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फिक्स्ड डिपॉज़िट उन लोगों का पसंदीदा विकल्प है जो सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं। इसके ज़रिए कस्टमर्स पहले से निर्धारित ब्याज़ दरों पर गारंटीड रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही म्यूच्युअल फंड की तरह एफडी में मार्केट-आधारित जोखिम नहीं होते। इसके साथ ही आप पैसों की ज़रूरत पड़ने पर एफडी का प्रीमैच्योर विड्रॉल कर सकते हैं। इस लेख में हमने प्रीमैच्योर विड्रॉल से संबंधित जानकारी प्रदान की है।
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अभी अप्लाई करेंम्यूच्युअल फंड की तरह एफडी में मार्केट-आधारित जोखिम नहीं होते। इसके साथ ही आप पैसों की ज़रूरत पड़ने पर एफडी का प्रीमैच्योर विड्रॉल कर सकते हैं। इस लेख में हमने प्रीमैच्योर विड्रॉल से संबंधित जानकारी प्रदान की है।
फिक्स्ड डिपॉज़िट,प्रीमैच्योर विड्रॉल की सुविधा के ज़रिए कस्टमर अपनी एफडी को मेच्योरिटी से पहले बंद कर सकते हैं। इसे FD तोड़ना भी कहा जाता है। पैसों की ज़रूरत पड़ने पर ये सुविधा राहत के रूप में काम आती है।
हालांकि, प्रीमैच्योर विड्रॉल करने पर आपको पेनल्टी भी देनी पड़ती है। यह पेनल्टी 0.5%-1% के बीच होती है। कुछ बैंक शून्य पेनल्टी के साथ प्री–मैच्योर विड्रॉल सुविधा देते हैं। इसके साथ ही अगर आप एफडी बुक करने की तारीख से 7 दिन पूरा किए बगैर एफडी तोड़ देते हैं, तो बैंक या NBFC एफडी पर कोई भी ब्याज़ प्रदान नहीं करती।
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पेनल्टी वह लागत है जो बैंकों या कंपनियों द्वारा उस समय वसूली जाती है जब जमाकर्ता समय से पहले (प्री-मैच्योर) या मैच्योरिटी तारीख से पहले अपने फिक्स्ड डिपॉज़िट अकाउंट से पैसे निकाल लेता है। यह लगातार विड्रॉल को करने से रोकता है और बचत की आदत को प्रोत्साहित करता है।
जमाकर्ता को भुगतान किए जाने वाले ब्याज पर पेनल्टी देनी पड़ती है। मान लीजिए कि बैंक प्री-मैच्योर विड्रॉल पर 1% पेनल्टी लगाता है, इसलिए FD की प्री-मैच्योर पर ब्याज की कैलकुलेशन निम्नानुसर की जाएगी।
मान लीजिए किसी ग्राहक के पास 1 लाख रु. की FD है और ब्याज 8% (संचयी) कमा रहा है। वह 1 वर्ष पूरा करने के बाद FD निकाल लेता है। एक वर्ष में, उसने @ 8% ब्याज कमाया है, लेकिन अब, बैंक संशोधित FD दरों पर ब्याज को दोबारा कैलकुलेट करेगा, अर्थात 8% – घटाया 1%। नई दर 7% होगी।
ध्यान दें: विड्रॉल के समय वास्तविक कैलकुलेशन अलग हो सकती है। यह उदाहरण केवल सांकेतिक उद्देश्य के लिए है।
मान लीजिए कि एक ग्राहक ने 2 साल के लिए 7% की दर से 1 लाख रुपये के फिक्स डिपॉज़िट में निवेश किया है। हमें यह भी मान लेना चाहिए कि 1 वर्ष के लिए ब्याज दर 6.5% है। वह 1 साल पूरा करने के बाद फिक्स डिपॉज़िट निकाल लेता है। एक वर्ष में, उन्होंने 7% ब्याज अर्जित किया है। लेकिन अब, बैंक संशोधित फिक्स डिपॉज़िट दरों पर ब्याज की फिर से कैल्कुलेशन करेगा, अर्थात 6.5% – 1% = 5.5%,नई दर 5.5% होगी और इस दर पर ब्याज देना होगा।
