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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट एक सरकारी एजेंसी है, जो सरकार की ओर से कर वसूलने का काम करती है। ये विभाग मुख्य रूप से आयकर अधिनियम 1961 सहित विभिन्न आयकर कानूनों को लागू करता है। साथ ही व्यक्तियों, फर्मों, कंपनियों, सोसाइटियों, स्थानीय निकायों आदि से केंद्र सरकार की ओर से कर वसूलता है। आयकर विभाग को आमतौर पर आईटी डिपार्टमेंट भी कहा जाता है, यह सीधे वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है और इसका संचालन शीर्ष संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा किया जाता है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का प्रमुख कार्य व्यक्तियों के आय पर कर वसूलना होता है, जिसे इनकम टैक्स कहते हैं। यह एक प्रत्यक्ष कर होता है यानी सीधे आय पर लिया जाने वाला कर है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अन्य ज़रूरी काम निम्नलिखित हैं-
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) एक स्टेट्यूरी बॉडी है, जो केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम 1963 के तहत काम करता है। इसका सबसे अहम काम भारत में प्रत्यक्ष कर नीतियों (Direct Tax Policies) को लागू करने से जुड़े सभी नियम और प्रक्रियाएं तय करना है।
CBDT ही वह संस्था है, जो तय करती है कि टैक्स से जुड़े नियम कैसे लागू होंगे। मतलब कौन-सा नियम कब लागू होगा, उसमें क्या बदलाव होंगे आदि ये सब CBDT के सर्कुलर, ऑर्डर और नोटिफिकेशन से ही पता चलता है।
चूंकि आयकर (Income Tax) एक प्रत्यक्ष कर है, तो इसका जिम्मा भी आयकर विभाग का ही होता है। लेकिन आयकर विभाग अपनी मर्ज़ी से काम नहीं करता बल्कि उसे जो गाइडलाइंस और निर्देश CBDT से मिलते हैं वह उसी हिसाब से टैक्स वसूलता और नियम लागू करता है। संक्षेप में कहे तो CBDT नियम बनाता है और आयकर विभाग उन्हीं नियमों के आधार पर काम करता है।
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आईटी डिपार्टमेंट कई तरह की ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करता है। जो निम्नप्रकार हैं-
आप इनकम टैक्स ई-फाइलिंग वेबसाइट पर ITR फाइल करने के अलावा वहां मौजूद मुफ्त टूल्स का इस्तेमाल भी कर करते हैं, जो आपके काम को आसान बनाने में मदद करते हैं। नीचे इनके बारे में विस्तार से बताया गया है-
इन टूल्स के अलावा, आप e-filing वेबसाइट से कुछ ज़रूरी टैक्स सॉफ्टवेयर भी डाउनलोड कर सकते हैं, मसलन-
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कई कारणों से टैक्सपेयर को नोटिस भेजता है। इनमें गलत ITR फाइल करना, गलत ITR फॉर्म का इस्तेमाल करना, या फिर ITR फाइल न करना (जबकि क्रेडिट कार्ड बिल सालाना ₹2 लाख से अधिक हों) जैसे मामले शामिल हैं।
नोटिस मिलना हमेशा चिंता की बात नहीं होती। ज़्यादातर मामलों में यह केवल इनकम टैक्स असेसिंग ऑफिसर द्वारा स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी मांगने का एक तरीका होता है, ताकि ITR फाइलिंग से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी या चूक को समझा जा सके।
इनकम टैक्स नोटिस मिलने पर ये करें-
1. ध्यान से पढ़ें- इनकम टैक्स नोटिस मिलने पर परेशान न हो, नोटिस को ध्यान से पढ़ें। और उसमें निम्नलिखित डिटेल्स अच्छे से चेक करें-
2. डिस्क्रेपेंसी (अंतर) पहचानें- जब यह सुनिश्चित कर लें कि नोटिस वास्तव में आपके नाम पर ही है, तो इसके बाद उसमें बताई गई गलती या अंतर को ढूँढ़ें। ज़्यादातर मामलों में टैक्स की गणना और आपके द्वारा भरे गए टैक्स की राशि में अंतर ही इसकी वजह होता है। कुछ सामान्य डिस्क्रेपेंसी निम्न प्रकार हो सकती हैं:
3. इस अंतर को बताने के लिए एक प्लान बनाएं- इनकम टैक्स की तरफ से मिले नोटिस का जवाब एक निर्धारित समय में देना होता है। अगर आप नोटिस का जवाब देरी से देते हैं तो इस पर फाइन लग सकता है, जो 10,000 रु. तक हो सकता है।