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टैक्स एक महत्वपूर्ण टूल है जो सरकार को अपने देश के निवासियों से शुल्क वसूलने और अपने कार्यों को चलाने में मदद करता है। आसान शब्दों में कहे तो टैक्स सरकार को दिया जाने वाला पैसा है, जिसका इस्तेमाल हम सभी के लिए सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जाता है। ये टैक्स अलग-अलग रुपों में लिया जाता है। तो चलिए इस लेख में जानते हैं कि टैक्स क्या है, भारत में टैक्स (Tax in India) कितने प्रकार का वसूला जाता है और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां क्या है:
टैक्स की मदद से सरकार देश में विकास कार्य, निवासियों की जीवनशैली को बेहतर बनाने और उन्हें एक अच्छा भविष्य प्रदान करने का काम करती है। ये कर (Tax) कई रुपों में लिया जाता है जैसे- राज्य कर (स्टेट टैक्स), केंद्र सरकार कर (सेंट्रल गवर्नमेंट टैक्स), प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) और अप्रत्यक्ष कर (इन-डायरेक्ट टैक्स) आदि।
मुख्यता भारत में टैक्स को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया हैं – डायरेक्ट टैक्स (Direct Tax) और इन-डायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax)। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार को टैक्स का भुगतान कैसे किया जा रहा है। निम्नलिखित लेख में हम हम उस टैक्स पर चर्चा करेंगे जिसका भुगतान एक भारतीय नागरिक द्वारा किया जाता है।
| कैसे फाइल करें | क्या है | कैसे कैलक्युलेट करें |
| इनकम टैक्स ई-फाइलिंग | GST | TDS रेट |
| इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) | इनकम टैक्स | GST रेट |
| एडवांस टैक्स | ई-वे बिल | वेतन पर TDS |
| TDS रिटर्न | TDS | HRA कैलकुलेशन |
टैक्स शब्द लैटिन शब्द “टैक्सो” से आया है। एक टैक्स एक अनिवार्य शुल्क या वित्तीय शुल्क है जो सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था पर राजस्व जुटाने के लिए लगाया जाता है। जमा हुए टैक्स की कुल राशि को विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग किया जाता है। कानून के मुताबिक, खुद से या गलती से टैक्स भुगतान ना करने पर जुर्माना या सज़ा मिलने का प्रावधान है।
व्यक्ति/ संगठन को विभिन्न तरीकों से टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। टैक्स अधिकारियों द्वारा टैक्स भुगतान के तरीके के आधार पर, टैक्स को डायरेक्ट टैक्स (Direct Tax) और इन-डायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) में बांटा जाता है। दोनों टैक्स की जानकारी निम्नलिखित है।
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मूलत: टैक्स वह राशि है जिस पर सरकार चलती है और अपने नागरिक को सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करती है। टैक्स का भुगतान करने के लाभ निम्नलिखित हैं।
सरकार ने साल 2017 में GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) पेश किया जो स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे अहम टैक्स सुधार है। इससे पहले, सरकारों ने विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने या विभिन्न वस्तुओं को खरीदने के लिए कई तरह के अलग-अलग टैक्स लगा रखे थे। टैक्स की प्रक्रिया कठिन थी और कुछ पेचीदा नियमों की वजह से कुछ लोग टैक्स से बच जाते थे। GST लागू होने के बाद से टैक्स चोरी करने वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत सरकार ने टैक्स से संबंधित विभिन्न अधिनियम बनाए हैं और प्रत्येक नागरिक उन नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है। टैक्स संबंधित विभिन्न अधिनियम का पालन ना करने पर लगाए गए कुछ दंड निम्नलिखित हैं:
