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ज़्यादातर होम लोन कस्टमर्स ब्याज लागत में बचत के लिए अपने होम लोन का प्रीपेमेंट करते हैं। ब्याज लागत में बचत के लिए दूसरा विकल्प है होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी। इस सुविधा की मदद से आप न सिर्फ प्रीपेमेंट के ज़रिए ब्याज लागत में बचत कर सकते हैं बल्कि अपनी ज़रूरत के मुताबिक कभी भी पैसा निकाल सकते हैं। इन फायदों के साथ ओवरड्राफ्ट सुविधा की कुछ सीमाएं भी हैं।
होम लोन ओवरड्राफ्ट का लाभ उठाने से पहले आपको इसके फायदे और नुकसानों की जानकारी होनी ज़रूरी है। चलिए जानते हैं उनके बारे में-
होम लोन ओवरड्राफ्ट की सुविधा के तहत आपके होम लोन को एक ओवरड्राफ्ट अकाउंट (आमतौर पर करेंट अकाउंट) से लिंक किया जाता है। इस अकाउंट में आप जब-जब अतिरिक्त रकम जमा करते हैं, उस रकम को प्रीपेमेंट के रूप में लोन की मूलराशि से घटा दिया जाता है। नतीजतन, ब्याज कैलकुलेशन कम मूलराशि पर होता है और आप कुल ब्याज लागत में बचत कर पाते हैं।
ओवरड्राफ्ट अकाउंट में रखे गए पैसे को आप कभी भी किसी भी ज़रूरत के लिए निकाल सकते हैं। यानी इसमें आपको इंस्टेंट लिक्विडिटी की सुविधा मिलती है। यह खासकर इन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें कैश फ्लो में उतार-चढ़ाव से जूझना पड़ता है। इसमें कस्टमर को ब्याज में बचत के साथ-साथ इमरजेंसी में तुरंत पैसे की ज़रूरत पड़ने पर लिक्विडिटी का भी लाभ मिलता है।
इमरजेंसी फंड का मकसद मुश्किल समय में आपके ज़रूरी खर्चों को पूरा करना है। यह फंड इतना होना चाहिए कि आपके 6 महीनों के ज़रूरी खर्चों जैसे- रेंट, इंश्योरेंस प्रीमियम, यूटिलिटी बिल और लोन की ईएमआई आदि को पूरा कर सके।
ज़्यादातर लोग यह फंड सेविंग अकाउंट, एफडी और लिक्विड/ओवरनाइट फंड जैसे विकल्पों में रखते हैं। हालांकि, इनमें आपका पैसा तो सुरक्षित रहता है, लेकिन रिटर्न कम मिलता है। इनके बजाय, अगर आप अपना इमरजेंसी फंड ओवरड्राफ्ट अकाउंट में रखते हैं तो आपको दोगुना फायदा मिलता है, पहला इसमें पैसा कभी भी निकाला जा सकता है और दूसरा जमा राशि पर ब्याज भी आमतौर पर ज़्यादा मिलता है।

ओवरड्राफ्ट में पैसा कभी भी निकालने की सुविधा मिलती है, लेकिन इसकी ब्याज दरें आमतौर पर रेगुलर होम लोन की तुलना में थोड़ी ज़्यादा होती हैं। ऐसे में, ओवरड्राफ्ट का विकल्प चुनने से पहले कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस ज़रूर कर लें। और इसे तभी चुनें जब ब्याज लागत में अधिक बचत हो।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत होम लोन कस्टमर्स ईएमआई या प्रीपेमेंट के ज़रिए चुकाई गई होम लोन की मूलरासि पर टैक्स डिडक्शन का लाभ उठा सकते हैं। लेकिन ओवरड्राफ्ट अकाउंट में रखी गई अतिरिक्त रकम पर जो भले ही प्रीपेमेंट जैसी मानी जाती है, उस पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन लाभ नहीं मिलता।
होम लोन ओवरड्राफ्ट उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो ब्याज लागत में बचत के साथ कभी भी पैसा निकालने की सुविधा चाहते हैं। अगर आपने पहले से होम लोन लिया हुआ है, तो आप अपने मौजूदा लेंडर से ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध कराने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। अगर मौजूदा लेंडर ओवरड्राफ्ट स्कीम उपलब्ध नहीं कराते, तो आप अपना होम लोन उन लेंडर्स के पास ट्रांसफर कर सकते हैं जो यह सुविधा प्रदान करते हों। लेकिन ध्यान रहे होम लोन ओवरड्राफ्ट की ब्याज दरें आमतौर पर अधिक होती हैं, ऐसे में इस सुविधा को तभी चुनें जब ब्याज लागत में ज़्यादा बचत हो सके।