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जब आप पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक और एनबीएफसी (NBFCs) कई महत्वपूर्ण कारकों के आधार पर ये फैसला करते हैं कि आपको लोन देना है या नहीं। इनमें आपका क्रेडिट स्कोर, आयु, मासिक आय, व्यवसाय, और आपके नियोक्ता या कंपनी की प्रोफाइल शामिल होती है। इस लेख में हम टॉप बैंकों और एनबीएफसी द्वारा निर्धारित पर्सनल लोन की योग्यता शर्तों (Personal Loan Eligibility Criteria) पर चर्चा करेंगे, साथ ही यह भी बताएंगे कि आप अपनी प्रोफाइल को कैसे बेहतर बनाकर पर्सनल लोन पाने की संभावना को बढ़ा सकते हैं।
पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर एक ऐसा आसान टूल है जिससे यह पता लगा सकते हैं कि आप कितनी पर्सनल लोन राशि के योग्य हैं। यह कैलकुलेटर आपके द्वारा दी गई कुछ ज़रूरी जानकारियों के आधार पर काम करता है, जैसे:
इन जानकारियों को दर्ज करने के बाद कैलकुलेटर आपके लोन एलिजिबिलिटी का आकलन करता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि हर बैंक/लोन संस्थान प्रत्येक कारक को अपने हिसाब से प्राथमिकता देता है। इसलिए एक ही आवेदक को विभिन्न बैंकों या वित्तीय संस्थानों से अलग-अलग पर्सनल लोन ऑफ़र मिल सकते हैं।
बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (NBFCs) पर्सनल लोन की ब्याज दरें तय करते समय आवेदकों के क्रेडिट स्कोर को विशेष महत्व देते हैं। जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर अधिक होता है, उन्हें कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन (व्यक्तिगत ऋण) प्रदान किया जाता है। इसलिए, 750 और उससे अधिक क्रेडिट स्कोर बनाए रखें।
भारत के प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो से साल में एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा, आप पैसाबाज़ार जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर मुफ्त में अपना क्रेडिट स्कोर देख सकते हैं।
स्वरोज़गार आवेदकों की तुलना में, बैंक/ एनबीएफसी कम ब्याज दरों पर नौकरीपेशा आवेदकों को पर्सनल लोन प्रदान करते हैं क्योंकि उनकी आय हर महीने निश्चित होती है। नौकरीपेशा आवेदकों में भी, सरकारी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके बाद प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाली कर्मचारी आते हैं।
स्वरोज़गार आवेदकों के मामले में, सीए, डॉक्टर, आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल को कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन मिलने की अधिक संभावना होती है। कई बैंकों/ NBFCs में नौकरीपेशा आवेदकों के लिए अक्सर कम से कम 1 वर्ष का कार्य अनुभव होना आवश्यक है। वहीं स्वरोज़गार या व्यवसायिक आवेदक आमतौर पर कम से कम 2 वर्षों से वर्तमान बिज़नेस चला रहा हो।
अधिकांश बैंक/ एनबीएफसी 18 वर्ष से 65 वर्ष तक की उम्र के आवेदकों को पर्सनल लोन प्रदान करते हैं। कई पब्लिक सेक्टर बैंक/ NBFCs पेंशनर को पर्सनल लोन उनकी पेंशन इनकम के आधार पर प्रदान करते हैं।
आपकी आय यह दर्शाती है कि आप लोन की EMI समय पर चुकाने में कितने सक्षम हैं। अधिक आय वाले आवेदकों को बेहतर ऑफ़र मिलते हैं क्योंकि उनसे जुड़े जोखिम कम होते हैं।
कई बैंक/ लोन संस्थानों से पर्सनल लोन लेने के लिए नौकरीपेशा आवेदकों के पास कम से कम 1 साल का अनुभव होना चाहिए जिसमें कम से कम 6 महीने से वर्तमान कंपनी/ नियोक्ता के साथ काम कर रही हों। वहीं अगर आवेदक गैर- नौकरीपेशा है तो कम से कम 3 साल से वर्तमान बिज़नेस चला रही हों।
बैंक/ एनबीएफसी आमतौर पर उन आवेदकों का पर्सनल लोन आवेदन मंजूर करते हैं जिनका ईएमआई/एनएमआई रेश्यो 50% या 55% से ज्यादा नहीं है। यह सभी लोन संस्थानों में अलग-अलग हो सकता है। आप अपनी मासिक इनकम के जितने प्रतिशत का उपयोग मौज़ूदा ईएमआई और लिए जा रहे लोन की ईएमआई के भुगतान में करते हैं, उतना ही आपका ईएमआई/ एनएमआई रेश्यो होता है।
बैंक और NBFCs किसी आवेदक को अधिकतम कितना पर्सनल लोन देना है, यह तय करने के लिए आमतौर पर मल्टीप्लायर मेथड और EMI/NMI जैसे दो रेश्यो या इनके कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करते हैं।