| पैरामीटर | विवरण |
| मूल राशि | ₹ 1 लाख |
| दो साल की फिक्स डिपॉज़िट पर बुक की गई ब्याज दर | प्रति वर्ष 7% |
| एक वर्ष के बाद मैच्योरिटी राशि | ₹ 1,07,186 |
| एक वर्ष की फिक्स डिपॉज़िट पर ब्याज दर (फिक्स डिपॉज़िट बुक करते समय) | एक साल में 6.5% |
| प्रभावी दर | एक साल में 6.5% |
| समय से पहले पैसे निकालने पर पेनल्टी चार्ज | 1% |
| देय ब्याज की अंतिम दर | 5.5% प्रति वर्ष |
| समयपूर्व निकासी पर प्राप्त होने वाली राशि | ₹ 1,05,614 |
मान लीजिए कि एक ग्राहक ने 2 साल के लिए 6% की दर से 1 लाख रुपये की फिक्स डिपॉज़िट में निवेश किया है। आइए हम यह भी मान लें कि बुकिंग के समय 1 वर्ष के लिए ब्याज दर 7% है और समय से पहले पैसे निकालने या एफडी तोड़ने पर पैनेल्टी के रूप में 1% ब्याज दर काटी जाएगी। वह 1 साल पूरा करने के बाद फिक्स डिपॉज़िट निकाल लेता है। एक वर्ष में, उन्होंने 6% की ब्याज अर्जित की है। लेकिन अब, बैंक प्रभावी फिक्स डिपॉज़िट (-1%) दर पर ब्याज को फिर से कैल्कुलेट करेगा, यानी 6% – 1% = 5%। नई दर 5% होगी और इस दर पर ब्याज कैल्कुलेट किया जाएगा।
| पैरामीटर | विवरण |
| मूल राशि | ₹ 1 लाख |
| दो साल की फिक्स डिपॉज़िट पर बुक की गई ब्याज दर | 6 % प्रति वर्ष |
| एक वर्ष के बाद मेच्योरिटी राशि | ₹ 1,06,136 |
| एक वर्ष की फिक्स डिपॉज़िट पर ब्याज दर (फिक्स डिपॉज़िट बुक करते समय) | प्रति वर्ष 7 % |
| प्रभावी दर | 6 % प्रति वर्ष |
| समय से पहले निकासी पेनल्टी चार्ज | 1 % |
| देय ब्याज की अंतिम दर | प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत |
| समयपूर्व निकासी पर प्राप्त होने वाली राशि | ₹ 1,05,095 |
नोट: वास्तविक कैल्कुलेशन अलग हो सकती है। यह उदाहरण केवल सांकेतिक उद्देश्य के लिए है।
अपनी फाइनेंशियल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए लोग अक्सर अपनी एफडी तोड़ देते हैं। एफडी तोड़ने पर डिपॉज़िटर को प्रीमैच्योर विड्रॉल पेनल्टी का भी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अगर आपसे ये कहा जाए कि आप एफडी का प्रीमैच्योर विड्रॉल किए बिना भी एफडी राशि का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो आप क्या करेंगें?
दरअसल, कई बैंक अपने ग्राहकों को एफडी के बदले क्रेडिट कार्ड की सुविधा प्रदान करते हैं। इस क्रेडिट कार्ड के द्वारा आप अपनी एफडी की 75-85% तक की राशि का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह, आपको एफडी पर ब्याज़ मिलता रहेगा, साथ ही आप अपनी ज़रूरतों को भी पूरा कर सकेंगे।
ये भी पढ़ें: एफडी के बदले क्रेडिट कार्ड कैसे लें?
