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व्यापार बढ़ाने, सैलरी और किराया मैनेज करने, इन्वेंटरी भरने या नई मशीनरी लेने जैसी विभिन्न ज़रूरतों के लिए बिज़नेस लोन एक बेहतर विकल्प माना जाता है। बहुत से बिज़नेस ओनर अपनी इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लोन लेते भी हैं। लेकिन कुछ लोग बिज़नेस से जुड़ी आम गलफहमियों (Business Loan Myths) के कारण बिज़नेस लोन लेने में संकोच करते हैं। इस लेख में इन्हीं भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास करेंगे ताकि आप बिज़नेस लोन से जुड़ें सही फैसले सकें।
कई लोगों को लगता है कि बिना कुछ गिरवी रखे बिज़नेस लोन नहीं मिल सकता, जबकि ऐसा नहीं है। बिज़नेस लोन ‘सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड’ दो तरह के होते हैं। सिक्योर्ड बिज़नेस लोन लेने के लिए बैंक व एनबीएफसी में कोलैटरल जमा करना होता है। जबकि अनसिक्योर्ड बिज़नेस लोन बिना कुछ गिरवी रखे ही मिल जाता है। यानी अगर आपके पास गिरवी रखने के लिए कोई संपत्ती नहीं है, तब भी आप बिज़नेस लोन ले सकते हैं।
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दूसरी आम गलतफहमी है कि बिज़नेस लोन केवल बड़ी कंपनियों को ही मिलता है, जिनकी रेवन्यू अधिक होती है। लेकिन असल में कई बैंक, एनबीएफसी और डिजिटल लेंडर्स- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) को भी लोन ऑफर करते हैं। इसके साथ ही सरकार भी MSMEs को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाती है। जिसमें पीएम मुद्रा (PM MUDRA) योजना, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) और क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (CLCSS) जैसी योजनाएं शामिल है।
MSMEs को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाएं
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एक समय था जब बिज़नेस लोन मिलने में हफ्तों और महीनों का समय लग जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। डिजिटलीकरण के बाद बिज़नेस लोन मिलने की प्रक्रिया आसान हो गई है। कई बैंक व एनबीएफसी ऑनलाइन बिज़नेस लोन की सुविधा देते हैं, जिसके तहत लोन की आवेदन प्रक्रिया आसान और तेज हो गई है। इससे लोन राशि कुछ समय में ही अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है। दूसरे शब्दों में कहे तो कई लेंडर्स 2-3 दिनों में ही लोन अप्रूव और डिस्बर्स कर देते हैं।
बिज़नेस लोन बिज़नेस की हर छोटी-बड़ी वित्तीय ज़रूरत को पूरा करने के लिए होता है। फिर चाहे वह बिज़नेस की रोजमर्रा खर्चो जैसे सैलरी, किराया, इन्वेंटरी आदि को पूरा करना हो। या फिर नई मशीनरी या प्रापर्टी खरीदनी हो या बिज़नेस का विस्तार करना हो, सब कामों के लिए बिज़नेस लोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। बता दें, वर्किंग कैपिटल लोन बिज़नेस की रोजमर्रा खर्चो को पूरा करने में मदद करता है।
नए बिज़नेस में रिस्क ज़्यादा और फाइनेंशियल हिस्ट्री की कमी होती है। जिस वजह से लोन मिलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि लोन मिलेगा ही नहीं। कई लेंडर्स हैं जो नए बिज़नेस ऑनर्स को उनके बिज़नेस प्लान और रेवेन्यू मॉडल के आधार पर लोन ऑफर करते हैं। इसके अलावा देश में स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी योजना के माध्यम से मदद प्रदान करती है। पीएम मुद्रा और स्टैंड-अप इंडिया जैसी सरकारी योजनाएं नए उद्यमों को फंड प्रदान करती है।
मिथक अक्सर बिज़नेस ऑनर्स को लोन लेने से रोकते हैं, जबकि सही जानकारी उन्हें समझदारी भरा फैसला लेने में मदद करती है। बिज़नेस लोन से जुड़े मिथक और सच को समझकर बिज़नेस ओनर्स अपने लक्ष्यों के लिए सही लोन प्रोडक्ट चुन सकते हैं और अपने व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं। विभिन्न बिज़नेस लोन ऑफर्स की तुलना करने और अपने लिए उपयुक्त बिज़नेस लोन चुनने के लिए आप पैसाबाज़ार की ऐप या वेबसाइट पर विज़िट कर सकते हैं।