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गोल्ड या फिक्स्ड डिपॉज़िट (Fixed Deposit )? दोनों ही सालों से भरोसेमंद निवेश विकल्प रहे हैं एक सुरक्षा देता है, तो दूसरा स्थिर बढ़त का भरोसा। लेकिन अलग-अलग राय और सलाह के बीच अक्सर यह फैसला करना मुश्किल हो जाता है कि बचत और निवेश के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है। अगर आप भी इसी दुविधा में हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां हम दोनों निवेशों की तुलना कर रहे हैं, ताकि आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से सही चुनाव कर सकें।
गोल्ड और एफडी दोनों ही कम जोखिम वाले निवेश माने जाते हैं। सोने की कीमत कभी-कभी थोड़े समय के लिए ऊपर-नीचे हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इसकी कीमत अक्सर बढ़ती रही है। इसी कारण गोल्ड महंगाई और मुद्रा के गिरने के समय बचाव का अच्छा जरिया माना जाता है।
दूसरी तरफ, एफडी में रिटर्न गारंटीड होते हैं। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, एफडी से मिलने वाला ब्याज इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी अवधि के लिए पैसा जमा करते हैं, अवधि जितनी लंबी होगी, रिटर्न उतना अधिक मिलेगा।
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गोल्ड में निवेश आमतौर पर अच्छा रिटर्न देता है और कई बार महंगाई से भी ज्यादा कमाई करवाता है। लंबे समय में गोल्ड मूल्य बढ़ाने वाला निवेश माना जाता है।
वहीं, एफडी में बैंक शुरू में ही आपको बता देता है कि आपको कितनी ब्याज दर मिलेगी। इसका बड़ा फायदा यह है कि आप जितनी भी राशि जमा करें, रिटर्न पूरी तरह गारंटीड होता है। इसके अलावा, आम लोगों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों कोअधिक ब्याज दर मिलती है, जिससे उनका फायदा और बढ़ जाता है।
लिक्विडिटी यानी जब आपको पैसों की ज़रूरत पड़े, तो आपका निवेश कितनी आसानी और जल्दी नकद में बदला जा सकता है। जब आसानी से लिक्विडिटी की बात आती है, तो गोल्ड उन निवेशकों के बीच पसंदीदा विकल्प है जो जल्दी निवेश करना चाहते हैं। सोने में निवेश कई तरीकों से किया जा सकता है। डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड आदि एक लोकप्रिय विकल्प हैं क्योंकि इन विकल्पों में आपको गोल्ड रखने या उसकी सुरक्षा की चिंता नहीं होती। हालांकि, गोल्ड पर रिटर्न काफी हद तक बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए निवेशकों को गोल्ड खरीदने या बेचने से पहले बाजार की स्थितियों के बारे में पता होना चाहिए।
एफडी के मामले में, लिक्विडिटी पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि बैंक या वित्तीय संस्थान की नीतियां क्या है। आप चाहें तो एफडी में किये गए निवेश को मैच्योरिटी से पहले निकाल सकते हैं, लेकिन ज़्यादातर बैंक इस पर पेनल्टी या कम ब्याज दर देते हैं। इसलिए अगर आपको लगता है कि आपको पैसे की ज़रूरत जल्दी पड़ सकती है, तो ऐसे बैंक या कंपनियों की तलाश करें जो पेनल्टी-फ्री प्रीमैच्योर विड्रॉल की सुविधा देते हों।
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गोल्ड और एफडी दोनों पर आप उनके मूल्य के लगभग 80-90% तक लोन ले सकते हैं। कई बैंक और एनबीएफसी इन निवेशों पर आसानी से लोन देते हैं, और इनकी ब्याज दरें आमतौर पर पर्सनल लोन की तुलना में कम होती हैं।
सोने में आप कई रूपों में निवेश कर सकते हैं जैसे: गोल्ड बुलियन, गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड फंड। इनमें निवेश कितने समय के लिए करना है, यह पूरी तरह आपके चुने हुए विकल्प पर निर्भर करता है। इसी तरह एफडी में भी आप 7 दिन से लेकर 10 साल की अवधि के लिए निवेश कर सकेत हैें। लेकिन ध्यान रखें, अवधि के ये विकल्प अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की नीतियों पर भी निर्भर करते हैं।
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गोल्ड और एफडी में से किसी एक का चुनाव करना हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता। यह आपके वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहनशीलता और निवेश रणनीति पर निर्भर करता है।
गोल्ड में निवेश आपके लिए अच्छा है अगर:
एफडी का विकल्प चुनें अगर:
स्मार्ट तरीका यह हो सकता है कि आप अपने निवेश पोर्टफोलियो में दोनों को शामिल करें। इस तरह, एफडी से आपको स्थिर और सुरक्षित रिटर्न मिलेगा, जबकि गोल्ड से आपको बेहतर रिटर्न और महंगाई से सुरक्षा मिलने की संभावना रहती है।