- सिबिल स्कोर/ क्रेडिट रिपोर्ट: बैंक/ लोन संस्थान आमतौर पर 750 और उससे अधिक के सिबिल स्कोर वाले आवेदकों को लोन देना पसंद करते हैं। ऐसे होम लोन आवेदकों को कम ब्याज दरों पर होम लोन मिलने की संभावना भी अधिक होती है। इसलिए, समय- समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते रहें।
- आवेदक की आयु: होम लोन के लिए आवेदन करने की न्यूनतम आयु आम तौर पर 18 वर्ष है और लोन मैच्योरिटी के समय अधिकतम आयु आमतौर पर 70 वर्ष होनी चाहिए। होम लोन भुगतान अवधि आमतौर पर 30 वर्ष तक होती है। कई बैंक/ लोन संस्थान आवेदक के रिटायरमेंट की आयु को अधिकतम आयु सीमा के रूप में निर्धारित करते हैं। इसलिए, युवा आवेदकों के पास लंबी अवधि के लिए होम लोन लेने की संभावना अधिक होती है।
- आय और रोज़गार: अगर आपकी आय अधिक है तो इससे पता चलता है कि आप आसानी से लोन का भुगतान कर सकते हैं। इससे बैंक/ लोन संस्थान भी जोखिम की कम परवाह करते हुए आपको लोन देते हैं। आमतौर पर, नौकरीपेशा कर्मचारियों के पास कम ब्याज दरों पर होम लोन प्राप्त करने का बेहतर मौका होता है क्योंकि उनकी इनकम ज़्यादा स्थिर होती है। केंद्र/राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, प्रतिष्ठित कॉरपोरेट्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत होम लोन आवेदकों को आमतौर पर कम ब्याज दरों पर होम लोन ऑफर किया जाता है। कई बैंक/ लोन संस्थानों में नौकरीपेशा आवेदकों के लिए ये शर्त निर्धारित की जाती है कि उन्होंने कम से कम 2 साल काम किया हो। वहीं अगर आवेदक गैर- नौकरीपेशा है तो उसका बिज़नेस कम से कम 3 सालों से चल रहा हो।
- भुगतान क्षमता: बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां आमतौर पर उन आवेदकों का होम लोन देना पसंद करती हैं जो अपनी इनकम का 50% तक ही ईएमआई भुगतान (लिए जा रहे होम लोन की ईएमआई को मिलाकर) में खर्च करते हैं। चूंकि लंबी अवधि के लिए लोन लेने से होम लोन की ईएमआई कम हो जाएगी। कम होम लोन योग्यता रखने वाले लोग लंबी अवधि का विकल्प चुनकर इसमें सुधार कर सकते हैं।
- संपत्ति: होम लोन योग्यता का आकलन करते समय, बैंक/ लोन संस्थान प्रॉपर्टी का दौरा करते हैं और उसकी बिल्डिंग विशेषताओं और मार्केट वैल्यू को चेक करते हैं जिससे वो ये निश्चित कर सकें कि उन्हें प्रॉपर्टी के लिए कितनी लोन राशि प्रदान करनी है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक/ लोन संस्थान होम लोन पर प्रॉपर्टी वैल्यू के 90% से अधिक लोन राशि प्रदान नहीं कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आपको घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट के रूप में एक निश्चित राशि का भुगतान करना होगा। अधिक डाउन पेमेंट करने से लोन राशि और लोन-टू-वैल्यू रेश्यो को कम करने में मदद मिलती है, जिससे होम लोन की ओवरऑल एलिजिबिलिटी बढ़ जाती है।
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