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इनकम टैक्स रिफंड वह प्रक्रिया है जिसमें इनकम टैक्स विभाग द्वारा उस टैक्स देने वाले को वो टैक्स वापस दिया जाता है जो उसने वित्तीय वर्ष (Financial year) के दौरान ज़्यादा भर दिया था। इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 237 के अनुसार, टैक्स देने वाला व्यक्ति अधिक भुगतान की गई राशि के लिए रिफंड का दावा कर सकते हैं। सभी इनकम टैक्स रिफंड क्लेम के वैरीफिकेशन के बाद ही इनकम टैक्स विभाग द्वारा रिफंड मिलता है।
यदि कोई टैक्स देने वाला समय पर सभी निवेश के प्रमाण जमा नहीं कर पाता है, तो उस स्थिति में प्रस्तुत किए गए निवेशों के प्रमाण के आधार पर टैक्स कट जाता है, चाहें वास्तविक निवेश अधिक हो। इन स्थितियों में, जो अधिक टैक्स कट गया है सरकार से उसकी वापसी क्लेम की जा सकती है। इनकम टैक्स विभाग आपको आयकर अधिनियम की धारा 254 के तहत किसी अन्य बकाया टैक्स राशि के बदले इनकम टैक्स रिफंड को एडजस्ट करने की सुविधा भी देता है।
इनकम टैक्स रिफंड क्लेम करने का तरीका निम्नलिखित है:
यदि 6 महीने के भीतर आपको टैक्स रिफंड नहीं मिलता है, तो NSDL वेबसाइट पर लॉग –इन करें। इनकम टैक्स रिफंड का स्टेटस/स्तिथि ट्रैक करने के लिए अपना पैन और अन्य जानकारियां भरें।

यदि स्टेटस – ‘refund had expired’ है तो-
यदि स्टेटस ‘refund had returned’ है तो
यदि स्टेटस ‘refund paid’ है तो
यदि स्टेटस ‘no demand no refund’ है तोआपका रिफंड क्लेम हो चुका है, लेकिन इनकम टैक्स विभाग ने (तथ्यों और परिस्थितियों की जांच के बाद) पाया है कि अधिक टैक्स का भुगतान नहीं किया गया था।ऐसे मामलों में आप निवेश के सभी प्रमाण जमा कर सुधार के लिए फॉर्म 16 फाइल कर सकते हैं।रिफंड क्लेम करने का एक और तरीका है, फॉर्म 30। फॉर्म 30 एक रिफंड रिक्वेस्ट फॉर्म है जिसे इनकम टैक्स विभाग को जमा करना होता है। फॉर्म 30 वित्तीय वर्ष (Financial Year) के अंत तक जमा किया जा सकता है। रिफंड क्लेम को वैरीफाई करने के लिए आपको निवेश प्रमाण और अन्य दस्तावेजों को भी जमा करना होगा।
निम्नलिखित स्तिथियों में आप इनकम टैक्स रिफंड फाइल कर सकते हैं
इनकम टैक्स वर्ष की अंतिम तिथि से एक वर्ष के भीतर ही रिफंड क्लेम किया जा सकता है। हालांकि, कुछ मामलो में इनकम टैक्स अधिकारियों को अधिकार होता है कि समय सीमा के बाद फाइल किए गए क्लेम पर विचार करें।नियम व शर्तें
इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की धारा 238 के तहत, यदि कोई व्यक्ति या उसका कानूनी प्रतिनिधि मृत्यु, दिवालिया,या किसी अन्य कारण से टैक्स रिफंड क्लेम नहीं करता तो वो इस रिफंड का हकदार है।यदि व्यक्ति की इनकम किसी अन्य व्यक्ति की इनकम से जोड़ी जाती है तो ऐसे मामलें मे केवल प्रमुख व्यक्ति को ही रिफंड पाने का हक होगा।
इनकम टैक्स अधिनियम 1961 की धारा 240 के अनुसार, अगर किसी इनकम टैक्स अधिकारी द्वारा ही रिफंड अपील हो तो टैक्स देने वाले की ओर से अपील करने की जरूरत नहीं होगी।यदि मूल्यांकन (Assesment) कैंसिल होने पर नए तरीके से मूल्यांकन हो रहा है तो इस दशा में भी अपील की जरूरत नहीं है।
इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की धारा 244A के तहत, यदि रिफंड भुगतान में कोई देरी हो तो इनकम टैक्स विभाग को 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज़ देना होगा।रिफंड राशि पर ब्याज़ की गणना टैक्स के भुगतान की तारीख से लेकर रिफंड के वास्तविक भुगतान की तारीख तक की जाती है।उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति असेसमेंट वर्ष 2016-17 के लिए 5,000 रु. के रिफंड का क्लेम करता है और रिफंड का भुगतान मार्च 2017 के महीने में आपको किया गया, तो रिफंड पर अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक ब्याज़ लगेगा।यह नोट करना आवश्यक है कि ब्याज केवल तभी दिया जाता है जब टैक्स रिफंड की राशि आपके द्वारा दिये गये टैक्स के 10% से अधिक हो।अगर देरी टैक्स देने वाले की ओर से हो तो इस देरी के लिए ब्याज का भुगतान इनकम टैक्स विभाग द्वारा नहीं किया जाएगा।
इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की धारा 245 के तहत, इनकम टैक्स अधिकारी बकाया टैक्स के बदले इनकम टैक्स रिफंड काट सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग बकाया टैक्स के बदले काटे गए टैक्स की सूचना रिफंड क्लेम के समय ही भेज देता है।
कभी कभी इनकम टैक्स रिफंड क्लेम करने में मुश्किल हो सकती है। इस को आसान बनाने के लिए इनकम टैक्स विभाग ने अपनी ग्राहक सेवा शुरू की है। करदाता इनकम टैक्स रिफंड, पुन: जारी करने और उसमें सुधार से संबंधित प्रश्नों के लिए इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इनकम टैक्स रिफंड हेल्पलाइन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी निम्नलिखित है:
ई-फाइलिंग में एक छोटी सी गलती आपके रिफंड अनुरोध को रद्द ये उसमें देरी कर सकता है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:
इनकम टैक्स विभाग आपके ई-फाइलिंग लॉग-इन के साथ इनकम टैक्स रिफंड के स्टेटस को ऑनलाइन ट्रैक करने की सुविधा देता है। इनकम टैक्स रिफंड के स्टेटस को ऑनलाइन ट्रैक से फाइलिंग में हुई गलतियों में सुधार करने में मदद मिलती है। इनकम टैक्स विभाग सभी जानकारियों को वैरीफाई करने के बाद रिफंड देता है
प्रश्न. मैं कब से इनकम टैक्स रिफंड पाने के योग्य हूँ?
उत्तर: यदि आपने चालू वित्तीय वर्ष (Financial year) में अपने वित्तीय दायित्व से अधिक टैक्स का भुगतान किया है तो आप सरकार से इनकम टैक्स रिफंड पाने के योग्य हैं। आपकी रिफंड राशि की गणना ITR फाइल करने के समय की जाएगी।
प्रश्न. अगर मैं इनकम टैक्स रिफंड चाहता हूं तो क्या टैक्स फाइलिंग जरूरी है?
उत्तर: हाँ. यदि आप वित्तीय वर्ष (Financial year) के दौरान भुगतान किए गए अधिक टैक्स के लिए रिफंड क्लेम करना चाहते हैं, तो इनकम टैक्स रिफंड फाइल करना अनिवार्य है। यदि आप लागू अवधि के लिए अपना ITR फाइल नहीं कर पाते तो आपको कोई इनकम टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा।
प्रश्न. मुझे अपना इनकम टैक्स रिफंड कैसे मिलेगा और कब?
उत्तर: सभी ITR फॅार्म में एक फ़ील्ड होती है जिसमें आपको खाता नंबर, बैंक IFSC आदि सहित अपने बैंक आदि की जानकारी भरना जरूरी होता है। इन जानकारियों का उपयोग ऑनलाइन ट्रांसफर से आपके बैंक खाते को क्रेडिट करने के लिए किया जाता है। जब आपके इनकम टैक्स रिफंड और क्लेम को इनकम टैक्स अधिकारी वैरीफाई कर लेता है तब आपका रिफंड क्रेडिट हो जाता है।
प्रश्न. मेरे रिफंड में सरकार द्वारा देरी की गई। क्या इस देरी के लिए कोई मुआवजा है?
उत्तर: हाँ, सरकार या अधिकारियों द्वारा किसी भी देरी के लिये आप इनकम टैक्स रिफंड पर ब्याज माँग सकते है। आप लागू टैक्स वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख तक 6% प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज प्राप्त कर सकतें है। जो कि इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 मे दिए गए नियमों के आधीन है।
प्रश्न. अपने इनकम टैक्स रिफंड फाइल का स्टेटस कैसे ट्रैक कर सकते हैं?
उत्तर: अपने इनकम टैक्स रिफंड फाइल का स्टेटस ट्रैक करने के लिए सबसे अच्छी जगह TIN वेबसाइट है। इस वेबसाइट पर स्टेटस ट्रैक करने के लिए आवश्यक जानकारी में करदाता का पैन और निर्धारण वर्ष (Assesment Year) भरना है।
प्रश्न. क्या मुझे अपनी इनकम टैक्स रिफंड पर टैक्स का भुगतान करना होगा?
उत्तर: नहीं! सभी इनकम टैक्स रिफंड के साथ-साथ रिफंड के ब्याज (यदि लागू हो) पर कोई टैक्स नहीं देना होता है।