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लोग अक्सर ब्याज के बोझ को कम करने और EMI से छुटकारा पाने के लिए अपने पर्सनल लोन का समय से पहले भुगतान करने का विकल्प चुनते हैं। लोन को जल्द चुकाने के दो तरीके हैं- पहला है पार्ट-प्रीपेमेंट, जिसमें लोन राशि के कुछ हिस्से का भुगतान किया जाता है, दूसरा है फोरक्लोज़र जिसमें पूरी बकाया राशि एकमुश्त चुकाकर लोन को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है।
ध्यान रहे, हर बैंक/NBFC के प्रीपेमेंट और फोरक्लोज़र से जुड़े नियम अलग-अलग होते हैं। ऐसे में बिना सही जानकारी के फैसला लेना कई बार फायदेमंद नहीं होता। इस लेख में जानें लोन जल्दी बंद करने से पहले क्या करें और फोरक्लोज़र की प्रक्रिया कैसे काम करती है।
कुछ बैंक/लोन संस्थान फोरक्लोज़र के लिए लॉक-इन अवधि निर्धारित करते हैं। इसके तहत, तय संख्या में EMI का भुगतान करने के बाद ही लोन को फोरक्लोज़ करने की अनुमति होती है। उदाहरण के लिए, इंडसइंड बैंक और यस बैंक पर्सनल लोन की 12 EMI का भुगतान करने के बाद ही फोरक्लोज़र की इजाज़त देते हैं।
कुछ बैंक/NBFC प्रीपेमेंट की सीमा तय करते हैं। जैसे, HDFC बैंक में लोन की पहली EMI चुकाने के बाद, मूलराशि के सिर्फ 25% तक ही प्रीपेमेंट किया जा सकता है। इसके अलावा, एक फाइनेंशियल ईयर में एक बार या पूरी लोन अवधि के दौरान सिर्फ दो बार प्रीपेमेंट की इजाज़त है।
अपनी नेट सेविंग्स का सही-सही हिसाब लगाने के लिए ऑनलाइन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें। इससे आप प्रीपेमेंट से होने वाली बचत का सही अंदाज़ा लगा पाएंगे। प्रीपेमेंट का फैसला तभी लें जब फोरक्लोज़र फीस (या अतिरिक्त शुल्क) लगने के बाद ब्याज में अच्छी-खासी बचत हो रही हो।
पर्सनल लोन को फोरक्लोज़ करने पर अधिकतर बैंक/NBFC प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र चार्ज लेते हैं। फोरक्लोज़र चार्ज आमतौर पर मूलराशि के 4% तक हो सकता है जो फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन के मामले में लिया जाता है। फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन पर कोई प्रीपेमेंट/फोरक्लोज़र शुल्क नहीं लिया जाता।
बहुत से लोग पर्सनल लोन के प्रीपेमेंट के लिए अपने मौजूदा निवेश का उपयोग करते हैं। लेकिन ऐसा करने से पहले उन्हें यह चेक करना चाहिए कि कहीं निवेश से मिलने वाला रिटर्न, लोन के फोरक्लोज़र से होने वाली बचत से ज़्यादा तो नहीं है। अगर ऐसा है तो लोन बंद करने के बजाय निवेश जारी रखना बेहतर हो सकता है।
कभी भी लोन का प्रीपेमेंट करने के लिए इमरजेंसी फंड का उपयोग न करें। ऐसा करने पर फाइनेंशियल इमरजेंसी के समय आपको अधिक ब्याज दरों पर नया लोन लेना पड़ सकता है या फिर अपने लॉन्ग-टर्म निवेश से रकम निकालनी पड़ सकती है। इसलिए सुनिश्चित करें कि आपके पास कम से कम 6 महीने के ज़रूरी खर्चों जैसे- EMI, बिल, किराया, बीमा, फीस आदि के बराबर इमरजेंसी फंड हो।
आप अपने पर्सनल लोन को कम ब्याज दर पर, लंबी या छोटी अवधि और बेहतर शर्तों के लिए दूसरे बैंक या लोन संस्थान को ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे ब्याज लागत में बचत होगी जिससे आपको लोन को जल्दी चुकाने में मदद मिलेगी। लेकिन इससे होने वाली बचत को कैलकुलेट करने के लिए बैलेंस ट्रांसफर कॉस्ट, जैसे कि आपके मौजूदा लेंडर द्वारा लगाए गए लोन ट्रांसफर चार्ज और आपके नए लेंडर द्वारा लगाए गए प्रोसेसिंग फीस, स्टाम्प ड्यूटी, वगैरह चार्ज को ज़रूर ध्यान में रखें। अगर इन चार्ज़ेस के बावजूद बैलेंस ट्रांसफर से ब्याज में अच्छी-खासी बचत हो रही हो, तभी यह विकल्प चुनें।