समय पर भुगतान करें: सिबिल स्कोर पर सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ता है आपके पेमेंट रिकॉर्ड का। अपनी लोन ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान समय पर और पूरा करें। ऐसा करते रहे और समय के साथ आपका सिबिल स्कोर खुद बढ़ जाएगा।
अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें, ताकि रिपोर्ट किसी भी तरह गलत जानकारी या क्रेडिट स्कोर गिरने पर आपको पता चल जाए। इस तरह आप समय रहते स्कोर में सुधार के लिए कदम भी उठा सकते हैं। कोई गलत जानकारी रिपोर्ट में मिलने पर उसकी सूचना क्रेडिट ब्यूरो को दें।
क्रेडिट यूटिलाईज़ेशन रेश्यो को सीमित रखें: आपकी क्रेडिट क्रेडिट लिमिट का जितना प्रतिशत आप खर्च करते हैं, वही आपका क्रेडिट यूटिलाईज़ेशन रेश्यो होता है। उदाहरण, अगर आपके क्रेडिर कार्ड की लिमिट 1 लाख रु. है और आप उसमें से हर महीने 40,000 रु. खर्च करते हैं तो आपका क्रेडिट यूटिलाईज़ेशन रेश्यो 40% होगा। अगर आप अपने क्रेडिट स्कोर में सुधार करना चाहते हैं तो ये सलह दी जाती है कि अपने क्रेडिट यूटिलाईज़ेशन रेश्यो को 30% से ज़्यादा ना बढ़ने दें। क्रेडिट यूटिलाईज़ेशन रेश्यो ज़्यादा होने से प्रतीत होता है कि आप क्रेडिट पर ज़्यादा निर्भर हैं।
कम समय में कई बार लोन के लिए अप्लाई न करें: जब भी आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक/ लोन संस्थान आपकी क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए क्रेडिट ब्यूरो से अनुरोध करते हैं और इसे हार्ड-इन्क्वायरी माना जाता है। हर बार हार्ड-इन्क्वायरी होने से आपका क्रेडिट स्कोर कुछ पॉइंट कम हो जाता है। आपके लिए कब - कब हार्ड-इन्क्वायरी हुई है, ये जानकारी आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में भी दी जाती है। इसलिए, कम समय में कई बार लोन के लिए अप्लाई ना करें, इससे आपका स्कोर काफी गिर सकता है।
अपने पुराने क्रेडिट अकाउंट बंद ना करें: लोग अक्सर अपने पुराने क्रेडिट कार्ड अकाउंट बंद कर देते हैं, लेकिन ऐसा करने से आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है। अगर आप अपने पुराने क्रेडिट कार्ड बंद नहीं करते हैं, तो बैंक ये देख पाएगा कि आप कब से किस तरह अपने क्रेडिट को मैनेज कर रहे हैं, इससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर होती है।