| महीना |
तारीख |
| अप्रैल |
7 मई से पहले |
| मई |
7 जून या उससे पहले |
| जून |
7 जुलाई या उससे पहले |
| जुलाई |
7 अगस्त या उससे पहले |
| अगस्त |
7 सितम्बर या उससे पहले |
| सितम्बर |
7 अक्तूबर या उससे पहले |
| अक्तूबर |
7 नवम्बर या उससे पहले |
| नवम्बर |
7 दिसम्बर या उससे पहले |
| दिसम्बर |
7 जनवरी या उससे पहले |
| जनवरी |
7 फरवरी या उससे पहले |
| फरवरी |
7 मार्च या उससे पहले |
| मार्च |
30 अप्रैल या उससे पहले |
नियमों का पालन न करने पर टैक्स कटौती करने वाले को जुर्माना देना पड़ सकता हैं। निम्नलिखित जुर्माना हैं-
TDS की कटौती न करने पर:
यदि कोई TDS काटने वाला टैक्स नहीं काटता हैं तो इसके लिए आयकर अधिकारी द्वारा टैक्स काटने वाले को दिया जाने वाला लाभ नहीं मिलता हैं।
देरी से TDS काटने पर:
भुगतान या खरीद के एक दिन या कुछ दिन बाद TDS काटने पर 1% प्रति माह का ब्याज़ देना होता है|
TDS को देरी से भुगतान करने पर:-
ऐसी स्थिति में टैक्स काटने वाले को हर महीने 1.5% की रेट से TDS राशि पर ब्याज़ का भुगतान करना होगा।
TDS काटने वाले को हर तीन महीनों में तय तिथि पर TDS रिटर्न फाइल करना होता है| विभिन्न तरह के TDS कटौती के लिए अलग-अलग TDS फॉर्म होते हैं|
TDS फाइल करने के फॉर्म-
| फार्म |
TDS कटौती के उद्देश्य |
| फ़ार्म 24Q |
वेतन के लिए TDS |
| फार्म 26Q |
वेतन के अलावा अन्य भुगतान के लिए |
| फार्म 27 Q |
अप्रवासी भारतीयों के ब्याज व अन्य भुगतान पर TDS |
| फार्म 27EQ |
TCS की तिमाही स्टेटमेंट के लिए |
TDS रिटर्न ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से फाइल किया जा सकता है| हालाँकि, आईटी अधिनियम की धारा 206 के अनुसार, निम्नलिखित के लिए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से TDS रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है:
- सभी निजी कंपनियों के लिए
- सभीसरकारी विभगों के लिए
- अगर टैक्स काटने वाले का धारा 44AB के तहत ऑडिट हो सकता है
- यदि टैक्स काटने वाले के तिमाही (तीन महीनें) की स्टेटमेंट में ये रिकॉर्ड आता है कि उसने इस दौरान 20 या ज़्यादा लोगों का TDS काटा है|
ई-फाइलिंग TDS रिटर्न के लिए कुछ पूर्व-आवश्यकताएं
- टैक्स काटने वाला ई-फाइलिंग में रजिस्टर्ड होना चाहिए और उसके पास वैध TAN भी होना चाहिए।
- रिफंड तैयारी उपयोगिता (RPU) और फ़ाइल मान्यता उपयोगिता (FVU) NSDL वेबसाइट (https://www.tin-nsdl.com/ ) से डाउनलोड करें।
- इसको ध्यान में रखते हुए TDS का स्टेटमेंट तैयार किया जाना चाहिए।
- ई-फाइलिंग साइट में वैध DSC के लिए रजिस्टर करें।
ई-फाइलिंग TDS रिटर्न की प्रक्रिया
- ई-फाइलिंग के मुख्य पेज पर जाएँ।
- रजिस्ट्रेशन के समय दी गई यूजर आईडी और पासवर्ड के द्वारा लॉग-इन करें।
- TDS सेक्शन पर जाएँ और ‘upload TCS’ विकल्प चुनें।
- सभी जानकारी का सही से चुनें और भरें और ‘confirm’करें।
- TDS/TCS अपलोड करें (NSDL वेबसाइट से डाउनलोड की गई जानकारी द्वारा तैयार करें)।
- ई-फाइलिंग के लिए टैक्स काटने वाले को डिजिटल सिग्नेचर करने होते हैं| DSC का उपयोग करके डिजिटल सिग्नेचर की फ़ाइल जनरेट करें और उसे जमा करें।
- अपलोड बटन पर क्लिक करें और आपको कन्फरमेशन का मैसेज प्राप्त होगा।
TDS को फाइल करनें की तिथि
| तिमाही |
अवधि(Quarter period) |
