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लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड (LAMF) एक ऐसी सुविधा है, जिसके तहत निवेशक अपने फंड को बेचे बिना उस पर लोन प्राप्त कर सकते हैं। LAMF आमतौर पर ओवरड्रॉफ्ट सुविधा के रुप में दिया जाता है। यानी गिरवी रखे सिक्योरिटी के आधार पर निवेशक के खाते में एक लिमिट तक पैसे दे दिए जाते हैं जिसमें से निवेशक अपनी ज़रूरत अनुसार पैसे निकाल सकता है। ये लोन राशि इंडिविजुअल के लिए 10,000 से लेकर 20 लाख रु. तक हो सकती है और ट्रस्ट कंपनी, व पार्टनरशिप फर्म आदि के लिए लोन लिमिट और अधिक हो सकती है। नीचे लेख में LAMF की ब्याज दरें, इंटरेस्ट रेट, फीस व चार्जेस, विशेषताएं, योग्यता शर्तों और दस्तावेज़ों आदि के बारे में जानें:
यहां नीचे टेबल में म्यूचुअल फंड के बदले लोन देने वाले टॉप बैंक व एनबीएफसी के बारे में बताया गया है:
| लोन संस्थान | ब्याज दरें (प्रति वर्ष) |
| भारतीय स्टेट बैंक | 10.05% |
| बजाज फाइनेंस | 20% तक |
| मिराई एसेट फाइनेंशियल सर्विस | 10.50% |
| टाटा कैपिटल | 8.00%-20.00% |
| एक्सिस बैंक | 11.49%-13.75% |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | 9.90%-11.25% |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 8.00%-11.00% |
| केनरा बैंक | 15.80% से शुरू |
| IIFL फाइनेंस | 20% तक |
बैंक व एनबीएफसी LAMF स्कीम्स पर कई सारे चार्जेस लगा सकते हैं। जिसमें इंसिडेंटल चार्जेस, प्रोसेसिंग फीस, एनुअल मैनटेनेंस फीस (AMC), रिन्यूवल फीस, ओवरड्यू इंटरेस्ट चार्ज, प्लेज चार्ज और पीनल चार्जेस आदि शामिल है। ये चार्जेस एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग हो सकता है।
| विवरण | चार्जेस |
| प्रोसेसिंग फीस | सैंक्शन लोन राशि का 0.35%- 5% |
| एनुअल प्रोसेसिंग फीस (AMC) | लोन राशि का 0.1% – 5% |
| रिन्यूवल फीस | सैंक्शन राशि का 1.18% तक |
| पीनल इंटरेस्ट | 15% से 36% प्रति वर्ष |
| प्रीपेमेंट/फोरक्लोज़र चार्ज | शून्य |
| प्लेज चार्जेस | एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग |
इस्तेमाल पर कोई पाबंदी नहीं
उधारकर्ता इस लोन राशि का इस्तेमाल अपने किसी भी वित्तीय काम जैसे- बिज़नेस बढ़ाने, मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई या अन्य वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए कर सकते हैं। LAMF सुविधा उधारकर्ताओं को ये सुविधा देती है कि वो अपना एमएफ बेच बिना शॉर्ट या मीडियम टर्म के वित्तीय ज़रूरतों को प्राप्त कर सकते हैं। अधिकतर बैंक व एनबीएफसी डिजिटल माध्यम से लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड प्रदान करते हैं।
लोन राशि
लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड के तहत 10,000 से लेकर 5 करोड़ रु. तक लोन प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि अधिकतम लोन राशि की सीमा बैंक और गिरवी रखे जाने वाले सिक्योरिटी पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए- बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) 1 लाख से 5 करोड़ रुपये तक लोन ऑफर करता है। साथ ही इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड (नॉन-डीमैट फॉर्म) पर अधिकतम 10 लाख और डीमैट में रखे इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 20 लाख रु. तक का लोन देता है। वहीं डीमैट और नॉन-डीमैट अकाउंट में रखे डेट फंड पर अधिकतम 5 करोड़ लोन ऑफर करता है।
कुछ बैंक व एनबीएफसी इससे भी अधिक लोन राशि ऑफर करते हैं खासतौर पर नॉन- इंडिविजुअल आवेदकों को। उदाहरण के लिए- बजाज फाइनेंस कॉरपोरेट, पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाइब्लिटी पार्टनरशिप (LLP), HUF और ट्रस्ट आदि को 1000 करोड़ रु. तक लोन देने का दावा करता है।
इसके अलावा आप डिजिटल तरीके से लोन ले रहे हैं या ऑफलाइन तरीके से इस आधार पर भी लोन राशि तय होती है। उदाहरण के लिए- टाटा कैपिटल ऑफलाइन तरीके से 75,000 से 40 करोड़ रु. तक LAMF प्रदान करता है वहीं, डिजिटल चैनल के जरिए 25,000 से 5 करोड़ के बीच लोन ऑफर करता है।
आमतौर पर LAMF की लिमिट गिरवी रखे जाने वाले सिक्योरिटी की मार्केट वैल्यू, क्वांटिटी और एलटीवी रेश्यो आदि पर निर्भर करती है। हालांकि उधारकर्ता मौजूदा लोन खाते में और सिक्योरिटी गिरवी रखकर अपनी लोन लिमिट बढ़ा सकते हैं।
लोन अवधि
अधिकतर बैंक व एनबीएफसी 1 साल के लिए LAMF सुविधा ऑफर करते हैं, जिसे उधारकर्ता के भुगतान क्षमता के आधार पर रिन्यू भी किया जा सकता है।
रिपेमेंट सुविधा
म्यूचुअल फंड के बदले लोन आमतौर पर ओवरड्रॉफ्ट के रुप में दिया जाता है। जिस पर उधारकर्ता को मासिक आधार पर केवल इस्तेमाल किए गए राशि पर ब्याज का भुगतान करना होता है न कि सैंक्शन लिमिट पर। इसके अलावा उधारकर्ता मूल राशि का भुगतान लोन अवधि के अंत में या कभी भी कर सकते हैं। इस तरह तुरंत पैसों की ज़रूरत पड़ने पर LAMF एक अच्छा लोन विकल्प है।
LTV रेश्यो
लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड का एलटीवी रेश्यो फंड के नेट एसेट वैल्यू का 50% से 90% तक होता है। हालांकि यह गिरवी रखे जा रहे फंड की स्कीम (इक्विटी और डेट)और किस बैंक में गिरवी रख रहें हैं इसपर निर्भर करता है। आरबीआई के नियमानुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड का एलटीवी रेश्यो 75% है। जबकि डेट फंड के लिए कोई सीमी निर्धारित नहीं है। यानी बैंक डेट फंड के लिए एलटीवी रेश्यो निर्धारित कर सकते हैं। यहां नीचे डेट और इक्विटी म्यूचुअल फंड के LTV रेश्यो के बारे में बताया गया है:
मार्जिन कॉल
अगर गिरवी रखे सिक्योरिटी की मार्केट वैल्यू कम होती है तो मिला हुआ ओवरड्रॉफ्ट लिमिट भी कम हो जाएगा। ऐसी स्थिति में अगर आपने पहले सैंक्शन लिमिट के हिसाब से खर्च कर लिया और बाद में लिमिट कम हो गई तो इन दोनों के बीच की अंतर वाली राशि ओवरड्यू मानी जाएगी। जिसे उधारकर्ता को क्लेयर करना होगा या फिर उतनी ही वैल्यू की और सिक्योरिटी जमा करनी होगी। अगर उधारकर्ता ऐसा नहीं करता तो लोन संस्थान ओवरड्यू राशि की वैल्यू जितना गिरवी रखा म्यूचुअल फंड यूनिट बेचकर अपने नुकसान की भरपाई करेगा।
