Paisabazaar app Today!
Get instant access to loans, credit cards, and financial tools — all in one place
Our Advisors are available 7 days a week, 9:30 am - 6:30 pm to assist you with the best offers or help resolve any queries.
Get instant access to loans, credit cards, and financial tools — all in one place
Scan to download on
Our Advisors are available 7 days a week, 9:30 am - 6:30 pm to assist you with the best offers or help resolve any queries.
टैक्स के बोझ को कम करने और करदाता को ज़्यादा काम से राहत देने के लिये,भारत सरकार ने नयी स्कीम अनुमानित आय (presumptive taxation) शुरु की हैI इस स्कीम को अपनाने वाले बिजनेस को नियमित रूप से अकाउंट बुक्स बनाने की ज़रूरत नहीं होती है I वे एक निर्धारित दर पर आय की घोषणा कर सकते हैं।

अनुमानित आय (presumptive taxation scheme) के आयकर अधिनियम, 1961 के तहत दो सैक्शन हैं। धारा 44 Ad और 44AE। जो बिजनेस अनुमानित आय स्कीम (Presumptive taxation scheme) अपनाते हैं उन्हे अकाउंट बुक्स को ओडित (audit )करवाने की भी ज़रूरत नही होती है I
यहाँ हम सैक्शन 44AD के बारे में विस्तार से बात करते हैंI
आयकर अधिनियम की धारा 44 AD अनुमानित आय (presumptive taxation scheme) को अपनाने के लिए निम्नलिखित शर्तों है:
मान ले , श्री मान मोहन का किराना स्टोर है। पिछले वर्ष उनकी दुकान की वार्षिक सेल 90 लाख रु की हुयी थी I वह वित्तीय वर्ष के अंत में बहुत ज़्यादा टैक्स संबंधित पेपर वर्क से बचने के लिए सैक्शन 44 AD अनुमानित आय स्कीम को अपनाना चाहते है I सैक्शन 44 AD मुख्य रूप से छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों को ध्यान मे रख कर बनाया गया हैI
सैक्शन 44AD को अच्छे से समझने का प्रयास करते हैं I मान लीजिये कि XYZ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी निर्माण का व्यवसाय करती है। अब, भले ही कंपनी उपर्युक्त सभी शर्तों को पूरा करती हो, लेकिन फिर भी वह सैक्शन 44AD को नहीं अपना सकती क्योंकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां इस सैक्शन के दायरे मे नहीं आती हैं I
जो पर्सन्स सैक्शन 44AD अनुमानित आय (presumptive taxation scheme) को अपनाना चाहते है उन्हे अपनी आय का आकलन अनुमान के आधार पर करना होगा। इसका कैल्कुलेशन पिछले वर्ष के receipts (रसीदे) /सेल के 8% के हिसाब से किया जाता है I पर्सन्स अपनी आय इन्कम टैक्स रिटर्न मे अनुमानित आय से ज़्यादा दिखा सकता है I
मान लीजिये , श्री लोकेश एक स्टेशनरी की दुकान चला रहे हैं,और पिछ्ले साल उनकी बिज़नेस की सेल 80 लाख रु हुयी थी. वह आयकर अधिनियम, 1961 के सैक्शन 44AD की स्कीम को अपनाना चाहते है I सैक्शन 44AD के अनुसार, उनकी पिछले साल की जो भी सेल या रसीदे (receipts) थी उसका 8% लिया जायगा I इस मामले मे श्री लोकेश का 80 लाख का टर्नओवर/कारोबार है ( जो कि सैक्शन 44AD के प्रावधानों के अनुसार 2 करोड़ रुपये से कम है ) वे इस स्कीम को अपना सकते है I और उनका वार्षिक अनुमानित आय 6.4 लाख रु (यानी 80 लाख का 8%) होगा I
वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रस्तुत बजट 2018-19 में सैक्शन 44 AD मे कोई बदलाव नहीं किये गये हैं I जैसा सैक्शन 2017-18 मे था इसे वैसे ही प्रस्तुत किया गया I
अगर आप एक फ़र्म है तो सहयोगियो/पार्टनर को दिया जाने वाला वेतन / ब्याज आपकी सब सैक्शन 1 की इन्कम मे से काटा जायगा और यह 40(b) की लिमिट मे होना चाहिए I
