पर्सनल लोन प्रीपेमेंट के कुछ लाभ इस प्रकार हैं:
क्रेडिट मिक्स में अनसिक्योर्ड लोन के रेश्यो को कम करता है
क्रेडिट मिक्स कुल बकाया सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड या अन्य क्रेडिट सुविधाओं के बीच का रेश्यो होता है। आपने जितने लोन लिए हुए हैं, अगर उनमें अन-सिक्योर्ड लोन का प्रतिशत कम हो तो आपके सिबिल स्कोर पर बेहतर असर हो सकता है।
ब्याज लागत पर बचत
पर्सनल लोन की प्रीपेमेंट करने से उधारकर्ता उस ब्याज लागत पर बचत कर सकते हैं जो उन्होंने पूरी अवधि के लिए लोन जारी रखने पर खर्च की होती। उदाहरण के लिए, यदि किसी आवेदक ने 10 लाख रुपये तक का पर्सनल लोन लिया है जिसकी ब्याज दर 13% प्रति वर्ष है और लोन अवधि 5 साल तक है तो ईएमआई 22,753 रु. होगी और कुल ब्याज लागत लगभग 3.65 लाख रुपये होगी। यदि वे 1 वर्ष के बाद पूरी बकाया लोन राशि का भुगतान करने का फैसला करते हैं, तो वे ब्याज लागत पर लगभग 2.09 लाख रु. की बचत कर सकते हैं।
उधारकर्ताओं के लिए EMI अफोर्डेबिलिटी बढ़ती है
बैंक/एनबीएफसी उन पर्सनल लोन आवेदकों को लोन देना पसंद करते हैं, जिनकी कुल ईएमआई जिसमें मौजूदा ईएमआई और साथ ही नए लोन की ईएमआई शामिल है, उनकी कुल मासिक आय के 50% से 60% से अधिक नहीं होती है। इस प्रकार, जिन लोगों के पास उनकी मासिक आय की इस लिमिट से अधिक ईएमआई राशि का भुगतान बकाया रहता है, उनकी पर्सनल लोन प्राप्त करने की संभावना कम होती है।
ऐसे पर्सनल लोन उधारकर्ता मौजूदा पर्सनल लोन की प्रीपमेंट करके अपनी लोन योग्यता में सुधार कर सकते हैं ताकि उन्हें इमरजेंसी में पर्सनल लोन लेने में मुश्किल ना आए और इस प्रकार, अपनी मासिक आय के 50% – 60% के ब्रैकेट के भीतर अपने ईएमआई / एनएमआई रेश्यो को कम कर सकते हैं।