लोन संस्थान आमतौर पर निम्नलिखित कारकों पर LAMF के लिए योग्यता शर्तें निर्धारित करते हैं।
हालांकि अधिकतर बैंक म्यूचुअल फंड के बदले लोन देने के लिए न्यूनतम सिबिल स्कोर की मांग करते हैं। उदाहरण के लिए- बैंक ऑफ बड़ौदा ने LAMF के लिए न्यूनतम 701 सिबिल स्कोर निर्धारित किया है। (-1) या (0) सिबिल स्कोर वाले आवेदक भी इस बैंक से लोन लेने के योग्य हैं।
LAMF लोन लेने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग हो सकते हैं। हालांकि नीचे ऐसे दस्तावेज़ों का जिक्र किया गया है जो सामान्यतः बैंकों द्वारा मांगे जाते हैं:
ऐसे लोग जिन्हें खराब या कम क्रेडिट स्कोर की वजह से पर्सनल लोन नहीं मिल पा रहा है या मिल भी रहा है तो अधिक ब्याज दर पर, ऐसे लोगों के लिए लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड एक अच्छा ऑप्शन है। अधिकतर बैंक व एनबीएफसी बिना क्रेडिट स्कोर के भी LAMF लोन प्रदान कर देते हैं। LAMF ओवरड्रॉफ्ट सुविधा के रुप में मिलता है, इसलिए कम समय के लिए पैसों की ज़रूरत को पूरा करने के लिए एक अच्छा विकल्प है।
LAMF उधारकर्ता ये ध्यान दें कि आमतौर पर लोन संस्थान समय-समय पर गिरवी रखे सिक्योरिटी का मूल्यांकन करते रहते हैं। खासतौर पर बाज़ार के भारी गिरावट या मंदी के दौर में। अगर गिरवी रखे सिक्योरिटी की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) में गिरावट आती है और उसकी वैल्यू सैंक्शन लिमिट से कम हो जाती है तो उस राशि को ओवरड्यू माना जाता है। इसे उदाहरण से समझें- आपको 30 लाख का लोन सैंक्शन हुआ, जिसमें से आपने 25 लाख रु. खर्च कर दिए। और पुनर्मूल्यांकन करने पर आपके सिक्योरिटी की वैल्यू गिरकर 20 लाख रह गई है। ऐसे में (30 -25=) 5 लाख आपका ओवरड्यू अमाउंट हो गया।
इस ओवरड्यू को चुकता करने के लिए आप नकद राशि, चेक दे सकते हैं या फिर उतनी ही वैल्यू का और म्यूचुअल फंड यूनिट आपको गिरवी रखना होगा। अगर आप ओवरड्यू का भुगतान नहीं कर पाते हैं तो उधारकर्ता आपसे पीनल चार्ज ले सकता है। इतना ही नहीं अपने नुकसान की भरपाई के लिए उधारकर्ता आपके गिरवी रखे सिक्योरिटिज को बेच भी सकता है।
म्यूचुअल फंड के बदले लोन लेने के लिए आपको अपना एमएफ लोन संस्थान के पास गिरवी रखना होता है। ये एमएफ डीमैट अकाउंट या फिजिकल फॉर्म में हो सकते हैं। अगर आपका म्यूचुअल फंड डीमैट अकाउंट में है तो आप इसे NSDL या CDSL के ज़रिए गिरवी रख सकते हैं। वहीं एमएफ फिजिकल फॉर्म में होने पर CAMS या Karvy के जरिए यूनिट्स गिरवी रख सकते हैं।
म्यूचुअल फंड के बदले कितना लोन मिलेगा ये गिरवी रखे जाने वाले एमएफ स्कीम पर निर्भर करता है। हालांकि लोन- टू- वैल्यू (LTV) रेश्यो सिक्योरिटी के नेट एसेट वैल्यू का 50-90% के बीच हो सकता है। बैंक रेगुलेटरी कैप और सिक्योरिटी के आधार पर एलटीवी रेश्यो तय करते हैं। आरबीआई के नियम अनुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड के लिए LTV रेश्यो 75% है। हालांकि नियामक ने डेट फंड के लिए कोई एलटीवी रेश्यो तय नहीं की है, बैंक खुद डिसाइड कर सकते हैं।
