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पर्सनल लोन प्री-क्लोज़र या फोरक्लोज़र (Personal Loan Pre-closure) वह प्रक्रिया है जब आप लोन बैलेंस को कई ईएमआई में चुकाने के बजाय एकमुश्त भुगतान कर उस लोन को बंद करा देते है। यदि आपने भी पर्सनल लोन लिया है और अब आप इसे प्री-क्लोज़ करने का विचार कर रहे है तो, उससे पहले इसके फायदे और नुकसान ज़रूर समझ लें। ऐसा करने से आप सही फैसला ले सकेंगे जिससे आपको बाद में पछताना नहीं पड़ेगा।
पर्सनल लोन को जल्दी चुकाने का एक मुख्य कारण कुल ब्याज लागत में बचत करना है। चलिए उदाहरण से समझते है:
अजय ने 5 साल की अवधि के लिए 13% प्रति वर्ष की ब्याज दर के साथ ₹5 लाख का पर्सनल लोन लिया है, जिसकी मासिक EMI लगभग ₹11,400 होगी। इस मामले में, अजय की कुल ब्याज लागत ₹1.83 लाख के करीब होगी। अब, 2 साल बाद, यदि अजय अपने लोन का पूरा भुगतान करने का फैसला करता हैं, तो वह ब्याज लागत में लगभग ₹72,000 की बचत कर सकेगा। हालांकि, अजय को अपने लोन को बंद करने से पहले पर्सनल लोन प्री-पेमेंट शुल्क और अन्य लागतों (यदि कोई हो) को ध्यान में रखना होगा। पर्सनल लोन को बंद करने का विकल्प तभी चुनें जब इससे कुल मिलाकर पर्याप्त बचत हो।
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बैंक और NBFC ऐसे आवेदकों को पर्सनल लोन देना पसंद करते हैं, जिनकी कुल EMI, मौजूदा और नए लोन दोनों को मिलाकर, उनकी कुल मासिक आय के 50-60% के भीतर हो। ऐसे में, अगर आप अपने मौजूदा पर्सनल लोन को समय से पहले चुका देते हैं, तो आपकी मासिक EMI की ज़िम्मेदारी कम हो जाती है। इससे आपकी नई लोन की EMI चुकाने की क्षमता बढ़ती है और आपकी लोन लेने की पात्रता भी बेहतर हो जाती है।
आपका क्रेडिट मिक्स आपके बकाया सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन का अनुपात/ रेश्यो होता है। क्रेडिट ब्यूरो आपके क्रेडिट स्कोर की गणना करते समय आपके क्रेडिट मिक्स को ध्यान में रखते हैं। क्योंकि पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन है इसलिए अधिकतर लेंडर्स उन आवेदकों को लोन देना पसंद करते हैं जिनके पास सिक्योर्ड लोन (जैसे होम लोन, कार लोन, गोल्ड लोन) रेश्यो अधिक हो, क्योंकि इसमें जोखिम कम हो जाता है। इसलिए, अगर आप अपना पर्सनल लोन समय से पहले चुका देते हैं, तो आपके क्रेडिट मिक्स में अनसिक्योर्ड लोन की मात्रा कम हो जाती है। इससे न केवल आपका क्रेडिट मिक्स बेहतर होगा, बल्कि क्रेडिट स्कोर में सुधार होने की भी संभावना बढ़ जाएगी।
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अगर ग्राहक अपनी लोन अवधि पूरी होने से पहले एक बार में ही बकाया लोन राशि का भुगतान कर लोन अकाउंट बंद कर देता है तो उसे फोरक्लोज़र फीस देनी होती है। कुछ बैंक निर्धारित EMI का भुगतान करने पर ही लोन अकाउंट के फोरक्लोज़र की अनुमति देते हैं। RBI ने फ्लोटिंग ब्याज दरों पर लिए जाने वाले प्रीपेमेंट शुल्क पर पाबंदी लगा दी है। हालांकि, निश्चित ब्याज दरों वाले लोन पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। इसलिए, ज़्यादातर बैंक और लोन संस्थान मूल बकाया राशि के 5% तक के लोन पर प्रीपेमेंट शुल्क लगा सकते हैं।
कई ग्राहक उच्च ब्याज दरों के बोझ को कम करने के लिए पर्सनल लोन बंद करने का फैसला करके अपने इमरजेंसी फंड या निवेश का उपयोग कर लेते है। हालांकि ऐसा करने से आपकी लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है और बीमारी, नौकरी छूटने जैसी वित्तीय आपात स्थितियों में फंड की कमी होने के चलते भविष्य में आपको अधिक ब्याज दरों पर लोन लेना पड़ सकता है। इसलिए, पर्सनल लोन को बंद करने का विकल्प तभी चुनना चाहिए जब आपके पास लोन को प्री-क्लोज़ करने के बाद भी इमरजेंसी फंड और वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धनराशि हो।
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निष्कर्ष
पर्सनल लोन प्री-क्लोज़ करने का फैसला सिर्फ ब्याज बचाने को ध्यान में न रखते हुए, अपनी लिक्विडिटी, इमरजेंसी फंड और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।