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शैक्षिक संस्थानों ने हमेशा लाखों छात्रों को उनके करियर और जीवन में नई ऊंचाइयां हासिल करने में मदद की है। हालाँकि, भारत में मुख्य रूप से मेट्रोपोलिटन सिटी में एक स्कूल शुरू करना काफी खर्चिला साबित हो सकता है। स्कूल खोलने के लिए समय और पैसों के अच्छे निवेश की आवश्यकता होती है। NGO के अतर्गत आने वाले स्कूलों को कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत रजिस्टर किया जाता है। स्कूल 1860 के सोसायटी अधिनियम के तहत भी खोले जा सकते हैं। स्कूल की खोलने की लागत कई कारणों पर निर्भर करती है जैसे कि स्कूल किस स्थान पर खोला गया है, उसके लिए कौन-सा बोर्ड चुना गया है आदि। अगर आप भी भारत में स्कूल खोलना चाहते हैं तो इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए ये लेख पढ़ें।
आप प्ले स्कूल, किंडरगार्टन, प्री–प्राइमरी, प्राइमरी, सेकेंडरी या हायर सेकेंडरी जैसे विभिन्न प्रकार के स्कूल शुरू कर सकते हैं। कक्षा 8वीं या उससे अधिक की कक्षाओं का स्कूल शुरू करने के लिए व्यक्ति को स्टेट बोर्ड से अनुमित लेनी होगी। इसलिए राज्य बोर्ड से एफिलिएटेड सेकेंडरी या सीनियर सेकेंडरी स्कूल कई अन्य बोर्डों जैसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (CISCE), अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड (IB) या 29 राज्यों के राज्य बोर्ड जैसे बोर्डों के लिए आवेदन किया जा सकता है।
बहुत से लोगों के मन में ये सवाल होता है कि स्कूल खोलने के लिए कितनी ज़मीन चाहिए? आइए जानते हैं:-
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, या बेंगलुरु जैसे प्रमुख महानगरों में प्री–प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी तक स्कूल खोलने के लिए न्यूनतम 1 एकड़ भूमि या 4000 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होती है। माध्यमिक स्तर तक के स्कूल यानी 10वीं कक्षा तक के स्कूलों के लिए आधा एकड़ भूमि या 2000 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होती है। 15 लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख शहरों में प्री–प्राइमरी से 12वीं कक्षा तक के स्कूल खोलने के लिए कम से कम 1 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। छोटे शहरों में स्कूल खोलने के लिए 1.5 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है।
CISCE बोर्ड से एफिलिएटेड स्कूल के लिए कम से कम 2000 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यक्ता होती है, प्रत्येक कक्षा का आकार 400 वर्ग फुट से कम नहीं होना चाहिए। खेल के मैदान, कंप्यूटर और साइंस लैब, लाइब्ररी,आर्ट रूम, एम्फीथिएटर, स्टेज आदि के साथ न्यूनतम क्लास साइज़ 400 वर्ग फुट होना चाहिए।
किसी भी प्रकार का स्कूल खोलने के लिए डीडीए या एमसीडी से और राज्य के संबंधित विकास प्राधिकरण से ज़मीन खरीदनी होगी।
CISCE और CBSE बोर्ड के आवेदन के लिए 1 साल तक स्कूल का संचालन करना ज़रूरी है।
हेड मास्टर, शिक्षक, प्रींसिपल, वाइस प्रींसिपल, असिस्टेंट टीचर, असोशिएट टीचर, अकाउंट्स डिपार्टमेंट, लैब असिस्टेंट, कम्प्यूटर प्रोफेशनल, चपरासी, सहायक कर्मचारी, ड्राइवर आदि की नियुक्ति।
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एक बार जब स्कूल शुरू हो जाता है, तब संबंधित अधिकारियों से लाइसेंस और अनुमति प्राप्त करने में कुछ साल लग जाते हैं। शिक्षा विभाग (DOE) एक निश्चित क्षेत्र में स्कूल खोलने की आवश्यकताओं पर विचार करने के बाद एक अनिवार्यता सर्टिफिकेट (ईसी) जारी करता है। DOE से ये सर्टिफिकेट लेने के बाद 3 साल के भीतर स्कूल का निर्माण शुरू करना होगा। सोसायटी का फाइनेंशियल स्टेटस चेक करने के बाद, सदस्यों के सहयोग की पुष्टि करने और सोसायटी की गैर–मालिकाना प्रकृति को प्रमाणित करने के बाद, ईसी जारी की जाती है।
अगर कोई स्कूल शुरू करने की योजना बना रहा है, तो वह आसानी से बैंकों और एनबीएफसी से बिज़नेस लोन ले सकता है क्योंकि स्कूल खोलने के लिए शुरूआती निवेश अधिक होता है और लोग इसमें अपनी सारी सेविंग्स इंवेस्ट नहीं करना चाहते।
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