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यह सबसे साधारण टैक्स है जो एक नागरिक सरकार को व्यक्तिगत रूप से चुकाता है। यह बहुत ही सरल है – आपकी इनकम का एक हिस्सा हर साल सरकार को टैक्स के रूप में देना होता है और इस धन का उपयोग सरकार द्वारा देश भर में विकास कार्यों के लिए किया जाता है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार द्वारा 12.01 लाख करोड़ रु. ग्रॉस इनकम टैक्स इकट्ठा किया गया, जो कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 24.26% वृद्धि को दर्शाता है।
कोई भी व्यक्ति जो इनकम होने के कारण से टैक्स जमा करने के लिए उत्तरदायी है, एक इनकम टैक्स असेसी है। हालांकि, कुछ व्यक्ति जो इनकम होने के बावजूद भी टैक्स देने के लिए बाध्य नहीं होते हैं जैसे किसान आदि। इसके अतिरिक्त, एक असेसी कुछ स्थितियों में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से टैक्स रिटर्न जमा करने के लिए बाध्य हो सकता है।
सभी व्यक्तियों पर समान टैक्स लागू नहीं होता है, नियम के अनुसार आपकी आय जितनी अधिक है, आपको उतनी अधिक राशि का भुगतान करना होगा। यह सुनिश्चित करता है कि टैक्स की दरें और नियम एक समान होने के बजाय निष्पक्ष हों, सरकार आयकर स्लैब के उपयोग से टैक्स दर को निर्धारित करती है जिस पर प्रत्येक व्यक्ति इनकम टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। नीचे वित्त वर्ष 2024-25 (AY- 2025-26) के लिए टैक्स स्लैब दर दिया गया है:
| पुराना टैक्स रिज़िम (Old Tax Regime) | नया टैक्स रिज़िम (New Tax Regime) | ||
| आय स्लैब | इनकम टैक्स रेट | आय स्लैब | इनकम टैक्स रेट |
| ₹2,50,000 तक | शून्य | 0 – ₹3,00,000 | शून्य |
| ₹2,50,001 – ₹5,00,000 | ₹2,50,000 से अधिक पर 5% | ₹3,00,000 –₹7,00,000 | 5% |
| ₹5,00,001-₹10,00,000 | ₹5,00,000 से अधिक पर ₹12,500 + 20% | ₹7,00,000 -₹10,00,000 | 10% |
| ₹10,00,000 से अधिक | ₹10,00,000 से अधिक पर ₹1,12,500 + 30% | ₹10,00,00 – ₹12,00,000 | 15% |
| ₹12,00,000 – ₹15,00,000 | 20% | ||
| ₹15,00,000 से अधिक | 30% | ||
| पुराना टैक्स रिज़िम (Old Tax Regime) | नया टैक्स रिज़िम (New Tax Regime) | ||
| आय स्लैब | इनकम टैक्स रेट | आय स्लैब | इनकम टैक्स रेट |
| ₹3,00,000 तक | शून्य | 0 – ₹ 3,00,000 | शून्य |
| ₹3,00,001 – ₹5,00,000 | ₹3,00,000 से अधिक पर 5% | ₹3,00,000 – ₹7,00,000 | 5% |
| ₹5,00,001-₹10,00,000 | ₹5,00,000 से अधिक पर ₹10,000 + 20% | ₹7,00,000 -₹10,00,000 | 10% |
| ₹10,00,000 से अधिक | ₹10,00,000 से अधिक पर ₹1,10,000 + 30% | ₹10,00,00 – ₹12,00,000 | 15% |
| ₹12,00,000 – ₹15,00,000 | 20% | ||
| ₹15,00,000 से अधिक | 30% | ||
| पुराना टैक्स रिज़िम (Old Tax Regime) | नया टैक्स रिज़िम (New Tax Regime) | ||
| आय स्लैब | इनकम टैक्स रेट | आय स्लैब | इनकम टैक्स रेट |
| ₹5,00,000 तक | शून्य | 0 – ₹3,00,000 | शून्य |
| ₹5,00,001 – ₹10,00,000 | ₹5,00,000 से अधिक पर 20% | ₹3,00,000 – ₹7,00,000 | 5% |
| ₹10,00,000 से अधिक | ₹10,00,000 से अधिक पर ₹1,00,000 + 30% | ₹7,00,000 -₹10,00,000 | 10% |
| ₹10,00,00 – ₹12,00,000 | 15% | ||
| ₹12,00,000 – ₹15,00,000 | 20% | ||
| 15,00,000 से अधिक | 30% | ||
