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होम लोन एक लंबी अवधि का लोन है, इसलिए इसे चुनते सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है। ज़्यादातर लोग होम लोन लेते समय केवल इंटरेस्ट रेट पर ध्यान देते हैं, जबकि इसके अलावा भी कई ऐसे चार्जेस हैं जो बाद में लोन की कुल लागत को काफी बढ़ा सकते हैं। प्रोसेसिंग फीस, रेट कन्वर्ज़न चार्ज, लेट पेमेंट पेनल्टी, प्रीपेमेंट और फोरक्लोज़र फीस जैसे चार्ज़ेस अक्सर आवेदक द्वारा नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जो आगे चलकर उनकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण होम लोन फीस और चार्जेज़ के बारे में, जिन पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता-
| बैंक/HFCs का नाम | प्रोसेसिंग फीस (लोन राशि का %) |
| भारतीय स्टेट बैंक |
|
| एचडीएफसी |
|
| बजाज हाउसिंग फाइनेंस | लोन राशि का 4% तक + जीएसटी (लागू होने पर) |
| एक्सिस बैंक | 1% तक (न्यूनतम ₹10,000) |
| आईसीआईसीआई बैंक | 2% तक |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 1% तक (डिजिटल एप्लीकेशन्स के लिए प्रोसेसिंग फीस पर 50% की छूट) |
| पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस | 1% तक |
| पंजाब नेशनल बैंक | 31 दिसंबर 2025 तक शून्य |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | लोन राशि का 0.25%-0.50% (₹8,500-25,000) |
| प्रोसेसिंग फीस माफ | |
| आईडीएफसी फर्स्ट बैंक | 3% तक |
| एलएंडटी हाउसिंग फाइनेंस | 3% तक |
| गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस | 3% तक |
| टाटा कैपिटल | नौकरीपेशा आवेदकों के लिए: ₹5,000स्व-नियोजित आवेदकों के लिए: ₹10,000 |
| एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस | 0.25% (न्यूनतम ₹5,000, अधिकतम ₹50,000 ) |
| ईज़ी होम फाइनेंस | ₹10,000 |
*ब्याज दरें 10 सितंबर 2025 को अपडेट की गई हैं।
प्रोसेसिंग फीस वन-टाइम शुल्क है जो बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी होम लोन की प्रोसेसिंग और उसे देने में लगने वाले एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों को कवर करने के लिए लगाते हैं। प्रोसेसिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चें यानी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, एम्प्लॉयमेंट और इनकम चेक आदि के दौरान होने वाले खर्च।
आमतौर पर, प्रोसेसिंग फीस नॉन-रिफंडेबल होती है। इसे या तो लोन अमाउंट से काट लिया जाता है या फिर कुल लागत में जोड़कर लिया जाता है। कुछ खास मामलों में या फिर फेस्टिव ऑफर के दौरान बैंक और लोन संस्थान इस फीस पर या तो छूट देते हैं या फिर इसे माफ भी कर देते हैं।

अपने होम लोन की EMI का समय पर भुगतान न करने पर बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कपनी लेट पेमेंट फीस, पीनल इंटरेस्ट जैसे शुल्क लेते हैं। आमतौर पर, यह बकाया EMI के 1-2% तक हो सकती है। कुछ बैंक हर लेट पेमेंट पर एक फिक्स्ड रकम पेनल्टी के तौर पर ले सकते हैं। 1%-2% की लेट पेमेंट फीस देखने में काफी कम लग सकती है, लेकिन यह आपके लोन की कुल लागत में इज़ाफा कर सकती है। इससे बचने के लिए लोन की EMI का समय पर भुगतान करना ज़रूरी है। समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आप ऑटो-पेमेंट का चुनाव कर सकते हैं जिससे तय तारीख पर ईएमआई आपके अकाउंट से काट ली जाएगी।
होम लोन रेट कन्वर्जन चार्ज तब लिया जाता है, जब आप अपने मौजूदा होम लोन की ब्याज दरों को बदलने या स्विच करने की रिक्वेस्ट करते हैं। जैसे- फिक्स्ड रेट से फ्लोटिंग रेट पर, फ्लोटिंग से फिक्स्ड पर, या फिर मौजूदा फिक्स्ड ब्याज दर को संशोधित दर पर बदलना। रेट कन्वर्जन फीस कितनी होगी यह एक लेंडर से दूसरे के लिए अलग-अलग हो सकती है।
यह भी पढ़ें: फिक्स्ड रेट, फ्लोटिंग रेट या हाइब्रिड होम लोन: किस ऑप्शन को चुनें?
जब आप लोन अवधि समाप्त होने से पहले लोन के कुछ हिस्से का भुगतान करते हैं, तब इसे पार्ट प्रीपेमेंट कहा जाता है। पार्ट प्रीपेमेंट करने पर बैंक और लोन संस्थान पेनल्टी के तौर पर चार्ज लेते हैं, जिसे पार्ट-प्रीपेमेंट चार्ज कहते हैं। लेकिन अगर लोन फ्लोटिंग रेट पर लिया गया है, तो उसके प्रीपेमेंट पर छूट मिलती है। अगर किसी व्यक्ति ने डुअल रेट पर होम लोन लिया है. तो लेंडर्स फिक्स्ड रेट पीरियड के दौरान प्रीपेमेंट पेनल्टी ले सकते हैं। फिक्स्ड अवधि खत्म होने के बाद जब लोन फ्लोटिंग रेट पर आ जाता है, तब बैंक/HFC पेनल्टी नहीं लगा सकते।
अगर लोन अवधि समाप्त होने से पहले ही उधारकर्ता पूरे लोन का भुगतान कर देता है, तो बैंक/लोन संस्थान इस पर फोरक्लोज़र पेनल्टी लगाते हैं। हालांकि, RBI के निर्देशानुसार यह पेनल्टी फ्लोटिंग रेट पर लिए गए होम लोन पर नहीं ली जाती। वहीं फिक्स्ड रेट होम लोन के मामले में यह पेनल्टी एक बैंक/लोन संस्थान से दूसरे में अलग हो सकती है। इसके अलावा, होम लोन के फोरक्लोज़र को लेकर भी लेंडर्स के कुछ नियम होते हैं। जैसे- कई लेंडर्स तब तक फोरक्लोज़र की अनुमति नहीं देते जब तक कि उधारकर्ता तय संख्या में EMI न चुका दे। इसलिए लोन लेते समय फोक्लोज़र से जुड़े नियम और शर्तों के बारे में जानना ज़रूरी होता है।