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अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड में सामूहिक निवेश फंड शामिल होते हैं, जो वेंचर कैपिटल, निजी इक्विटी और बचाव फंड आदि में निवेश करते हैं, लेकिन इसके जरिए पारंपरिक निवेश जैसे शेयर बाजार, बॉन्ड और डेट सिक्योरिटी में निवेश नहीं किया सकता है।
आपको बता दें, कि अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड को SEBI (स्टॉक एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) के विनियमन अधिनियम, 2012 के विनियमन 2 (1) (B) के तहत, बताया गया है। अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड को कंपनी, कॉर्पोरेट बॉडी, ट्रस्ट या एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
आमतौर पर, इसमें बड़े निवेशक और संस्थान निवेश करते हैं, क्योंकि इसमें म्यूचुअल फंड से ज़्यादा निवेश राशि की जरूरत होती है।

SEBI के अनुसार इसको तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
कैटेगरी 1 में निम्नलिखित फण्ड आते हैं:
वेंचर कैपिटल फंड नए व्यवसायों के विस्तार और स्टार्टअप्स को स्थापित करने में निवेश करते हैं, क्योंकि इनमें अपने उद्योग को विकसित करने की क्षमता होती है, लेकिन इनको शुरुआत में पूंजी बाज़ार से धन जुटाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वेंचर कैपिटल फंड ऐसे निवेशकों से धन प्राप्त करता है जो उद्योग में शेयर में निवेश करना चाहते हैं। वे कई स्टार्टअप में उनकी व्यावसायिक प्रोफाइल, संपत्ति और उत्पाद के विकास के आधार पर निवेश करते हैं। म्यूचुअल फंड या हैज फंड के विपरीत वेंचर कैपिटल फंड, शुरुआती निवेश पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इतना ही नहीं हर निवेशक को उस व्यवसाय का हिस्सा मिलता है, जिसमें वेंचर कैपिटल फंड ने निवेश किया है।
बड़े निवेशक ज़्यादा रिटर्न/ लाभ के कारण इनमें निवेश करते हैं, वहीं इस निवेश में सबसे ज़्यादा जोखिम भी होता है।
इनमें सार्वजनिक संपत्ति जैसे सड़क और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर, एयरपोर्ट, टेलिकॉम आदि के विकास के लिए निवेश किया जाता है। भविष्य में इंफ्रास्क्ट्रचर पर निवेशक फंड में निवेश कर सकते हैं क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अवसर मुश्किल ज़रूर है, लेकिन प्रतिस्पर्धा कम हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में निवेश करने से मिलने वाला रिटर्न/ लाभ पूंजी में बढ़ोत्तरी करने के साथ अतिरिक्त लाभ भी दे सकता है| जब एक इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड सामाजिक रूप से आकर्षक और व्यवहार्य परियोजनाओं में निवेश करता है, तो सरकार इस तरह के निवेशों पर टैक्स बचत भी बढ़ा सकती है।
यह फंड एक प्रकार का वेंचर कैपिटल फंड है, जहां फंड मैनेजर कई ‘एंजल’ निवेशकों से पैसे लेते हैं और उभरते स्टार्टअप में निवेश करते हैं। जब कभी नए व्यवसाय को लाभ मिलने लगता है तो निवेशकों को भी लाभ का कुछ हिस्सा मिलता है।
सोशल वेंचर फंड समाज में परिवर्तन के उद्देश्य से काम करने वाली कंपनियों में निवेश करते हैं। यह कंपनियां लाभ कमाने के साथ साथ पर्यावरण व सामाजिक मुद्दों को एक साथ सुलझाने पर ध्यान केंद्रित करती है।
ये फण्ड वीकासशील देशों में निवेश करती हैं क्योंकि उनमें विकास के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन की भी संभावनाएं होती हैं| इस तरह के निवेश में अच्छा मैनेजमेंट अभ्यास, टैक्नोलॉजी और अनुभव सब एक साथ होता है, जो इसे निवेशकों, उद्योगों और समाज समेत सभी के लिए एक फायदे का सौदा बनाता है।
कैटेगरी 2 में निम्नलिखित फण्ड आते हैं:
प्राइवेट इक्विटी फंड अनलिस्टेड निजी कंपनियों में निवेश करते हैं और कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद लेते हैं। क्योंकि ये कम्पनियाँ इक्विटी और डेट के द्वारा फंडिंग प्राप्त नहीं कर सकती हैं तो ये प्राइवेट इक्विटी फण्ड लेती हैं|
यह फंड प्राथमिक रूप से लिस्टेड कंपनियों के डेट में निवेश करते हैं। यह उन निवेशकों के लिए है जो कम आय का लक्ष्य रखते हैं और कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। डेब्ट फंड निवेशकों के लिए निवेश करने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
SEBI के नियम के मुताबिक, डेट फंड में निवेश की गई राशि का उपयोग लोन देने के उद्देश्य से नहीं किया जा सकता है, क्योंकि अल्टरनेटिव निवेश फंड को निजी तौर पर निवेश किया जाता है।
जैसा नाम से ही पता चलता है, कि यह फंड कई अल्टरनेटिव निवेश फंड का मिश्रित रूप है। इस फंड का निवेश करने का तरीका ये है कि किसी अन्य अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड में ये निवेश करते हैं ना कि किसी विशेष क्षेत्र में| हालांकि, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ये फण्ड अपने यूनिट को सार्वजानिक नहीं कर सकता है|
कैटेगरी 3 में निम्नलिखित फण्ड आते हैं:
ये फण्ड ज़्यादा रिटर्न/ लाभ प्राप्त करने के लिए राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में निवेश करता है| हेज फंड पर म्यूचुअल फण्ड और अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले कम नियम व कानून लागू होते हैं|
ये अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले महंगे होते हैं| हेज फण्ड 2% एसेट मैनेजमेंट फीस लेते हैं और लाभ होने पर उसका 20% हिस्सा फीस के तौर पर अपने पास रखते हैं|
सार्वजनिक इक्विटी में निजी निवेश करने के लिए कुछ निवेशक ये फण्ड बनाते हैं| ये शेयर बाज़ार में मंदी आने पर मौजूद शेयर को सस्ते दामों में ज़्यादा मात्र में खरीदते हैं और सही समय आने पर महंगे दामों में बेचकर लाभ कमाते हैं|