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लोन की अवधि पूरी होने से पहले लोन राशि के कुछ हिस्से का भुगतान करना पार्ट-प्रीपेमेंट कहलाता है। पार्ट-प्रीपेमेंट उधारकर्ता को लोन जल्दी चुकाने में मदद करता है। अतिरिक्त रकम होने पर उधारकर्ता बीच-बीच में आंशिक भुगतान कर सकता है। लेकिन ध्यान रहे, पार्ट-प्रीपेमेंट करने पर बैंक/NBFC चार्ज वसूलते हैं। इसलिए निर्णय लेने से पहले इसके फायदे और इससे जुड़े नियम और शर्तों को अच्छी तरह समझना ज़रूरी है।
जब भी आप पार्ट-प्रीपेमेंट करते हैं, तो इससे लोन की मूल राशि कम होती है, जिससे कुल ब्याज लागत भी कम हो जाती है। इससे उधारकर्ता पर लोन का बोझ कम होता है। पार्ट-प्रीपेमेंट से ब्याज लागत में कितनी बचत होगी, यह जानने के लिए पर्सनल लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर का उपयोग करें।
पार्ट प्रीपेमेंट करने पर मूलराशि घटती है, जिससे उधारकर्ता को दो विकल्प मिलते हैं- पहला EMI कम करने का विकल्प और दूसरा है लोन अवधि घटाने का विकल्प। लोन अवधि कम करने पर जहां लोन जल्दी चुकता होता है, वहीं EMI कम करने पर मासिक बोझ घटता है। कौन-सा विकल्प चुनना है यह आपकी आवश्यकता और कैश फ्लो पर निर्भर करता है।
बार-बार पार्ट-प्रीपेमेंट करने से बकाया राशि तेज़ी से घटती है, जिससे उधारकर्ता लोन को निर्धारित समय से चुका सकता है।
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कई लोग पार्ट-प्रीपेमेंट के लिए अपने इमरजेंसी फंड, सेविंग्स या निवेश का उपयोग कर लेते हैं। लेकिन ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी जाने या अचानक होने वाले खर्चों में पैसों की कमी से जूझना पड़ सकता है । इसलिए पार्ट-प्रीपेमेंट तभी करें जब आपके पास पर्याप्त अतिरिक्त फंड मौजूद हो। कभी भी पार्ट-प्रीपेमेंट के लिए अपने ज़रूरी निवेश और इमरजेंसी फंड का उपयोग न करें।
पर्सनल लोन का पार्ट-प्रीपेमेंट करने पर बैंक/लोन संस्थान पार्ट प्रीपेमेंट चार्जेस वसूलते हैं। यह चार्जेस आमतौर पर फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन पर लिए जाते हैं। फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन पर कोई पार्ट-प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता।
यह भी पढ़ें: एसबीआई पर्सनल लोन पर कितना पार्ट-प्रीपेमेंट चार्ज लगता है?
कुछ बैंक/लोन संस्थान सीमित संख्या में पार्ट-प्रीपेमेंट की अनुमति देते हैं। उदाहरण के लिए, HDFC पर्सनल लोन के मामले में उधारकर्ता एक वित्तीय वर्ष में सिर्फ एक बार और पूरी लोन अवधि के दौरान दो बार पार्ट-प्रीपेमेंट कर सकते हैं। इसके अलावा, पहली EMI भरने के बाद, बकाया मूल राशि के सिर्फ 25% तक ही पार्ट-प्रीपेमेंट की अनुमति होती है। इसलिए प्रीपेमेंट से पहले अपने लेंडर के नियम और शर्तें ज़रूर समझ लें।
पार्ट-प्रीपेमेंट पर्सनल लोन को जल्दी चुकता करने का बढ़िया विकल्प है। लेकिन इसका फैसला लेने से पहले उधारकर्ता को इससे जुड़े चार्जेस और नियम व शर्तों की जानकारी होनी चाहिए। पार्ट प्रीपेमेंट का फैसला अपने फाइनेंशियल गोल्स को ध्यान में रखते हुए ज़रूर लें। सही प्लानिंग के साथ किया गया पार्ट प्रीपेमेंट ब्याज लागत में बचत करने और लोन को जल्द चुकाने में मदद करता है।