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अगर आप कोई स्टार्ट-अप शुरू करना चाहते हैं, तो उस पर काम करना आपको अभी से शुरू कर देना चाहिए। और जब भी हम कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो सबसे बड़ी मुश्किल होती है उसके लिए पैसे जुटाना। इसलिए, आज हम इस लेख में बताएंगें कि आप स्टार्ट-अप के लिए कैसे फण्ड जुटा सकते हैं (How to raise Fund for Start-ups)।
सेल्फ फाइनेंसिंग या व्यक्तिगत निवेश (Personal Investment) का इस्तेमाल ज़्यादातर बिज़नेस स्टार्टअप द्वारा किया जाता है। इसके अंतर्गत उद्यमी अपने बिज़नेस में खुद ही इ्न्वेस्ट करते हैं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि जब आप लोन लेते हैं या वेंचर कैपिटलिस्ट या सरकारी संस्थानों से अपने स्टार्टअप के लिए धन उपलब्ध कराने को कहते हैं, तब वे आपसे यह प्रश्न पूछते हैं कि आप स्वयं अपने स्टार्टअप में कितना धन निवेश करेंगे? फर्स्ट-टाइम एंटरप्रेन्योर्स के लिए अपनी बचत का निवेश करना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसके बाद के चरणों में आप लोन ले सकते हैं।
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एंजल इन्वेस्टर (Angel Investor), वो लोग होते हैं जो किसी व्यवसाय/ स्टार्ट-अप के शुरुआती समय में उसमें निवेश करते हैं और उसके बदले उसमें कुछ हिस्सेदारी लेते हैं। आपको केवल एंजल इन्वेस्टर को ये यकीन दिलाना है कि आने वाले समय में आपका व्यवसाय कामयाब होगा और उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा। भारत के लोकप्रिय एंजल इंन्वेस्टर्स में मुंबई एंजल्स, इंडियन एंजल नेटवर्क और हैदराबाद एंजल्स शामिल हैं। स्टार्टअप ओनर्स फंडिंग हासिल करने के लिए सीधे इनसे संपर्क कर सकते हैं।
क्राउडफंडिंग (Crowdfunding) एक ऐसा कोन्सेप्ट है जिसके ज़रिए व्यवसायिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कई इन्वेस्टर्स से छोटी-छोटी रकम जुटाई जाती है। क्राउडफंडिंग के लिए की सोशल नेटवर्किंग साइट्स और वेब आधारित प्लेटफार्म्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ऑनलाइन क्राउडफंडिंग वेब पोर्टल विभिन्न उद्देश्यों के लिए जैसे- सामाजिक कारणों, दान, आपदा प्रबंधन और इवेंट्स के लिए धन जुटाते हैं। क्राउडफंडिंग से स्टार्टअप और पहली बार बिज़नेस करने वाले लोगों के लिए फंड इकट्ठा करने में मदद मिलती है। भारत के प्रमुख क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म में किकस्टार्टर, केटो,कैटापूल्ट, फ्यूलएड्रीम, फंडेबल, इंडिगोगो, मिलाप, विशबेरी आदि शामिल हैं।
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भारत सरकार द्वारा भी कई योजनाएं शुरू की गईं हैं, जिनका उद्देश्य स्टार्टअप उद्यमों, SMEs, MSMEs को लोन देना है। साथ ही ग्रामीण भारत, महिला उद्यमियों,शिक्षित युवाओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों, लघु उद्योगों (SSIs), ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। स्टार्टअप उद्यमों की मदद के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई लोन योजनाओं में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत आने वाला मुद्रा लोन, स्टार्टअप इंडिया, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडित गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE), स्टैंड-अप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन, मेक इन इंडिया, ट्रेड-रिलेटिड एंटरप्रेन्योरशिप असिस्टेंस एंड डेवलपमेंट (THREAD)आदि शामिल हैं।
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बैंकों द्वारा लोन हासिल करना स्टार्टअप उद्यमों की पहली प्राथमिकता मानी जाती है। उनके अनुसार बैंकों द्वारा धन प्राप्त करना अधिक सुविधाजनक और विश्वसनीय होता है। बैंक स्टार्टअप उद्यमों को टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल लोन नामक दो तरीकों से फंडिंग देते हैं।
भारत में लगभग कई सार्वजिक और निजी क्षेत्र के बैंक स्टार्टअप उद्यमों को बिज़नेस लोन प्रदान करता है। हालांकि, बैंको द्वारा दिए जाने वाले इन लोन में ब्याज दर, लोन राशि, भुगतान की अवधि में विभिन्नता देखी जाती है।
अगर आप पहली बार लोन ले रहें हैं और आपकी कोई फाइनेंशियल हिस्ट्री या कोई क्रेडिट स्कोर नहीं है तो आपके लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंको द्वारा लोन लेना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि आपको कहीं से लोन मिलेगा ही नहीं। दरअसल, आप गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (MFIs) से बिना किसी फाइनेंशियल हिस्ट्री या क्रेडिट स्कोर के अपनी आवश्यकताओं के आधार पर अपने स्टार्टअप के लिए बिज़नेस लोन हासिल कर सकते हैं। हालांकि, NBFCs और MFIs द्वारा प्रदान किए जाने वाले लोन की ब्याज दरें बैंकों की तुलना में अधिक होती हैं।
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हाल के वर्षों में स्टार्टअप उद्यमों द्वारा व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में वृद्धि हुई है। अगर आपको अपने स्टार्टअप (Start-up) के शुरुआती चरणों में ज्यादा धन की आवश्यकता नहीं है, तो आप लेन-देन के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही समय पर भुगतान करके अतिरिक्त ब्याज देने से भी बच सकते हैं।
बैंक और वित्तीय संस्थानों से लोन के लिए फाइनेंशियल हिस्ट्री के साथ-साथ अच्छा क्रेडिट स्कोर होना चाहिए, अगर ऐसा न हो तब आप पीयर-टू-पीयर लेंडिंग (Peer to Peer Lending) के जरिए भी अपने स्टार्टअप के लिए लोन जुटा सकते हैं। पीयर-टू-पीटर लेंडिंग को बिज़नेस की भाषा में P2P के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोई मध्यस्थ नहीं होता। इसमें उधारदाता, उधारकर्ताओं को इन्वेस्टमेंट के रूप में पैसे उधार देते हैं| इस प्रक्रिया में उधारदाताओं को लाभ मिलता है, क्योंकि इसमें उनके द्वारा दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें बैंक, NBFCs और MFIs की तुलना में अधिक होती है। पीयर-टू-पीयर लेंडिंग संस्थानों को उधारदाताओं और उधारकर्ताओं दोनों की बेहतरी के लिए, RBI द्वारा रेगुलेट किया जाता है। स्टार्टअप उद्यमों के लिए पीयर-टू-पीयर लेंडिंग एक तरह का लोन है, जबकि यह उधारदाताओं के लिए एक प्रकार का इन्वेस्टमेंट बन जाता है।
तो इस तरह से हम कह सकते हैं कि आपके पास अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड जुटाने (Raise Fund for Start-up) के कई तरीके मौजूद हैं। ऊपर बताए गए इन तरीकों में से कोई न कोई एक तरीका आपके स्टार्टअप के लिए धन जुटाने में मदद कर सकता है। तो देर किस बात की है, इन सभी उपलब्ध विकल्पों में से अपने लिए उपयुक्त का चयन करते हुए अपने स्टार्टअप को लॉन्च कीजिए।
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