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उच्च शिक्षा की लगातार बढ़ती लागत के कारण, आज अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन का सहारा ले रहे हैं। हालांकि,ऐसा करने से उनके बच्चों पर करियर की शुरुआत में ही कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। इसके साथ ही यदि भविष्य में आर्थिक मंदी या नौकरी के अवसरों में कमी वित्तीय समस्या और बढ़ा सकती है। ऐसे में सबसे बेहतर उपाय यही है कि बच्चों की उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने के लिए पहले से ही योजनाबद्ध तरीके से बचत और निवेश किया जाए।
माता-पिता के लिए यह अंदाज़ा लगाना आसान नहीं होता कि उनके बच्चे भविष्य में कौन-सा करियर चुनेंगे। फिर भी, वे 2-3 संभावित करियर विकल्प चुनकर उनसे जुड़ी पढ़ाई की मौजूदा लागत का अनुमान लगा सकते हैं। क्योंकि उच्च शिक्षा की लागत हर साल बढ़ती रहती है, इसलिए कम से कम 10% वार्षिक वृद्धि मानकर चलना बेहतर रहता है।
एक बार जब माता-पिता को उच्च शिक्षा के लिए लगाने वाले फंड का अंदाज़ा हो जाए, तो वे ऑनलाइन SIP कैलकुलेटर की मदद से यह जान सकते हैं कि बच्चों की पढ़ाई के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा।
हर निवेश विकल्प (जैसे शेयर, फिक्स्ड डिपॉज़िट, म्यूचुअल फंड आदि) की अपनी अलग खासियत होती है। कुछ निवेश विकल्पों में पैसे की सुरक्षा और तय आय मिलती है, जबकि कुछ में थोड़ा जोखिम लेकर ज़्यादा रिटर्न पाने का मौका होता है।
उदाहरण के लिए: शेयर (इक्विटी) छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन लंबी अवधि में ये आमतौर पर बेहतर रिटर्न देते हैं। वहीं, फिक्स्ड इनकम निवेश जैसे डेट फंड या एफडी, ज़्यादा सुरक्षित होते हैं, पर इसमें रिटर्न थोड़ा कम होता है। इसलिए, जिन माता-पिता को अधिक जोखिम लेने की क्षमता है और जिनके बच्चों की उच्च शिक्षा शुरू होने में कम से कम 7 साल बाकी हैं, तो आप इक्विटी फंड में निवेश करके बेहतर फंड बना सकते हैं। लेकिन अगर आपके पास 5 साल से कम समय है, तो डेट फंड, बैंक एफडी जैसे सुरक्षित विकल्प चुनना बेहतर रहेगा।
जो माता-पिता अपने बच्चों की विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय फंड में निवेश करना चाहिए। रुपये की कीमत गिरने पर जहां विदेश में पढ़ाई महंगी होती है, वहीं इन फंडस से मिलने वाला रिटर्न भी बढ़ जाता है। इससे आपको अपने बच्चे की विदेश शिक्षा के खर्च पूरे करने में मदद मिलेगी।
जल्दी निवेश करने से आपको चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलता है। चक्रवृद्धि ब्याज की मदद से, आपके निवेश से होने वाला लाभ अपने आप रिटर्न देना शुरू कर देता है। जिससे समय के साथ आपका पैसा जल्दी बढ़ता है।
उदाहरण के लिए, अगर माता-पिता 21 साल की अवधि में 50 लाख रुपये का उच्च शिक्षा फंड बनाना चाहते हैं, तो उन्हें 12% वार्षिक रिटर्न मानकर लगभग 4,500 रुपये प्रति माह निवेश करना होगा।
वही शिक्षा के लिए फंड 7 साल में बनाना हो तो, लगभग 38,500 रुपये प्रति माह निवेश करने होंगे। इसको और भी आसान बनाने के लिए म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश करते समय डायरेक्ट प्लान चुनें क्योंकि ये प्लान लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न प्रदान करता हैं।
एसआईपी (SIP) के जरिए माता-पिता अपने बच्चों के लिए नियमित निवेश और वित्तीय अनुशासन बनाए रख सकते हैं। यह विकल्प शेयर मार्केट में गिरावट के दौरान कम नेट एसेट वैल्यू (Net Asset Value) पर अधिक यूनिट खरीदने में मदद करता है, जिससे समय के साथ बाज़ार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
निवेशकों को अपनी आय बढ़ने के अनुसार SIP में योगदान बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए और शेयर मार्केट में गिरावट या मंदी के दौरान अपने SIP को टॉप-अप करना भी फायदेमंद रहता है।
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किसी निवेशक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु उसके बच्चों की उच्च शिक्षा राशि के लिए मासिक योगदान को रोक सकती है। इस वित्तीय जोखिम को कम करने का एकमात्र तरीका उनके निर्धारित उच्च शिक्षा राशि के बराबर जीवन बीमा कवर खरीदना है। हालांकि अधिकांश बीमा कंपनियां जीवन बीमा के साथ मिलाकर चाइल्ड प्लान पेश करती हैं, लेकिन माता-पिता को अपने द्वारा तय किए गए शिक्षा फंड के बराबर टर्म इंश्योरेंस कवर खरीदना चाहिए।
टर्म पॉलिसी बहुत कम प्रीमियम पर बड़ा जीवन बीमा कवर प्रदान करती हैं, जबकि म्यूचुअल फंड चाइल्ड प्लान की तुलना में अधिक सुविधा और कई तरह के निवेश विकल्प प्रदान करता है। जिनके पास पहले से ही टर्म पॉलिसी हैं, वे अपने बच्चे की उच्च शिक्षा को कवर करने वाला टर्म इंश्योरेंस खरीद सकते हैं।