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पर्सनल लोन किसे देना है और किसे नहीं? निर्धारित करने के लिए बैंक व एनबीएफसी आपकी कुछ योग्यता शर्तों का मूल्यांकन करते हैं, जिसमें आपका क्रेडिट स्कोर, इनकम, भुगतान क्षमता, आयु, पेशा यानी क्या काम करते हैं और किस कंपनी में काम करते हैं आदि चेक करते हैं। इन कारकों के आधार पर ही आपकी प्रोफाइल का मूल्यांकन होता है और बैंक/NBFCs निर्धारित करते हैं कि-
हालांकि पर्सनल लोन की योग्यता शर्तें एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग-अलग होती है। यहां कुछ सामान्य पर्सनल लोन योग्यता शर्तों के बारे में बताया गया है जिसके आधार पर लेंडर्स किसी को पर्सनल लोन ऑफर करते हैं।
आपका क्रेडिट स्कोर दिखाता है कि आपने अपने पिछले लोन या क्रेडिट कार्ड बिल को कितनी अच्छी तरह से मैनेज किया है। आमतौर पर जो लोग अपने क्रेडिट कार्ड बिल और लोन की EMI का समय से पूरा भुगतान करते हैं, बार-बार लोन या कार्ड के लिए आवेदन नहीं करते हैं आदि उनका क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है। ऐसे आवेदकों को प्री-अप्रूव्ड ऑफर्स या बेहतर शर्तों पर पर्सनल लोन मिलने की संभावना अधिक होती है।
वहीं, जिन आवेदकों का क्रेडिट स्कोर कम होता है, उन्हें लोन मिलना तुलनात्मक रूप से मुश्किल होता है। अगर लोन मिलता भी है तो उसकी ब्याज दरें अधिक और शर्तें कठोर होती है। हालांकि न्यूनतम क्रेडिट स्कोर की योग्यता एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग-अलग होती है।
बैंक और NBFCs नौकरीपेशा और गैर-नौकरीपेशा दोनों को पर्सनल लोन देते हैं। लेकिन नौकरीपेशा आवेदकों को आय की स्थिरता के कारण अक्सर कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना ज़्यादा होती है। स्थिर आय होने से लोन डिफॉल्ट का जोखिम भी कम रहता है।
आप क्या काम करते हैं के साथ ही लेंडर्स ये भी देखते हैं कि आप किस कंपनी में काम करते हैं। लोन संस्थान आमतौर पर प्रतिष्ठित कॉरपोरेट व MNC में काम करने वालों या सरकारी कर्मचारियों को प्राथमिकता से पर्सनल लोन देते हैं। वहीं, गैर-नौकरीपेशा आवेदकों में डॉक्टर, CAs, आर्कटेक्ट आदि को कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन मिलने की उम्मीद होती है।
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आमतौर पर 18 साल से 65 साल तक के आवेदक पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि आवेदक के आयु की शर्त एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग-अलग होती है। कई सारे पब्लिक सेक्टर के बैंक पेंशनर्स को भी उनकी पेंशन इनकम के आधार पर उन्हें पर्सनल लोन ऑफर करते हैं।
लोन संस्थान आमतौर पर ज़्यादा आय वाले आवेदकों को पर्सनल लोन देना पसंद करते हैं, क्योंकि इनके लोन चुकाने की क्षमता बेहतर मानी जाती है, जिससे लेंडर का लोन जोखिम भी कम हो जाता है।
15,000 रु. या इससे अधिक सैलरी वाले आवेदक पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि पर्सनल लोन की न्यूनतम आय शर्त एक बैंक से दूसरे बैंक में अलग होती है। वहीं, 2 लाख सालाना इनकम वाले गैर-नौकरीपेशा आवेदक पर्सनल लोन लेने के योग्य होते हैं।
पर्सनल लोन आवेदन मंजूर करने से पहले बैंक व एनबीएफसी आपका काम या बिज़नेस अनुभव भी देखते हैं। क्योंकि इससे उन्हें आपकी आय की स्थिरता और निरंतरता का पता चलता है। आपका कार्य/व्यवसाय अनुभव जितना ज़्यादा लंबा और स्थिर होता है, आप उतने ही भरोसेमंद आवेदक माने जाते हैं।
आप लोन की EMI समय से भरने में सक्षम हैं या नहीं, जानने के लिए बैंक व एनबीएफसी आपका EMI/NMI रेश्यो (FOIR) देखते हैं। जिसका मतलब है कि आपके मंथली इनकम का कितना हिस्सा फिक्स्ड मासिक भुगतान में जाता है। आमतौर पर लेंडर 50%–55% से कम EMI/NMI रेश्यो वालों को लोन देना पसंद करते हैं। यानी आपके मौजूदा लोन और नए लोन की ईएमआई मिलाकर आपकी कुल आय के 50% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। अगर यह सीमा पार होती है तो लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए, पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले आवेदकों को पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर का उपयोग करना चाहिए। ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर आपकी रीपेमेंट क्षमता के आधार पर सही EMI तय करने में मदद करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आपका EMI/NMI अनुपात 50% के भीतर रहे।
समय-समय पर अपना क्रेडिट स्कोर चेक करते रहे खासतौर पर लोन आवेदन से पहले। अगर स्कोर कम है तो पहले सुधार करें फिर लोन के लिए आवेदन करें। साथ ही आपको अपना क्रेडिट रिपोर्ट भी 3-4 महीने में एक बार अवश्य चेक करते रहना चाहिए। इससे रिपोर्ट में किसी तरह की गलती मिलने पर आप इसमें समय रहते सुधार कर सकते हैं।
स्पाउस, पेरेंट्स या बच्चे आदि में से किसी को अपने लोन में सह- आवेदक के रूप में जोड़े। इससे आपके लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ध्यान रखें को-एप्लीकेंट कमाऊ और अच्छे क्रेडिट स्कोर वाला हो, क्योंकि लोन भुगतान में सह-आवेदक की हिस्सेदारी भी बराबर हो जाती है। हालांकि कुछ लेंडर पर्सनल लोन में को-एप्लीकेंट की अनुमति नहीं देते हैं।
जैसा कि पहले भी बताया गया कि लेंडर्स आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी तय करते समय ये भी देखते हैं कि आप कितने समय से जॉब कर रहे हैं और आपकी जॉब स्टेब्लिटी कितनी है। जो लोग बार-बार नौकरी बदलते हैं, उन्हें लोन देने में लेंडर्स हिचकिचा सकते हैं, क्योंकि बार-बार नौकरी बदलना करियर की अस्थिरता दर्शाता है और लेंडर्स के लिए क्रेडिट रिस्क बढ़ाता है। इसलिए, आवेदकों को कोशिश करनी चाहिए कि बार-बार नौकरी न बदलें, खासकर तब जब आप आने वाले समय में पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहें हो।