इस लागू दर के अलावा, कुछ मामलों में आय स्तर के आधार पर सरचार्ज और सेस भी लग सकता है।
जिनकी आय 2.5 लाख रु. से अधिक वह अपनी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार कर देने के योग्य हैं। हालांकि व्यक्ति कुछ टैक्स सेविंग ऑप्शन के ज़रिए अपनी इनकम टैक्स में बचत कर सकते हैं। इसमें ELSS , म्यूचुअल फंड, PPF, EPF, FD, पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा आदि जैसे सेविंग स्कीम शामिल हैं। इनमें निवेश करके व्यक्ति इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की धारा 80C और 80D के तहत टैक्स में छूट के लिए क्लेम कर सकता है।
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TDS को टैक्स के सबसे आम तरीकों में से एक माना जाता है, इसमें एक नौकरीपेशा व्यक्ति का टैक्स उसके वेतन में से काटकर नियोक्ता/ कम्पनी द्वारा सरकार को भुगतान किया जाता है। व्यक्ति द्वारा किये गए निवेश के बाद उस पर जितना टैक्स लागू होता है उसे नियोक्ता/ कंपनी द्वारा हर महीने वेतन से काटा जाता है।
यदि टैक्स कटने के बाद, कोई व्यक्ति टैक्स माफ़ी के लिए निवेश दस्तावेज देता है और नियमों के मुताबिक, टैक्स छूट के लिए योग्य होता है तो उसके वेतन से काटा गया टैक्स वापस यानी रिफंड कर दिया जाता है। वेतन के अलावा, FD पर व RD के ब्याज से हुई आय पर भी TDS काटा जाता है। इस मामले में भी, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद व्यक्ति को रिफंड मिल सकता है।
यदि टैक्स देने वाले किसी वयक्ति के नियोक्ता/ कम्पनी ने गलती से टैक्स प्रक्रिया में ज़्यादा TDS या ज़्यादा एडवांस टैक्स काट लिया है तो वह आयकर विभाग से आयकर रिफंड ले सकता है। हालाँकि, इस रिफंड का दावा केवल उस मामले में किया जा सकता है जब व्यक्ति ने ITR दाखिल किया हो। इस तरह के रिफंड में व्यक्तिगत करदाता को लौटाई गई राशि के आधार पर व्यक्ति को देय ब्याज शामिल हो सकता है।
प्रत्येक फाइनेंशियल वर्ष की समाप्ति के बाद, व्यक्तियों को चाहे वे नौकरीपेशा हों या स्व-नियोजित (अपना व्यवसाय करने वाला) हों, उन्हें अपना आयकर रिटर्न या ITR जमा करना आवश्यक है। यह दस्तावेज़ विभिन्न स्रोतों से हुई करदाता की वार्षिक इनकम, निवेश/ खर्च, कुल टैक्स भुगतान, TDS/ एडवांस टैक्स का भुगतान और अन्य डाटा इस पर निर्भर करता है कि ITR दाखिल करने वाले व्यक्ति नौकरीपेशा है या अपना व्यवसाय करता है। ITR जमा करने के बाद, आयकर विभाग एक एकनॉलेजमेंट नंबर जारी करता है और टैक्स अधिकारी रिफंड जारी करने से पहले ITR वैरीफाई करता है या व्यक्ति से कोई स्पष्टीकरण मांगता है।
सरकार द्वारा भेजे गए किसी भी प्रकार के नोटिस की तरह ही इनकम टैक्स नोटिस को भी एक बुरा संकेत माना जाता है। जबकि यह आपके ITR से संबंधित किसी जानकारी की वैरीफिकेशन के लिए भी हो सकता है। पहले इस तरह के नोटिस डाक प्रणाली का उपयोग करके भेजे जाते थे, लेकिन काफी वर्षों से, यह बदल गया है और ई-फाइलिंग के साथ, इनकम टैक्स विभाग ईमेल भेजता है जिसमें आपको अपने ई-फाइलिंग खाते पर लॉग-इन कर नोटिस देखने के लिए खा जाता है। इस तरह के नोटिस को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और निर्धारित तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए। यदि विभाग को कई नोटिस भेजने के बाद आपसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो वे आपकी स्थिति की गंभीरता के आधार पर आपके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कर सकते हैं या आप पर जुर्माना लगा सकते हैं।