कुछ बैंक व एनबीएफसी सीधे तौर पर लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड ऑफर करते हैं वहीं कुछ बैंक लोन अगेंस्ट सिक्योरिटी (LAS) के तहत एमएफ पर लोन देते हैं। LAMF लोन लेने के लिए आप अपने नजदीकी बैंक ब्रांच जा सकते हैं या फिर पैसाबाज़ार जैसे ऑनलाइन फाइनेंशियल मार्केटप्लेस पर जाकर विभिन्न लोन संस्थानों के LAMF की तुलना कर सकते हैं।
लोन संस्थानों के पास एक लिस्ट होती है और वह उस लिस्ट में शामिल म्यूचु्अल फंड स्कीम पर ही लोन प्रदान करते हैं। इसलिए लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड (LAMF) लेने वाले उधारकर्ता बैंक से उस लिस्ट के बारे में पूछ सकते हैं और चेक कर सकते हैं कि क्या लिस्ट में शामिल एमएफ उनके पास है, जो वह गिरवी रख सकते हैं। ध्यान दें कि इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), जो टैक्स सेविंग स्कीम के नाम से लोकप्रिय है, उस पर लोन नहीं मिलता है।
अधिकांश बैंक और एनबीएफसी अपनी ऑफ़लाइन सुविधा के अलावा डिजिटल रूप से म्यूचुअल फंड पर लोन प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, एचडीएफसी और टाटा कैपिटल ऑनलाइन तरीके से एमएफ पर लोन प्रदान करते हैं। दूसरी ओर कुछ ऋणदाता केवल डिजिटल तरीके से ही लोन देते हैं। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप सीधे बैंक व एनबीएफसी से संपर्क कर सकते हैं।
लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड ओवरड्राफ्ट के रुप में प्रदान की जाती है। जिसके तहत उधारकर्ता को केवल इस्तेमाल की जाने वाली राशि पर ब्याज का भुगतान करना होता है न कि सैंक्शन लिमिट पर। इसलिए इस्तेमाल न किए जाने वाले LAMF अमाउंट पर कोई ब्याज नहीं देना होगा।
जब आप अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स के बदले लोन लेते हैं तो लोन संस्थान उसे डिजिटली तरीके से Lien मार्क कर देता है। ताकि आप उस यूनिट को लोन भुगतान से पहले रिडिम या बेच न सके।
हां, आप अपने म्यूचुअल फंड यूनिट को गिरवी रखने के बाद भी इस पर लाभांश प्राप्त कर सकते है। म्यूचुअल फंड को गिरवी रखने से आपकी ओनरशिप पर कोई नाकारात्म प्रभाव नहीं पड़ता है। एमएफ पर लोन होते हुए भी आप इस पर मिलने वाले सभी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
नहीं, आप लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड का पूरा भुगतान किए बिना गिरवी रखे एमएफ यूनिट्स नहीं बेच सकते हैं। जब आप एमएफ गिरवी रखते हैं लोन संस्थान उसे डिजिटली Lien मार्क कर देते हैं, जो कानूनी रुप से आपको लोन भुगतान किए बिना एमएफ यूनिट्स बेचने की अनुमति नहीं देता है।
आमतौर पर बैंक व एनबीएफसी लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड पर कोई फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लेते हैं। क्योंकि LAMF ओवरड्रॉफ्ट सुविधा के रुप में प्रदान किया जाता है। हालांकि टर्म लोन के रुप में LAMF लेने वाले उधारकर्ता बैंक से फोरक्लोजर व प्रीपेमेंट चार्जेस (अगर कोई हो) के बारे में पता कर सकते हैं।