प्री-मैच्योर विड्रॉल के बिना फिक्स्ड डिपॉज़िट आमतौर पर अधिक जमा राशि के साथ होते हैं और जमाकर्ता को मैच्योरिटी से पहले FD को बंद करने की अनुमति नहीं होती है। ब्याज की दर प्री-मैच्योर विड्रॉल विकल्प वाले लोगों की तुलना में कम हो सकती है।
कुछ बैंक जिनके पास यह सुविधा है:
बैंक जैसे आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) बैंक, कोटक बैंक, एचडीएफसी (HDFC) बैंक, आदि के पास विशिष्ट नियम और शर्तें हैं, जो मैच्योरिटी अवधि पूरी होने से पहले अपने पैसे को फिक्स्ड डिपॉज़िट से निकालने के लिए तैयार हैं।
प्री-मैच्योर FD की सुविधा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके हैं।
जब यह ऑफ़लाइन विड्रॉल की पारंपरिक तरीके की बात आती है, तो ग्राहकों को अपने संबंधित बैंकों की शाखा जाकर और प्री-मैच्योर FD बंद करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए, उन्हें लागू फॉर्म भरना होगा, कुछ दस्तावेज़ जमा करने होंगे और अपनी FDR (फिक्स्ड[ डिपॉज़िट रसीद ) को सरेंडर करना होगा।
ऑनलाइन तरीके के लिए महत्वपूर्ण बातों पर विचार किया जाना है:
भारत में प्रमुख बैंकों द्वारा फिक्स्ड डिपॉज़िट पर प्री-मैच्योर के नियमों की व्यापक तुलना नीचे दी गई है:
ये भी पढ़ें: वरिष्ठ नागरिकों को FD पर कितना ब्याज मिलता है? जानें
चूंकि SBI के साथ फिक्स्ड डिपॉज़िट की प्री-मैच्योर विड्रॉल ऑनलाइन उपलब्ध है, इसलिए इसके लिए शाखा जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
उसी के लिए आवश्यक विड्रॉल प्रक्रिया और दस्तावेज़ों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, SBI की ग्राहक देखभाल टीम को टोल–फ्री नंबर 1800-425-3800, 1800-11-2211 और टोल नंबर 080-26599990 पर कॉल करें।
घरेलू, नॉन रेजिडेंट रुपए (NRE) और नॉन- रेजिडेंट ऑर्डिनरी रुपए (NRO) अकाउंट फिक्स्ड डिपॉज़िट के प्री-मैच्योर विड्रॉल पर आईसीआईसीआई बैंक निम्नलिखित दरों पर जुर्माना (पेनल्टी) लगाता है:
| प्री-मैच्योर विड्रॉल पर बैंक द्वारा लगाया गया जुर्माना | ||
| मूल पॉलिसी अवधि | ₹ 5 करोड़ से कम राशि पर | ₹ 5 करोड़ से अधिक राशि पर |
| एक वर्ष से कम | 0.50% | 0.50% |
| 1 वर्ष से अधिक और 5 वर्ष से कम | 1.00% | 1.00% |
| 5 वर्ष और उससे अधिक | 1.00% | 1.50% |
ये भी पढ़ें: कंपनी/कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉज़िट क्या होती है?
बैंक जमाकर्ता को नेट–बैंकिंग के माध्यम से या केवल शाखा पर जाकर मैच्योरिटी अवधि पूरी होने से पहले अपनी निवेशित राशि को वापस लेने की अनुमति देता है। फिक्स्ड डिपॉज़िट के प्री-मैच्योर विड्रॉल के लिए लागू ब्याज की दर निम्न होगी:
जब कोई FD तोड़ने का विकल्प चुनता है, तो विभिन्न तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें यहाँ बताया गया है:
पेनल्टी: FD तोड़ने के मामले में, निवेशक को बैंक को पेनल्टी के रूप में एक निश्चित राशि का भुगतान करना पड़ता है। बैंक द्वारा पेनल्टी के रूप में ली जाने वाली राशि आम तौर पर ब्याज के 0.50% से 1.00% तक होती है। जब बैंक अपनी पॉलिसी को अपडेट करने का फैसला लेता है, तो पेनल्टी समय के साथ बदल सकती है।
ब्याज की कमी: जब कोई व्यक्ति मैच्योरिटी अवधि से पहले विड्रॉल करता है, तो उन्हें पता होना चाहिए कि उन्हें ब्याज की दर और फिक्स्ड डिपॉज़िट की अवधि के आधार पर सही राशि नहीं मिलेगी क्योंकि यह FD अकाउंट से तय समय से पहले पैसा निकाला जा रहा है। प्री-मैच्योर विड्रॉल के बाद आपको प्राप्त होने वाली राशि को कैलकुलेट करते समय, पेनल्टी शुल्क को भी शामिल किया जाता है।
वित्तीय वृद्धि में परेशानी: फिक्स्ड[ डिपॉज़िट को मैच्योरिटी की तारीख पर ब्याज के रूप में गारंटी रिटर्न के साथ जमाकर्ता को प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। अगर आपने एक नीति के तहत FD में निवेश किया है लेकिन आप किसी कारण से पहले ही FD तोड़ देते हैं, तो ये कदम आपकी आर्थिक नीति और आपके बजट को प्रभावित कर सकता है।
प्री-मैच्योर विड्रॉल प्रकिया आसान नहीं : यह एक तथ्य है कि डिपॉज़िट की प्री-मैच्योर विड्रॉल प्रक्रिया आसान नहीं है और एक सरल ट्रांजेक्शन नहीं है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है। प्रक्रिया की औपचारिकताओं में फॉर्म भरना, बैंक के अधिकारियों से मिलना, दस्तावेज़ जमा करना आदि शामिल हैं।