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कोई भी लोन या क्रेडिट कार्ड लेने के बाद, उसका समय पर भुगतान करना बेहद ज़रूरी होता है। समय पर EMI चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है, जबकि देरी या डिफॉल्ट इसे नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार लोग आर्थिक तंगी के समय “लोन सेटलमेंट” का रास्ता चुनते हैं, जो दिखने में आसान लगता है लेकिन आपके क्रेडिट स्कोर को बूरी तरह प्रभावित कर सकता है। चलिए जानते हैं कि आखिर क्रेडिट सेटलमेंट क्या है और यह आपके लिए नुकसानदेह क्यों हो सकता है।
जब कोई उधारकर्ता अपनी खराब आर्थिक स्थिति के चलते पूरी लोन राशि चुकाने में असमर्थ होता है, तो वह बैंक से बातचीत करता है। बैंक अपना पूरा पैसा डूबने के डर से उधारकर्ता को एक विकल्प देता है कि वह कुल बकाया से कम राशि चुकाकर अकाउंट बंद कर दें। इसे ही ‘सेटलमेंट’ कहते हैं।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए आपने 2 लाख का लोन लिया जिसमें से 1 लाख रु. लेकर लोन अकाउंट बंद करने के लिए लोन संस्थान तैयार हो जाता है, इसे ही सेटलमेंट कहते हैं। लेकिन लोन सेटलमेंट की जानकारी आपकी क्रेडिट रूप में “Settled” के रूप में दिखती है न कि “Closed”(लोन की पूरी रकम का भुगतान करने के बाद) के रूप में।
लोग अक्सर सेटलमेंट को एक “डिस्काउंट” की तरह देखते हैं, लेकिन इसके छिपे हुए नुकसान बहुत गंभीर हैं:
सेटलमेंट का सबसे ज़्यादा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। एक बार “Settled” का टैग लगने पर आपके स्कोर में भारी गिरावट आ जाती है।
आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में “Settled” स्टेटस अगले 7 सालों तक बना रहता है। इस दौरान आप जब भी किसी नए लोन के लिए आवेदन करेंगे, सेटलमेंट की जानकारी लोन संस्थान को दिखाई देगी।
बैंक आपको एक ‘रिस्की’ उधारकर्ता मानते हैं। उन्हें लगता है कि आपने पहले भी पूरे लोन का भुगतान नहीं किया, तो अगर आपको फिर से लोन दिया जाता है, तो आप भविष्य में डिफॉल्ट कर सकते हैं।
अगर आपको लोन मिल भी जाता है (जिसकी संभावना न के बराबर है), तो बैंक आपसे बहुत ज़्यादा ब्याज वसूलेंगे क्योंकि आपकी क्रेडिट प्रोफाइल कमज़ोर है।
बैंक और लोन संस्थान आमतौर पर आपके अकाउंट के दो स्टेट्स पर ज़्यादा गौर करते हैं, पहला है सेटल्ड और दूसरा क्लोज़्ड। चलिए इनके अंतर को समझते हैं:
| विवरण | लोन क्लोज़र | लोन सेटलमेंट |
| अर्थ | पूरी बकाया राशि (ब्याज सहित) का भुगतान कर दिया गया है। | बैंक से बातचीत करने के बाद बकाया राशि से कम राशि चुकाई गई। |
| क्रेडिट रिपोर्ट पर प्रभाव | “Closed” दिखता है। | “Settled” दिखता है। |
| नए लोन के लिए योग्यता | यदि योग्यता शर्तों को पूरा करते हैं तो नया लोन मिलने की संभावना रहती है। | सेटलमेंट के बाद नया लोन मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। |
अगर आप आर्थिक संकट में हैं, तो सेटलमेंट के बजाय इन विकल्पों को अपनाएं:
अगर आपकी आर्थिक स्थिति बाद में बेहतर हो जाती है, तो आप बची हुई राशि का भुगतान करके अपने अकाउंट का स्टेटस “Settled” से “Closed” करवा सकते हैं। इसके बाद बैंक आपको “No Dues Certificate” (NOC) देगा और आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में स्टेटस “Settled” से बदलकर “Closed” हो जाएगा। इससे आपका स्कोर धीरे-धीरे सुधरने लगेगा।