3.किसी भी ऐसेट (asset) की लिखित मूल्य (written down value)/ निकालने के लिए माना जाता है कि एसेसी ने पिछ्ले सालो मे घिसावट (depreciation )क्लेम किया है और उसे वो क्लेम मिल भी चुका है
4.सैक्शन 44AA और 44AB के नियम /प्रावधान उन व्यवसाय के लिये लागू नही होगे जो सब सैक्शन 1 मे आते है और इन सैक्शन के तहत वितिय लिमिट की गण्ना करते हुये,ग्रास रसीदे या उन बिज़नेस से होने वाली आय को भी बाहर रखा जायगा
5.इस सैक्शन मे पिछ्ले प्रावधानों के नियम लागू नहीं होगे, जहा एसेसी दावा करता है और इसे प्रामाणित करने के लिए प्रमाण देता है, कि पिछ्ले वर्ष के दौरान उस बिज़नेस/व्यवसाय से लाभ,एक april 1997 के दिन शुरू होने वाले असेसमेंट इयर से संबंधित हैI अगर असेसमेट इयर मे स्ब सैक्शन 1 मे दिये गये लाभ कम है,तब assesing officer कुल आय या नुक्सान,जो एसेसी को हुया है उसका आकलन करता है और मूल्याकन करता है कि एसेसी को कितना कुल राशि का सैक्शन 143(3) के तहत भुगतान करना है I
6 .इस सैक्शन मे पिछ्ले प्रावधानों के नियम लागू नहीं होगे,एक एसेसी (सब सैक्शन एक) मे दिये गये लाभ की तुलना मे कम मुनाफ़े या लाभ को क्लेम कर सकता है,यदि वह अकाउंट बुक्स या इनसे सम्भन्दित किताबो को रखता है जो कि सैक्शन 44A के सब सैक्शन (2) के नियम अनुसार बनायी गयी हो और अपने खातो का ओडित(audit)करवाता हो और सेक्शन 44ab के तहत लेखा परीक्षा (audit report )प्रस्तुत करता हो
नोट : इस सैक्शन मे बताये गए योगय व्यवसाय का अर्थ है:
सैक्शन 44ADA स्माल प्रोफ़ेशनल के लिए बनाया गया है ताकि उनके लिये टैक्स की प्रक्रिया आसान हो सके,वे नियमो का पालन आसानी से कर सके और अपना व्यवसाय सही तरीके से कर सके I इस सैक्शन का उद्देश्य उन छोटे व्यवसायो को जो अनुमानित आय (presumptive taxation scheme )सैक्शन 44AD के तहत आते है और दूसरे स्माल प्रोफ़ेशनल के बीच समानता लाना है
अगर कोई व्यक्ति 44ADA के अनुसार काम करता है तो उसकी आय की कैल्कुलेशन अनुमानित आधार पर की जायेगी
उसकी कुल रसीदो का 50% उसकी आय माना जाएगाI दूसरे शब्दों मे, एक वित्तीय वर्ष मे पेशे से प्राप्त कुल रसीदो की राशि 50 लाख से अधिक नही होनी चाहिए I
सैक्शन 44AD छोटे व्यवसायो की मदद करने के लिए बनाया गया है लेकिन नीचे लिखे व्यवसाय इस सैक्शन को नही अपना स्कते:
उपर लिखे गए व्यवसायो के साथ साथ अगर कोइ व्यक्ति सैक्शन 44AA (1) मे कोइ प्रोफ़ेशनल सर्विस दे रहा है वो भी अनुमानित आय (presumptive taxation scheme) का लाभ नही ले सकता I
इन प्रावधानों के अतंर्गत इस अनुमानित कराधान योजना के पात्र वो करदाता हैं जो किसी भी व्यवसाय मे शामिल है (ऐसे व्यवसाय के अतिरिक्त जो माल/वस्तुओं के किराए/भाड़े/लीज़ से सबंधित हैं।),जिनकी कुल बिक्री या सकल प्राप्ति, ऐसे व्यवसाय से,धारा 44AB के तहत वरणित सीमा से अधिक नहीं हो।(₹60,00,000 गत वर्ष 2011-12 के लिए व ₹ 1,00,00,000 वर्ष 2012-13 के लिए) ,इसके अतिरिक्त इस योजना का लाभ उन्हीं करदाताओं को मिलेगा यदि उन्होने धारा 10A/10AA/10B/10BA या धारा 80HH से 80RRB मे किसी भी प्रकार की कटौती का दावा उस प्रासंगिक वर्ष मे न किया हो।
महत्त्वपूर्ण बिदुँ:
1)यदि करदाता एक से अधिक व्यवसाय मे सलग्नं है तो धारा 44AD के अतर्गँत इस कराधान योजना की पात्रता हेतु सभी व्यवसायों की कुल बिक्री विचाराधीन होती है।