इस मेथड में बैंक आवेदक की नेट मंथली सैलरी (NMI) को पहले से निर्धारित संख्या (आमतौर पर 10 से 24) से गुना करते हैं और उसी के आधार पर लोन की रकम तय करते हैं। सैलरी का कितना गुना पर्सनल लोन आपको दिया जाएगा यह हर बैंक में अलग-अलग हो सकता है और आमतौर पर आवेदक की प्रोफाइल, क्रेडिट स्कोर जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
दूसरी तरफ आप अपने नेट मंथली इनकम (NMI) में से जितना हिस्सा लोन की EMI के भुगतान में खर्च करते हैं (जिसमें आवेदन किए गए लोन की ईएमआई शामिल है), वही आपका EMI/NMI रेश्यो होता है। EMI/NMI रेश्यो जितना कम होगा, उतना ही बेहतर माना जाता है। अधिकतर बैंक ऐसे आवेदकों को प्राथमिकता देते हैं जिनका EMI/NMI रेश्यो 50-55% तक होता है।
उम्र:
रोजगार का प्रकार:
आय:
क्रेडिट स्कोर:
कार्य अनुभव:
वही दूसरी तरफ पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी चेक करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप Paisabazaar जैसी विश्वसनीय वेबसाइट पर जाएं। यह आपको आपके प्रोफाइल और लोन स्वीकृति की संभावना के आधार पर बताएगा कि आप किन लोन ऑफ़र्स के लिए योग्य हैं। इससे आप उन्हीं ऑफ़र्स के लिए आवेदन कर पाएंगे जो आपके लिए सबसे उपयुक्त हैं।
बिना नौकरी या स्थायी आय के पर्सनल लोन मिलना मुश्किल होता है, क्योंकि बैंक और एनबीएफसी किसी भी लोन को स्वीकार करने से पहले आवेदक की आय और लोन चुकाने की क्षमता का मूल्यांकन करते हैं। अगर आपके पास कोई स्थायी आय स्रोत नहीं है जैसे: नौकरी, व्यवसाय या पेंशन, तो पर्सनल लोन मिलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।
जिनकी सैलरी न्यूनतम 15,000 रु. प्रति माह है वो पर्सनल लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। हालांकि, कुछ लेंडर्स मिनिमम सैलरी रिक्वायरमेंट इससे अधिक रख सकते हैं।
पर्सनल लोन के लिए न्यूनतम सिबिल स्कोर की कोई लिमिट नहीं है यह बैंक और NBFCs पर निर्भर करता है। हालांकि, ज़्यादातर बैंक 750 और इससे ज़्यादा सिबिल स्कोर को अच्छा मानते हैं। कई बैंक और लोन संस्थान 750 से कम सिबिल स्कोर वाले आवेदकों को पर्सनल लोन देते हैं लेकिन अधिक ब्याज वसूलते हैं।
हां, अगर आपकी सैलरी कम है तो भी आप पर्सनल लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सभी बैंक पर्सनल लोन के लिए न्यूनतम सैलरी की शर्त निर्धारित नहीं करते हैं। हो सकता है कि सैलरी कम होने से आपके लिए अधिक ब्याज दरों पर कम लोन राशि मंज़ूर हो।
हां, बिना सैलरी स्लिप के भी आप पर्सनल लोन ले सकते है। सैलरी स्लिप के बजाय आवेदक अपना बैंक अकाउंट स्टेटमेंट/ एम्प्लॉयी सर्टिफिकेट की कॉपी, आदि को आय प्रमाण पत्र के रूप में जमा कर सकते हैं। ध्यान दें कि हर बैंक या वित्तीय संस्था की दस्तावेज़ी आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित संस्थान से आवश्यक दस्तावेज़ों के बारे में पहले से पता कर ले।
जो लोग पर्सनल लोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, वे नीचे दिए गए सुझावों को अपनाकर लोन अप्रूव्ल की संभावना को बढ़ा सकते हैं:-
बैंक और एनबीएफसी आमतौर पर 50-55% तक के EMI/NMI रेश्यो वाले आवेदकों को पर्सनल लोन देना पसंद करते हैं।
नहीं, एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर से मिली राशि अनुमानित होती है। आपको कितनी लोन राशि मिलेगी यह आपकी आय, क्रेडिट स्कोर, मौजूदा EMI, और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
जी हां, आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Paisabazaar के ज़रिये विभिन्न बैंकों और एनबीएफसी के पर्सनल लोन की तुलना और एलिजिबिलिटी आसानी से चेक कर सकते है। इसके लिए आपको नीचे दिए गए आसान से स्टेप्स को फॉलो करना होगा:
पर्सनल लोन के लिए सैलरी कैलकुलेशन करते समय आमतौर पर पिछले 3 महीने की सैलरी स्लिप मांगी जाती है।
हां, जब आप अपने मौजूदा पर्सनल लोन को किसी अन्य बैक और एनबीएफसी में ट्रांसफर करते है, तो नया बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट के माध्यम से दोबारा आपकी एलिजिबिलिटी को चेक करता है।