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आधार कार्ड एक वैरिफाइड पहचान प्रमाण है, जिसे भारत सरकार द्वारा देश के निवासियों को प्रदान किया जाता है। इस दस्तावेज़ में व्यक्ति की बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक दोनों तरह की जानकारी होती है। बायोमेट्रिक डेटा में फोटो, फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन होता है।
जब कोई व्यक्ति आधार नामांकन केंद्र पर आधार आवेदन के लिए जाता है, तो उसे सभी डेमोग्राफिक जानकारी प्रदान करनी होती है और फॉर्म में अपने क्लेम का समर्थन करने के लिए सभी दस्तावेज़ों को प्रस्तुत करना होता है। उसे अपना बायोमेट्रिक डेटा भी जमा करना होता है। आधार नंबर को सीधे नहीं दिया जाता है। डेमोग्राफिक और बायोमेट्रिक डेटा को UIDAI के डेटाबेस में सुरक्षित रखी जानकारी से मिलाया जाता है। जब किसी व्यक्ति के लिए डेटा का कोई मिलान नहीं होता है तो उसे एक नया आधार नंबर दिया जाता है।
यह तरीका सुनिश्चित करता है कि आधार नंबर का कोई दोहराव नहीं हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दो लोगों के फ्रिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन एक समान नहीं हो सकते हैं। यह आधार को एक व्यक्ति के लिए एक अलग दस्तावेज़ बनाता है। एक बार उसे सौंपे जाने के बाद, वह दूसरा आधार कार्ड नहीं बनवा सकता है जो आधार कार्ड को 100% वास्तविक बनाता है।
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आधार बायोमेट्रिक डेटा (Aadhaar Biometric Data) में तीन सेट होते हैं –
किसी व्यक्ति को आधार आवेदन के समय सभी तीन सेट डेटा जमा करना होता है। जब व्यक्ति अपनी जानकारी को अपडेट करने या आधार से जुड़ी किसी भी जानकारी को जानने के लिए आधार कार्ड केंद्र में जाता है, तो उसे वेरिफिकेशन के लिए फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन प्रदान करना होता है।
किसी व्यक्ति को आधार आवेदन के समय अपनी बायोमेट्रिक जानकारी भी देनी होती है। जब आवेदक अपनी डेमोग्राफिक जानकारी के साथ अपना आवेदन जमा करता है, तो कार्यकारी UIDAI के डेटाबेस में इस जानकारी को दर्ज करता है। इसके बाद वह आवेदक की फोटो लेता है, सभी 10 उंगलियों के निशान लिए जाते हैं और दोनों आंखों के आईरिस स्कैन किया जाता है।
यह डेटा आवेदक की एनरोलमेंट आईडी के लिए तैयार की जाती है। फिर इसे UIDAI के डेटाबेस से वेरिफाई किया जाता है कि क्या ऐसा अन्य डेटा पहले से मौजूद है। यदि ऐसा नहीं है, तो एनरोलमेंट आईडी के लिए एक आधार नंबर जनरेट होता है। इसके बाद ही आधार कार्ड (Aadhaar Card) को प्रिंट किया जाता है और आधार एनरोलमेंट फॉर्म में दिए गए पते पर भेजा जाता है।
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आधार न केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले लोगों के लिए है, बल्कि बच्चों और नवजात शिशुओं के लिए भी है। बच्चे के माता-पिता के डेमोग्राफिक डेटा के आधार पर नवजात शिशुओं के लिए आधार आवेदन किया जा सकता है। ऐसे कार्ड को बाल आधार कार्ड कहा जाता है। जब बच्चे की आयु पांच वर्ष की हो जाती है, तो उसका बायोमेट्रिक डेटा लिया जाता है। 15 वर्ष की आयु में बच्चे को एक बार फिर अपना बायोमेट्रिक डेटा जमा करना होता है।
नियमित कार्डधारक या वरिष्ठ नागरिक भी आवश्यकता पड़ने पर अपना बायोमेट्रिक डेटा अपडेट करवा सकते हैं। आधार कार्ड अपडेट करने की स्थिति अक्सर पता बदलने या शादी के बाद नाम बदलने के समय आती है। आधार कार्ड अपडेट करवाने के बाद वह अपडेट हुआ या नहीं, जानने के लिए आप आधार कार्ड स्टेटस ट्रैक भी कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें- आधार कार्ड के लिए आवेदन कैसे करें?
आधार कार्ड में बायोमेट्रिक्स अपडेट करना कोई मुश्किल काम नहीं है। आधार कार्ड बायोमेट्रिक्स को अपडेट करने के लिए नीचे दिए गए तरीके का पालन करना होगा:
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आवेदक को आधार बायोमेट्रिक अपडेट करने के लिए 100 रु. (जीएसटी समेत) का शुल्क देना होता है। एक व्यक्ति अपने बायोमेट्रिक जानकारी को जितनी बार चाहे अपडेट करवा सकता है। हालांकि, उसे हर बार अपने डेटा को अपडेट करने के लिए आधार अपडेट शुल्क देना होगा। जबकि डेमोग्राफिक अपडेट के 50 रु. शुल्क का भुगतान करना होता है।
5 साल उम्र के बच्चों का पहली बार बायोमेट्रिक डेटा अपडेट करवाने पर कोई फीस नहीं लगता है। हालांकि जब बच्चा 15 साल की उम्र का हो जाता है तो पहली बार बायोमेट्रिक अपडेट मुफ्त में होता है लेकिन इसके बाद अपडेट करवाने पर फीस देनी होती है।