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देश की अर्थव्यवस्था में सोना एक विशेष स्थान रखता है। जहाँ तक सोने की खरीदारी की बात है तो नवाबों का शहर लखनऊ भी इसमें कोई अपवाद नहीं है। यहां सोना मुख्य रूप से सोने के आभूषणों के रूप में खरीदा जाता है और दूसरा निवेश के लिए। किसी भी रूप में सोना निवेश का सबसे सुरक्षित रूप माना जाता है, खासकर आर्थिक अस्थिरता के समय में। लखनऊ में सोने की कीमत राजनीतिक परिदृश्य, मौजूदा बाज़ार की स्थितियों और मुद्रा की ताकत जैसे आदि कारणों प्रभावित होती है।
| दिनांक | 22 कैरेट गोल्ड ₹/10 ग्राम | 24 कैरेट गोल्ड ₹/10 ग्राम |
| 22 मई, 2024 | ₹68,450 | ₹74,660 |
| 21 मई, 2024 | ₹68,450 | ₹74,660 |
| 20 मई, 2024 | ₹68,000 | ₹74,500 |
| 19 मई, 2024 | ₹68,300 | ₹74,270 |
| 18 मई, 2024 | ₹68,400 | ₹74,174 |
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भारत सोने का उत्पादक नहीं है, बल्कि एक उपभोक्ता है। इसका तात्पर्य है कि देश में सोने की खान नहीं है और मौजूदा सोने की मांग को पूरा करने के लिए सोना आयात किया जाता है। दुनिया भर में, लंदन बुलियन एसोसिएशन द्वारा सोने की दर तय की जाती है और IBA अमेरिकी डॉलर में सोने की कीमतों को प्रकाशित करता है जो बैंकरों और बुलियन व्यापारियों के लिए दुनिया भर में एक बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है।
भारत में, इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) सोने के अंतर्राष्ट्रीय कीमतों को मानता है और उसमें आयात शुल्क और अन्य लागू टैक्स को जोड़ता है। इसके बाद बुलियन विक्रेताओं का एक संगठन तय करता है कि किस दर पर सोना उन रिटेल विक्रेताओं को दिया जाएगा। कई बार दिन में दो बार सोने की कीमत बदलने पर भी ये रिटेल विक्रेता लखनऊ और पूरे भारत में सोने की बदली हुई कीमत पर सोना बेचते हैं।
GST लागू होने के बाद वैट और उत्पाद शुल्क की जगह 3% GST सोने पर लगाया जाता है।
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लखनऊ में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निम्नलिखित हैं:
ब्याज दरें: जब भी फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट (फिक्स्ड डिपॉज़िट, पेंशन योजना आदि) की दरों में वृद्धि होती है तब-तब सोने की कीमत में गिरावट आती है। क्योंकि सोने की कीमते घटती-बढ़ती रहती हैं।
रुपया-डॉलर समीकरण: अमेरिकी डॉलर का प्रदर्शन लखनऊ और पूरे भारत में सोने की दरों को अत्यधिक प्रभावित करता है। गिरते डॉलर के कारण रूपये में सोने की कीमत बढ़ेगी और डॉलर की कीमत बढ़ने पर इसका उल्टा होगा।
भू-राजनीतिक संकट: सोना आमतौर पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अक्सर राजनीतिक और वित्तीय अनिश्चितता के दौरान वैकल्पिक निवेश के रूप में देखा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है और ऐसे संकटों के दौरान; लोग सोने के रूप में पैसा रखना चाहते हैं जो सोने की मांग को बढ़ाता है।
महंगाई दर बढ़ना: महंगाई दर बढ़ने से लखनऊ में सोने की मांग में वृद्धि होती है क्योंकि सोने के रूप में पैसा उन दिनों के दौरान मंहगाई की स्थिति के खिलाफ बचाव का साधन बन जाता है।
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सोने की कीमते आम तौर पर एक राज्य से दूसरे राज्य से भिन्न होती हैं, इसके पीछे कुछ कारण हैं:
परिवहन / ट्रांसपोर्ट लागत: एक स्थान से दूसरे स्थान पर सोने को ले जाने के लिए उपयुक्त सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होती है और इसकी लागत को सोने के मूल्य में जोड़ा जाता है। इसलिए, राज्य के आधार पर, सोने की कीमते भिन्न होती हैं।
विभिन्न बुलियन एसोसिएशन: सोने के कारोबार के राज्य के स्थानीय संघ भी उस विशेष राज्य में सोने की कीमत निर्धारित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
निवेशकों के लिए सोने में निवेश करना उनके पसंदीदा निवेश विकल्पों में से एक बन गया है। महंगाई और आसानी से अपने निवेश को नकदी में बदलने के अलावा सोने में निवेश करने के मुख्य कारण हैं। यदि आप लखनऊ में सोने में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो यहां आपके लिए विकल्प हैं:
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: यह भारत सरकार और RBI द्वारा ऑफर किया जाता है, यह कागज़ के रूप में सोने खरीदने का एक और तरीका है। उनका मूल्य ग्राम में दर्शाया गया है और एक व्यक्ति न्यूनतम 1 ग्राम और अधिकतम 4 किलो सोने तक के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीद सकता है। बॉन्ड के मैच्योर होने की अवधि 8 वर्ष है लेकिन इसे 5 वर्ष बाद भी बेचा जा सकता है। बता दें कि, ये बॉन्ड पूरा वर्ष उपलब्ध नहीं होते हैं। सरकार रुक-रुक कर निवेशकों को बॉन्ड खरीद के लिए उपलब्ध कराती है। बॉन्ड की अवधि ख़त्म होने तक आपको ब्याज मिलता रहेगा और बॉन्ड की अवधि पूरी होने पर आपकों सोने की तत्काल कीमत मिल जाएगी। चूंकि ये सरकारी सिक्योरिटी हैं, इसलिए निवेश करने के लिए सुरक्षित हैं।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (जिसका इस्तेमाल गोल्ड डिपॉज़िट स्कीम के रूप में किया जाता है): इस स्कीम के तहत, कोई भी व्यक्ति अपने गोल्ड के आभूषण/ सोने की बार आदि को शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए नामित बैंकों में जमा कर सकता है और ब्याज कमा सकता है। ब्याज दरें अलग-अलग होती हैं और केंद्र सरकार द्वारा तय की जाती हैं।
गोल्ड कॉइन / बार: 1 ग्राम, 5 ग्राम, 10 ग्राम के मूल्यवर्ग में उपलब्ध, कोई भी ऑनलाइन के माध्यम से या तो गोल्ड / गोल्ड बार में निवेश करना शुरू कर सकता है या किसी ज्वैलर से खरीद सकता है। हालांकि, सुनिश्चित करें कि आप बायबैक शर्तों की जांच करें और 99.9% शुद्धता के साथ केवल 24KT गोल्ड बार खरीदें। यदि आप MMTC-PAMP वेबसाइट से सोने के सिक्के खरीदते हैं, तो आप बाद में अपने सिक्के उन्हें बेच सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड: अपने स्थानीय जौहरी से सोना खरीदने के अलावा, आप पेटीएम, फ्रीचार्ज (मोबाइल वॉलेट्स) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित गोल्डरश के माध्यम से भी सोना खरीद सकते हैं। इसे स्वर्ण संचय योजना कहा जाता है क्योंकि आप न्यूनतम 1 रुपए तक का सोना खरीद सकते हैं और इसे रिडीम करने/ बेचने पर नकदी या सोने के सिक्के प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल गोल्ड में निवेश करने का एक लाभ ये है कि आपको किसी निवेश योजना की तरह तय समय पर निवेश करने की ज़रूरत नहीं है, जब भी आप निवेश करना चाहते हैं या जब भी आपके पास अतिरिक्त धन है आप जब डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं। आपका निवेश भी सुरक्षित है क्योंकि डिजिटल गोल्ड MMTC-PAMP के साथ मिलकर पेश किया जाता है। बता दें कि, साथ स्वर्ण संचय योजना SIP जैसी नहीं है और इस पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