TDS फाइल करने की तिथि |
| पहली तिमाही |
अप्रैल से जून |
31 जुलाई से एक ही वित्तीय वर्ष |
| दूसरी तिमाही |
जुलाई से सितम्बर |
31 अक्तूबर से एक ही वित्तीय वर्ष |
| तीसरी तिमाही |
अक्टूबर से दिसम्बर |
31 जनवरी से एक ही वित्तीय वर्ष |
| चौथी तिमाही |
जनवरी से मार्च |
31 मई से अगले वित्तीय वर्ष तक |
महत्वपूर्ण बिंदू:
- आयकर अधिनियम की धारा 203 A के अनुसार TDS काटने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पास TAN(कर कटौती और वसूली खाता संख्या) होना चाहिए।
- TDS रिटर्न दाखिल करते समय TAN एक अनिवार्य आवश्यकता है और जारी किए गए TDS प्रमाण पत्र पर भी लिखा जाना चाहिए।
- TDS कटौती आपके पैन से जुड़ी हुई हैं। TDS काटने के लिए पैन जानकारी होना आवश्यक है।
- टैक्स काटने वाले को हर टैक्स देने वाले के पैन से लिंक करें।
- कुल भुगतान टैक्स के लिए टैक्स काटने वाले को भुगतान किए गए TDS का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
- TDS जानकारी टैक्स को क्रेडिट फार्म 26AS द्वारा जांच सकते हैं।
- यह टैक्स जानकारी आपको टैक्स देने वाले के द्वारा सभी भुगतानों के लिए काटे गए TDS की जानकारी देता हैं।
- देर से फाइलिंग ITR के लिए।
यदि टैक्स काटने वाले तय तिथि पर या उससे पहले TDS रिटर्न नहीं दे पाता हैं, तो वह डिफ़ॉल्ट की तिथि तक प्रतिदिन 200 रु. का जुर्माना देने के लिए जिम्मेदार होगा। और इस तरह का जर्माना कुल राशि व कटौती टैक्स की कुल राशि से अधिक नहीं होना चाहिए।
- ITR फाइल नहीं करने पर।
- यदि टैक्स काटने वाला TDS रिटर्न की तय तिथि के एक वर्ष में TDS रिटर्न फाइल नहीं करता है तो उसे 10000 रु. से 1 लाख रुपये तक का जर्माना भरना पड़ सकता हैं।
- यह उन मामलों के लिए लागू होता है जिनमें टैक्स काटने वाले के द्वारा गलत जानकारी दी गई हो।
- TDS वापस कर दिया जाता है।
- यदि काटे गए TDS आपको एक वर्ष में भुगतान करने वाले टैक्स की कुल राशि से अधिक है, तो आप TDS राशि के लिए दावा करने के योग्य हैं।
- जब आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आप रिफंड के लिए दावा कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, आप एक फ्रीलांसर हैं जो विभिन्न कंपनियों के साथ कॉन्टरेक्ट पर काम करते हैं। मान लीजिए कि आपके द्वारा किए गए एक काम के लिए 10,000 रु. का TDS काटा गया। लेकिन, उस वर्ष में आपकी कुल आय 1.8 लाख रुपये तक थी जो टैक्स छूट सीमा में है। ऐसी स्थिति में रिफंड का दावा कर सकते हैं क्योंकि आपकी वार्षिक आय टैक्स के दायरे से बाहर है।
अगर आपकी आय टैक्स के दायरे से बाहर आती है, तो आप स्रोत पर टैक्स की कटौती न करने के लिए एक रिक्वेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए निम्न दो तरीके हैं-
- फॉर्म 15G/15H जमा करें। जिसके द्वारा आप घोषणा कर सकते हैं कि आपकी वार्षिक आय संबंधित वित्तीय वर्ष में टैक्स के दायरे से बाहर है इसलिए स्रोत पर कर नहीं काटा जाना चाहिए।
- घोषणा केवल उस विशेष वित्तीय वर्ष के लिए अच्छा रखती है। इसलिए, इसे हर साल जमा करने की आवश्यकता होती है जिसमें आपकी टैक्स योग्य आय सीमा से कम है।
- आप TDS की कम कटौती या न के बराबर कटौती के लिए एक आवेदन पत्र रख सकते हैं।
- भरे गए फॉर्म 13 को आयकर अधिकारी को जमा करना होगा।