2) यदि करदाता व्यवसाय के साथ किसी पेशे मे भी अभ्यासरत है, तो धारा 44AD के प्रावधान सिर्फ
व्यवसाय पर लागू होंगे। पेशे से हुई आय की गणना आयकर अधिनियम 1961 के सामान्य प्रावधानों के तहत होगी।
4)एक करदाता आयकर अधिनियम की धारा 44AD के अधीन आय घोषित करने के.बाद भी धारा 80C से 80U ( चैप्टर VI A).के तहत टैक्स छूट और लाभों का दावा कर सकता है।
यह धारा अनुमानित कराधान का लाभ अब पेशेवरो को भी प्रदान करती है जो पूर्व मे सिर्फ कुछ व्यवसायों तक सीमित थे। धारा 44 AD के अधीन वो पेशेवर करदाता अनुमानित कराधान योजना का लाभ उठा सकते हैं, जिनकी सकल प्राप्ति किसी भी वित्तीय वर्ष मे 50 लाख से अधिक नहीं हो।
निम्नलिखित पेशेवर व्यक्ति अनुमानित कराधान योजना का लाभ उठा सकते हैं-:
1) अभियांत्रिकी( ईजँनीयरिगं)
2)विधि
3) आर्किटेक्चर
4)एकाउंटेंट
5) चिकित्सक
6) तकनीकी सलाहकार
7) ईटिंरियर डिज़ाइनर
धारा 44AD के प्रावधानारुप गणना की गई अनुमानित आय (पात्रता रखने वाले व्यवसाय की सकल प्राप्ति या कुल बिक्री का 6%-8-%) अनुमानित कराधान योजना के अधीन योग्य व्यवसाय की शुद्ध आय मानी जाती हैं।अतः करदाता आयकर अधिनियम की धारा 30 से 38 के अधीन किसी भी कटौती का दावा नहीं कर सकता।
इसे समझने. के.लिए एक उदाहरण लेते है।श्रीमान मोहन श्री कारपोरेशन के नाम से एक फर्म चलाते. है। इस व्यवसाय से उनकी गत वर्ष की आय 86 लाख रुपये थी। उन्होंने अपनी आय इस योजना की धारा 44AD के तहत घोषित की। शुद्ध आय , सकल आय पर 8%. की दर के हिसाब से ₹6,88,000 हुई। मोहन धारा 30 के तहत मूल्य हास पर कटौती चाहते है।पर धारा 44AD के प्रावधानुसार गणना की हुई अनुमानित आय को ही शुद्ध आय माना जाता है।ईसलिये करदाता धारा 30-38 (जिसमें मूल्य हास व अनावशोषित मूल्य हास भी सम्मिलित है) के तहत किसी भी प्रकार की कटौती का दावा नही कर सकता। अतः श्रीमान मोहन शुद्ध आय की गणना मे ऐसी किसी भी कटौती का दावा प्रस्तुत नहीं कर सकते।
यदि करदाता एक साझेदारी फर्म है, तो यह साझेदारों को चुकाए गये ब्याज और पारिश्रमिक भुगतान पर ,आयकर अधिनियम की धारा 40b के तहत वर्णित सीमाओं मे कटौती का दावा कर सकती है। हालांकि ऐसी स्थिति मे फर्म उपयुक्त दरों पर आय की गणना के बाद धारा 40, 40A व 43B के अधीन कटौती के योग्य नहीं होगी अर्थात धारा 40, 40A व 43B के प्रतिबंध उस करदाता पर लागू नहीं होगें जो अनुमानित कराधान योजना के लिए जाना चाहता है।
उदाहरण के तौर पर, प्रियम कारपोरेशन जो एक साझेदारी फर्म है लकड़ी से बने फोटो फ्रेम निर्माण के व्यवसाय मे है। फर्म ने धारा 44AD मे गत वर्ष की आय घोषित की। अनुमानित आधार पर आय की गणना के बाद (सकल आय का 8%) फर्म साझेदारों को दिए गये ब्याज पर कटौती चाहती है, ऐसी स्थिति मे प्रियम कारपोरेशन अनुमानित कराधान योजना मे भी, ब्याज व पारिश्रमिक भुगतान पर, आय कर अधिनियम की धारा 40b मे. परिभाषित सीमाओं के तहत कटौती का दावा कर सकती है।
जैसा कि ऊपर उल्लेखित है, जो भी करदाता धारा 44AD में अनुमानित कराधान योजना के प्रावधान अनुसार जा रहा है, उसे विभिन्न खर्चों जिसमें मूल्य हास व अनावशोषित मूल्य हास भी शामिल है, पर कोई कटौती नहीं मिलेगी। इसी सदंर्भ मे मूल्यहास योग्य सम्पत्ति पर WDV की गणना हेतु निम्न प्रावधानों का ध्यान मे रखा जाना आवश्यक हैं:-
१) हालांकि मूल्य हास के आधार पर कटौती उपलब्ध नहीं है, फिर भी व्यवसाय/पेशे में प्रयुक्त होने वाली संपत्तियों पर WDV की गणना आवश्यक है।
आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैंGT कारपोरेशन एक स्टील निर्माता फर्म है, जिसने आयकर अधिनियम 1961 की धारा 44AD की अनुमानित कराधान योजना में आय घोषित की है।GT कारपोरेशन की आय उल्लेखित दरो पर बिना मूल्य हास घटाऐ की गई है, क्योंकि इस योजना में मूल्य हास की कटौती का प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति में यह महत्वपूर्ण. है. कि व्यवसायिक सम्पत्ति पर WDV की गणना की जाए। हालांकि मूल्य हास की राशि पर कटौती नहीं मिलेगी। फिर भी मूल्य हास की गणना आवश्यक है।
छोटे करदाताओं को खातों की किताबें बनाए रखने के थकाऊ काम से राहत देना कल्पित कराधान योजना का मुख्य उद्देश्य है। आयकर अधिनियम की धारा 44 कघ के तहत अनुमानी कराधान योजना के प्रावधानों को अपनाने वाले किसी भी आकलनकर्ता , को बुक्स ऑफ एकाउंट्स रखने की आवश्यकता नहीं होती है। मूल रूप से यह आईटी अधिनियम की धारा 44 एए के तहत आने वाले व्यवसायों पर लागू होता है ।धारा 44 क के प्रावधानों के अनुसार ऐसे व्यवसायों आकलनकर्ताओं या के लिए, उनकी पुस्तकों का ऑडिट करवाना आवश्यक नहीं है।
आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं। श्री मणि एक प्रोविजन स्टोर चला रहे हैं।उनके बिज़नेस टर्नओवर पिछले साल40 लाख रहा .उन्होंने अपनी व्यावसायिक आय धारा 44 कघ की अनुमानित कराधान योजना के प्रावधानों के अनुसार घोषित की। इस मामले में, श्री मणि ,धारा 44 कघ के प्रावधानों के अनुसार अपने व्यवसाय से संबंधित खाते की पुस्तकों को बनाए रखने के लिए बाध्य नहीं है। और साथ ही,क्योंकि उसका व्यवसाय आईटी अधिनियम की धारा 44AA और धारा 44AB के अंतर्गत नहीं आता है उन्हें अपनी पुस्तकों की ऑडिट करवाना भी जरुरी नहीं है ।
प्रकल्पित कराधान योजना के तहत निम्न आय या उच्च आय की घोषणा
अगर आकलनकर्ता की वास्तविक व्यावसायिक आय, प्रकल्पित आय जो कि धारा 44 कघ की अनुमानित कराधान योजना (कुल टर्नओवर या सकल प्राप्ति का 8%) के तहत घोषित की गई है,की तुलना में कम है, तो खाते की पुस्तकों के रखरखाव पर कोई राहत नहीं है । यानि की , धारा 44 एए के अनुसार यदि आकलनकर्ता की वास्तविक व्यावसायिक आय अनुमान से कम है, तो उसे अपने व्यवसाय से संबंधित खाते की पुस्तकों को बनाए रखना आवश्यक है। और इसके अलावा, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AB के तहत उन्हें नियम के अनुसार पुस्तकों की ऑडिट करवाना भी आवश्यक है।
यदि, वास्तविक आय प्रकल्पित आय योजना से अधिक है तो यह प्रावधान आकलनकर्ता को अपने विकल्प पर उच्च आय (8% की निर्धारित दर से अधिक) घोषित करने की अनुमति देता है। अंत में, धारा 44 कघ के तहत अनुमानी कराधान योजना मध्यम और छोटे कर दाताओं को खाते की पुस्तकों के रखरखाव और इसे ऑडिट कराने के लिए एक बड़ी राहत है जिसमे अक्सर गलतियों की उच्च संभावना होती है और साथ ही यह काफी थकाऊ काम है।
अनुमानात्मक कराधान प्रोफेशनल्स के लिए 50 प्रतिशत है
वित्तीय वर्ष 2016-17 से धारा 44AD के तहत अनुमानात्मक कराधान, जो केवल व्यवसायों के लिए उपलब्ध था, अब प्रोफेशनल्स के लिए भी उपलब्ध होगा। यह धारा 44ADA के तहत आता है। इस योजना का विकल्प 50 लाख या उससे कम की रसीदों वाले प्रोफेशनल्स चुन सकते हैं। इसमें फ्रीलांसर्स जो वेबसाइट डिज़ाइन या सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट जैसे तकनीकी कार्य करते हैं , को भी शामिल किया गया है