TDS के लिए सैलरी को कैलकुलेट करने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कौन सी इनकम सैलरी के अंतर्गत आती है। सैलरी प्राप्त भुगतान का एक प्रकार है जो दो पक्षों (कंपनी और कर्मचारी) के बीच एक समझौते के अनुसार, कुछ सेवाओं को बदले एक विशेष/ तय राशि के रूप में दी जाती है। यदि दो पक्ष के बीच भुगतान और सेवा को लेकर समझौता है लेकिन वो ‘नियोक्ता/ कंपनी और कर्मचारी’ नहीं हैं, तो भुगतान दिए जाने वाली रकम को सैलरी नहीं कहा जा सकता है।
इनमें से कुछ में टेक्नीकल या प्रोफेशनल सर्विस के लिए शुल्क (फीस), ठेकेदारों और उप-ठेकेदारों को भुगतान, डिविडेन्ट का भुगतान, सिक्योरिटी पर प्राप्त ब्याज, बैंक में जमा पर प्राप्त ब्याज, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा इकाइयों (Unit) की पुनर्खरीद (Repurchase) के लिए भुगतान या म्यूचुअल फंड, लॉटरी या क्रॉसवर्ड पज्जल, कमीशन और लॉटरी टिकट की बिक्री आदि जीतने पर प्राप्त पुरस्कार (prizes), बीमा इनकम कमीशन पर भुगतान, ब्रोकरेज या कमीशन, किराया आदि आते हैं।