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भारत की आज़ादी के बाद से अब तक के सबसे बड़े टैक्स सुधार को ध्यान में रखते हुए, GST जुलाई 2017, से लागू हुआ है। यह उन इन-डायरेक्ट टैक्स के एवज़ में बनाया गया है जो उत्पादों और सेवाओं पर लगते थे। GST, उन सभी इन-डायरेक्ट के बदले लागू होगा जिन्हें राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा लगाए जाता था। वर्तमान में वस्तुओं और सेवाओं पर 0%, 5%, 12%, 18% या 28% की दरों के अनुसार, GST लगाया जाता है, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं/ सेवाओं को इस से छूट दी गई है।
यह उन इन-डायरेक्ट टैक्स में से एक था जो भारत में GST से पहले लगाए जाते थे। पूरी दुनिया में बहुत आम है। जब भी बिक्री के लिए अंतिम वस्तु तैयार करने के लिए कच्चे माल का उपयोग होता है तब वैट लागू किया जाता है। यदि एक निश्चित वस्तु अपने अंतिम रूप में आने से पहले अर्ध-तैयार या कच्चे माल के रूप में कई बार खरीदी और बेची जाए, तो वैट प्रत्येक खरीद पर लागू होगा, बशर्ते हर बार वस्तु की कीमत बढ़ी हो।
यह वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री पर लगाया गया एक इन-डायरेक्ट टैक्स है, जो GST लागू होने से पहले लागू था। वैट के विपरीत, सेल्स टैक्स को एक विशेष टैक्स माना जाता है, क्योंकि ये हर बार वस्तु या सेवा की बिक्री पर लागू होता है। भले ही बिक्री के समय वस्तु का मूल्य ना बढ़ा हो।
भारत में वित्त अधिनियम, 1994 के भाग के रूप में, सर्विस टैक्स को सेवा देने वालों द्वारा सरकार को दिया जाने वाले इन-डायरेक्ट टैक्स के रूप में परिभाषित किया गया था। सेवा देने वाले बाद में अपने ग्राहकों से यह टैक्स वसूलते हैं। सामान्य उदाहरण जो ग्राहकों से सर्विस टैक्स वसूलते हैं, उनमें होटल, रेस्टोरेंट, मोबाइल कनेक्शन प्रदाता आदि शामिल हैं।
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प्रश्न. क्या सभी को टैक्स देना होता है ?
उत्तर: हाँ, सभी लोग किसी ना किसी टैक्स का भुगतान करते हैं। जबकि कुछ टैक्स जैसे कि इनकम टैक्स न्यूनतम छूट की सीमा के साथ आते हैं अर्थात यदि आप सालाना एक निश्चित राशि से कम कमाते हैं तो आपको इनकम टैक्स नहीं देना है, वही इन-डायरेक्ट टैक्स पर ये लागू नहीं होता है जैसे कि किसी ऐसी वस्तु को खरीदा जा रहा है जिसपर GST लागू होता है तो उसे कोई भी खरीदे उन्हें समान टैक्स देना होगा। उदाहरण: बिस्किट, कार आदि। अंततः सभी को टैक्स देना होता है।
प्रश्न. भारत में टैक्स रेट कौन तय करता है?
उत्तर: टैक्स रेट को तय करने का अंतिम निर्णय भारत सरकार के पास है। हालांकि, कई विभाग और निकाय हैं जो सरकार को टैक्स रेट और टैक्स का सुझाव देते हैं और उन्हें लागू करते हैं। कुछ प्रमुख हैं CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) और GST (माल और सेवा कर) परिषद।
प्रश्न. सरकारें टैक्स क्यों लगाती हैं?
उत्तर: इनकम टैक्स और GST जैसे टैक्स लगाने का प्राथमिक लक्ष्य राजस्व है। इस राजस्व को बाद में जनता के लिए सार्वजनिक उपयोगिताओं, राष्ट्रीय रक्षा वित्त पोषण जन कल्याणकारी पहल जैसे अन्य क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है।
प्रश्न. प्रोग्रेसिव टैक्स क्या है भारत में कौन सा टैक्स प्रोग्रेसिव है?
उत्तर: प्रोग्रेसिव टैक्स को सबसे अच्छी कर प्रणाली के रूप में परिभाषित किया गया है। जिसमें टैक्स आय के बढ़ने के साथ बढ़े। यह भारत में इनकम टैक्स के मामले में सच है क्योंकि टैक्स की दर व्यक्ति की इनकम बढ़ने के साथ बढ़ती है।