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सोने या सोने के आभूषणों में निवेश करने से पहले, किसी को सोने के बारे में कुछ पहलुओं को जानना चाहिए और यहां वे हैं:
सुनिश्चित करें कि आपके बिल में सोने का सिक्का / सोने के आभूषण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हैं, जैसे कि आपने कैरेट, वजन और मूल्य प्रति ग्राम जो आपने खरीदा है
भारत में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) एक सरकारी निकाय है जो सोने की शुद्धता को प्रमाणित करता है और इस प्रक्रिया को हॉलमार्किंग कहा जाता है। हॉलमार्किंग यह सुनिश्चित करती है कि आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सोना शुद्धता के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करे।
निम्नलिखित तत्व हैं जिन्हें आपको हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण / सोने के सिक्कों पर देखने की ज़रूरत है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपको टैग पर लिखा सोना मिल रहा है।
सोने के आभूषण के लिए
1. BIS मार्क
3.हॉलमार्क सेंटर का पहचान चिंह/ नंबर
4.ज्वेलर की पहचान चिह्न / नंबर
सोने के सिक्के के लिए
नोट: अगर ऊपर दी गई जानकारी सोने पर दी जानी चाहिए। 15 जनवरी 2021 से, ज्वैलर्स के लिए केवल हॉलमार्क 14K, 18K और 22K आभूषण बेचना अनिवार्य होगा।
आर्थिक इमरजेंसी के मामले में, आप अपने सोने के आभूषणों का उपयोग सिक्योरिटी के रूप में लखनऊ में सोने के आभूषणों पर लोन प्राप्त करने के लिए कर सकते हैं। विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थान लखनऊ में आभूषणों को गिरवी रख लोन प्रदान करते हैं। बैंक से संपर्क करने की ज़रूरत है और सोने के आभूषणों की शुद्धता और वजन के आधार पर लोन राशि मंज़ूर की जाएगी। बदले में, उधारकर्ता को ब्याज और लोन राशि वापस भुगतान करने की आवश्यकता होती है।
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प्रश्न.सफेद सोने के लिए हॉलमार्क क्या है?
उत्तर: हॉलमार्क संकेत पीले, गुलाब, सफेद के साथ मिश्रित सोने की शुद्धता को प्रमाणित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आभूषण भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित मानकों के एक सेट के अनुरूप हो।
प्रश्न.सफेद सोना पीले सोने की तुलना में अधिक महंगा क्यों है?
उत्तर:सोने के आभूषणों की कीमत मुख्य रूप से सोने की शुद्धता पर निर्भर करती है जिसका उपयोग किया गया है। सफेद सोने की ज्वैलरी पीले सोने से ज़्यादा महंगी होगी क्योंकि सफेद सोने में जिंक और सिल्वर होता है। पीले सोने के आभूषणों में, तांबे में जोड़ा जाता है जिसकी कीमत जस्ता और चांदी से कम होती है।
प्रश्न.अगले 2 वर्षों में सोने की कीमत क्या होगी?
उत्तर: हाल ही में कोरोनो वायरस प्रकोप, यूएस-चीन व्यापार युद्ध और यूएस-ईरान के बीच बढ़ते तनाव जैसे विभिन्न कारकों के कारण सोने की कीमतों में तेज़ी कायम रहने की उम्मीद है। यह देखा गया है कि जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट का सामना करती है तो सोने की कीमतों हमेशा बढ़ती हैं। इसे आखिरी बार जनवरी के पहले सप्ताह में देखा गया था जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने सोने की मांग को बढ़ा दिया था।