोन दिलाने में मदद करता है।
  • ब्याज दरों की तुलना - किसी एक लेंडर से लोन लेने से पहले विभिन्न बैंक व एनबीएफसी के ब्याज दरों की तुलना करें और अपने लिए किफायती लोन विकल्प चुनें।
  • भुगतान क्षमता का आकलन करें- लोन लेने से पहले सुनिश्चित करें कि आप EMI आसानी से चुका सकें। आपकी सभी मौजूदा और नई EMI मिलाकर आपकी मासिक आय के लगभग 40–50% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • फीस व चार्जेस पता करें- ब्याज दर के अलावा लोन की प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र चार्ज (समय से पहले लोन चुकाना) आदि की जानकारी पहले से ले लें। लोन की कुल लागत में इनका भी योगदान होता है।
  • लोन अवधि- लंबी अवधि होने से ईएमआई कम लेकिन कुल ब्याज लागत ज़्यादा लगती है। इसके उल्ट छोटी अवधि में ईएमआई अधिक लेकिन कुल ब्याज लागत में बचत होती है। इसलिए अपनी भुगतान क्षमता देखते हुए उपयुक्त लोन अवधि का चयन करें। इसके लिए पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें।

पर्सनल लोन EMI से जुड़े सामान्य शुल्क (Fees & Charges)

पर्सनल लोन आवेदन से पहले इसके अन्य फीस व चार्जेस के बारे में अवश्य समझ लें:

  • प्रोसेसिंग फीस - लोन राशि का 0.5%- 4% तक
  • प्रीपेमेंट चार्ज-  बकाया राशि का 0%-5%
  • लेट पेमेंट चार्ज-  बकाया राशि पर प्रति माह 2% से 3% तक शुल्क
  • लोन कैंसलेशन चार्ज- ₹1000 - ₹5,000
  • डॉक्यूमेंटेशन चार्ज - ₹200 - ₹2,000

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FAQs

EMI कैसे कैलकुलेट होती है?

पर्सनल लोन EMI कैलकुलेट करने के लिए लेंडर इस फॉर्मूले EMI= [PXRX(1+R)^N]/[(1+R)^N-1] का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें R का मतलब ब्याज दरें, EMI- मासिक किस्त, N- भुगतान अवधि और P- मूलराशि को इंगित करता है।

EMI कैलकुलेशन का फॉर्मूला क्या है?

पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेशन का फॉर्मूला- EMI= [PXRX(1+R)^N]/[(1+R)^N-1]

ब्याज दर EMI को कैसे प्रभावित करती है?

ब्याज दर सीधे तौर पर ईएमआई को प्रभावित करती है। इंटरेस्ट रेट हाई होने से ईएमआई ज़्यादा होती है, जबकि ब्याज दरें कम होने से ईएमआई भी कम भरनी पड़ती है।

क्या कम ब्याज दर से EMI कम होती है?

हां, ब्याज दर कम होने से आमतौर पर EMI (मासिक किस्त) कम होती है और कुल ब्याज लागत में भी बचत होती है।

लंबी अवधि लेने से EMI पर क्या असर पड़ता है?

पर्सनल लोन की अवधि लंबी होने से ईएमआई कम होती है लेकिन कुल ब्याज लागत ज़्यादा भरना पड़ता है। जबकि छोटी अवधि होने से ईएमआई ज़्यादा लेकिन कुल ब्याज लागत में तुलनात्मक रूप से बचत होती है।  

पर्सनल लोन की न्यूनतम और अधिकतम अवधि कितनी होती है?

पर्सनल लोन आमतौर पर 1 साल से 5 साल के लिए दी जाती है। हालांकि कुछ सरकारी बैंक 6-7 साल की अवधि के लिए भी लोन देते हैं।  

EMI के आधार पर लोन एलिजिबिलिटी कैसे तय होती है?

लोन एलिजिबिलिटी आपकी आय, मौजूदा EMI, क्रेडिट स्कोर और भुगतान क्षमता के आधार पर तय होती है। आमतौर पर, आपकी कुल EMI मासिक आय के 50-55% से अधिक नहीं होनी चाहिए। जितनी अधिक भुगतान क्षमता और बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल होगी, लोन मिलने की संभावना भी उतनी ही अधिक होगी।

सैलरी के हिसाब से EMI कितनी होनी चाहिए?

आमतौर पर बैंक व एनबीएफसी ऐसे आवेदकों को लोन देना पसंद करते हैं जो अपनी कुल ईएमआई (मौजूदा और नए लोन की EMI सहित) के भुगतान में अपनी नेट मंथली सैलरी का 50-55% से कम खर्च करते हैं।    

क्या EMI calculator free है?

हां, पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेटर बिल्कुल मुफ्त है। आप पैसाबाज़ार पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेटर का फ्री में इस्तेमाल कर अपनी लोन EMI आसानी से जान सकते हैं।

फ्लोटिंग और फिक्स्ड इंटरेस्ट EMI क्या है?

पर्सनल लोन फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दर पर लिया जा सकता है। फिक्स्ड ब्याज दर के तहत लिए गए लोन की ब्याज दर और ईएमआई पूरे लोन अवधि एक समान रहती है। जबकि फ्लोटिंग ब्याज दर के तहत लिए गए लोन की ब्याज दरें RBI रेपो रेट के अनुसार बदल सकती है, जिससे EMI या लोन अवधि पर असर पड़ सकता है।    

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