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आयकर रिटर्न (ITR) भरना वित्तीय अनुपालन बनाए रखने और टैक्स रिफंड पाने के ज़रूरी कदमों में से एक है। लेकिन ITR फाइलिंग में छोटी सी गलती भी पेनल्टी, देरी या रिटर्न रिजेक्ट होने का कारण बन सकती है। चाहे आप पहली बार फाइल कर रहे हों या पहले भी फाइल कर चुकें हों, ITR फाइल करते समय होने वाली आम गलतियों और उनके समाधान को समझना ज़रूरी है जिससे आप बिना किसी परेशानी के आसानी से ITR फाइल कर सकें। इस लेख में हम ITR भरते समय टैक्सपेयर्स द्वारा की जाने वाली आम गलतियों और सटीक फाइलिंग के लिए ज़रूरी टिप्स की चर्चा करेंगे।
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ITR भरते समय होने वाली सबसे आम गलतियों में गलत ITR फॉर्म का चुनाव है। दरअसल, इनकम टैक्स की वेबसाइट पर टैक्सपेयर्स की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग ITR फॉर्म उपलब्ध हैं। इनमें से सही फॉर्म चुनना काफी ज़रूरी है। अगर आप गलत ITR फॉर्म चुनते हैं, तो आपकी फाइलिंग डिफेक्टिव मानी जा सकती है और आपको दोबारा सुधार (rectification) करना पड़ सकता है।
पहली बार रिटर्न भरने वालों को सही फॉर्म का चुनाव करने के लिए अपनी पूरी इनकम प्रोफाइल का मूल्यांकन करना चाहिए और ज़रूरत पड़े तो टैक्स पोर्टल या किसी प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए।
रिटर्न भरते समय सही असेसमेंट ईयर चुनना बहुत ज़रूरी है। ITR फाइल करते समय की जाने वाली आम गलतियों में से एक गलत असेसमेंट वर्ष का चुनाव है।उदाहरण के लिए अगर आप 2024-2025 के लिए ITR फाइल कर रहे हैं, तो आपको AY 2025-2026 होगा। गलत असेसमेंट वर्ष का चुनने पर डबल टैक्सेशन हो सकता है या पेनल्टी भरनी पड़ सकती है।
कई बार लोग अपनी नौकरी या बिज़नेस से होने वाली इनकम पर तो ITR दाखिल कर देते हैं, लेकिन आय के अन्य सोर्स जैसे- सेविंग्स अकाउंट, एफडी के ब्याज, किराए से होने वाली आय, शेयर मार्केट या म्यूचुअल फंड की आय आदि की जानकारी नहीं देते। चाहे वह आय टैक्सेबल हो या एक्सेम्प्ट, दोनों ही सूरतों में उसे दर्ज करना ज़रूरी होता है। जाने-अनजाने में आय का खुलासा न करने की गलती आगे चलकर मुसिबत का कारण बन सकती है।
ITR भरने से पहले फॉर्म 26AS और AIS चेक करना बेहद ज़रूरी है। इसमें TDS, TCS, एडवांस टैक्स जैसी जानकारी दर्ज होती हैं। नौकरीपेशा कर्मचारियों को अपने फॉर्म 16 की जानकारी का मिलान फॉर्म 26AS से करना चाहिए। आय या टैक्स की जानकारी बेमेल होने पर रिफंड लेट हो सकता है या टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस भी आ सकता है।
सिर्फ रिटर्न दाखिल करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे समय पर ई-वेरिफाई करना भी बेहद ज़रूरी है। जिसे आप नेट बैंकिंग, आधार OTP या मोबाइल EVC के माध्यम से आसानी से कर सकते हैं। समय पर ई-वेरिफाई न करने से आपका रिटर्न अमान्य हो सकता है। अगर आप ई-वेरिफाई नहीं कर पा रहे, तो साइन किया हुआ ITR-V स्पीड पोस्ट/नॉर्मल पोस्ट से भेजना होगा। वेरिफिकेशन न होने पर रिटर्न अधूरा माना जाएगा।
इन आम गलतियों को जानने के बाद आप यह तो समझ गए होंगे की ITR फाइलिंग में छोटी-सी गलती भी बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए ITR भरते समय इन बातों का ध्यान रख आप अपनी टैक्स फाइलिंग को पूरी तरह आसान और तनाव-मुक्त बना सकते हैं।