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अगर आप पहली बार अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल कर रहे हैं, तो शुरुआत में यह प्रक्रिया थोड़ी उलझी हुई लग सकती है, लेकिन ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। आयकर विभाग द्वारा ज़्यादातर चीज़ें ऑनलाइन उपलब्ध कराने के साथ, टैक्स दाखिल करना पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गया है। फिर भी, शुरुआत करने से पहले कुछ अहम बातों पर ध्यान देना ज़रूरी है ताकि आप बिना किसी परेशानी के अपना ITR दाखिल कर सकें।
नोट: वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर, 2025 है।
अपना आईटीआर ऑनलाइन दाखिल करने के लिए, आपको सबसे पहले आधिकारिक आयकर पोर्टल incometax.gov.in पर पंजीकरण करना होगा। आपको अपना पैनकार्ड देना होगा, जो आपके आधार कार्ड से भी लिंक होना चाहिए। यदि लिंक नहीं है, तो रिटर्न आगे प्रोसेस नहीं होगा। आप इसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर निर्धारित शुल्क का भुगतान करके आसानी से लिंक कर सकते है।
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नए करदाताओं के पास पुरानी और नई व्यवस्था (Old And New Tax Regime) में से चुनने का विकल्प होता है। कौन-सी व्यवस्था आपके लिए लाभदायक है, यह आपकी आय, निवेश और उपलब्ध कटौतियों पर निर्भर करता है। किसी भी निर्णय से पहले ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर का उपयोग करके दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें और उसी को चुनें, जिससे आपकी कुल टैक्स देनदारी कम हो।
आपकी कमाई के आधार पर अलग-अलग ITR फॉर्म लागू होते हैं। वेतनभोगी लोग आमतौर पर ITR-1 भरते हैं, अगर आपकी आय बिज़नेस, कैपिटल गेन, संपत्ति या अन्य स्रोतों से है, तो आपको ITR-2, ITR-3 या अन्य संबंधित फॉर्म चुनना होगा। इसलिए ध्यान रखें, गलत फॉर्म भरने पर आपका रिटर्न रिजेक्ट हो सकता है या प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
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भले ही कुछ आय टैक्स योग्य न हो, जैसे कि धारा 80TTA के तहत सेविंग्स अकाउंट पर ₹10,000 से कम का ब्याज, फ्रीलांस काम या निवेश से प्राप्त आय आदि फिर भी इसकी रिपोर्ट करना अनिवार्य है। केवल अपने मूल वेतन ही नहीं, बल्कि सभी अतिरिक्त स्रोतों से हुई आय भी शामिल करें।
हालांकि आपको फाइलिंग के समय सभी प्रमाण अपलोड करने की आवश्यकता नहीं है, फिर भी अपने बैंक स्टेटमेंट, निवेश प्रमाण, किराये की रसीद और मेडिकल बिल जैसे दस्तावेज़ तैयार रखें क्योंकि भविष्य में इनकम टैक्स विभाग द्वारा पूछताछ में इनकी आवश्यकता पड़ सकती है।
जमा करने से पहले, फॉर्म 26AS और वार्षिक सूचना विवरण (AIS) का उपयोग करके टैक्स क्रेडिट की पुष्टि करें। इनसे आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके नियोक्ता, बैंक या अन्य स्रोतों द्वारा काटा गया TDS और दर्ज किए गए अधिक मूल्य वाले वित्तीय लेनदेन सही हैं या नहीं। यदि कोई गलती या अंतर दिखाई दे, तो उसे पहले ही सुधार लें, ताकि रिटर्न दाखिल करते समय कोई समस्या न हो।
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अगर आपने पुरानी कर व्यवस्था चुनी है, तो टैक्स बचाने का सबसे आसान तरीका है कि आप सभी लागू कटौतियों और छूट का पूरा लाभ उठाएं।
उदाहरण के लिए:
इन कटौतियों का सही उपयोग करके आप अपनी कर योग्य आय को काफी कम कर सकते हैं और टैक्स बचा सकते हैं।
पहली बार टैक्स रिटर्न दाखिल करना केवल एक औपचारिकता पूरी करना नहीं है, बल्कि वित्तीय अनुशासन और ज़िम्मेदारी की ओर बढ़ने का एक अहम कदम है। सही दस्तावेज़, उपयुक्त फॉर्म और आवश्यक जानकारी के साथ यह प्रक्रिया सरल और परेशानी मुक्त हो जाती है। और एक बार जब आप इसे सही से भर लेते हैं, तो साल दर साल यह प्रक्रिया आपके लिए आसान और तेज़ होती जाएगी।