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कई लोग रिटायरमेंट की योजना बनाते समय कुछ आम गलतियां कर बैठते हैं जिनसे उनकी रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इस लेख में हम रिटायरमेंट योजना से जुड़ी कुछ सामान्य गलतियों और उनसे बचने के आसान तरीकों पर बात करेंगे, ताकि आपका भविष्य सुरक्षित रह सके।
रिटायरमेंट की योजना बनाते समय लोग अक्सर एक बड़ी गलती करते हैं और वे यह सोच लेते हैं कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद बहुत ज़्यादा पैसों की ज़रूरत नहीं होगी। उन्हें लगता है कि बच्चों की पढ़ाई या नौकरी से जुड़ी ज़िम्मेदारियां खत्म हो जाएंगी, तो खर्च अपने आप कम हो जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं होता। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतें, बीमारियां बढ़ सकती हैं, जिससे मेडिकल खर्च ज़्यादा हो सकते हैं।
इसके अलावा, लंबी उम्र जीने का जोखिम भी ध्यान में रखना ज़रूरी है। आजकल लोग पहले की तुलना में थोड़ा अधिक भी जी रहे हैं, इसलिए रिटायरमेंट फंड इतना होना चाहिए कि वह कम से कम 80 साल की उम्र तक आपके खर्च पूरे कर सके। एक और बात जो लोग भूल जाते हैं, वह है महंगाई। आज जो चीज़ ₹100 में मिल रही है, वही कुछ सालों बाद ₹150 या ₹200 की हो सकती है। इसलिए, यह समझना ज़रूरी है कि आपको अपनी रिटायरमेंट के लिए कितनी राशि बचानी है। इसके लिए आप ऑनलाइन रिटायरमेंट कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं। अगर इन सभी बातों को ध्यान में नहीं रखा गया, तो सेवानिवृत्ति के बाद आपकी बचत जल्दी खत्म हो सकती है।
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अपनी वित्तीय स्थिति पर बोझ डाले बिना रिटायरमेंट फंड बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है, जितना जल्दी हो सके निवेश शुरू करना। जितनी ज़्यादा देर आप निवेश शुरू करने में करेंगे, उतना ही आपके पास पर्याप्त रिटायरमेंट फंड न होने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही, देर से शुरुआत करने पर आपके अन्य वित्तीय लक्ष्य जैसे बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदना आदि भी प्रभावित हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए: 12% वार्षिक रिटर्न मानते हुए, एक 30 वर्षीय व्यक्ति जो SIP के माध्यम से इक्विटी म्यूचुअल फंड में प्रति माह 10,000 रुपये का निवेश करता है, उसके पास अगले 30 वर्षों में रिटायरमेंट के बाद 3.5 करोड़ रुपये का फंड होगा। जबकि एक 45 वर्षीय व्यक्ति को समान रिटर्न दर पर 15 वर्षों में समान बचत बनाने के लिए इक्विटी फंड में लगभग 70,000 रुपये का मासिक SIP निवेश करना होगा।

कई लोग रिटायरमेंट फंड बनाते समय इक्विटी में निवेश करने से कतराते हैं, क्योंकि उन्हें इसमें उतार-चढ़ाव का डर होता है। लेकिन हकीकत यह है कि लंबी अवधि में इक्विटी निवेश न केवल महंगाई को मात देता है, बल्कि फिक्स्ड डिपॉज़िट या डेट फंड जैसे निवेश विकल्पों से ज़्यादा रिटर्न देता है। इसी वजह से इक्विटी को लंबी अवधि के लक्ष्यों, जैसे रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए, सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।
रिटायरमेंट के बाद अपनी पूरी बचत को फिक्स्ड डिपॉज़िट, डेट फंड या अन्य फिक्स्ड इनकम वाले विकल्प में डाल देना भी सही नहीं है। ऐसा करने से आपको निवेश किए गए पैसों पर अधिक रिटर्न नहीं मिलेगा। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट के करीब आते हैं, आपको यह अंदाज़ा लगाना चाहिए कि अगले 6–7 सालों के लिए खर्चों और ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कितनी राशि चाहिए। उस रकम को आप नियमित आय वाले विकल्पों जैसे बैंक एफडी (मासिक ब्याज भुगतान के साथ) या शॉर्ट-टर्म डेट फंड (एसडब्ल्यूपी सुविधा के साथ) में रख सकते हैं। बाकी राशि को इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश करें, ताकि आपके पैसों पर बेहतर रिटर्न मिले।
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कई लोग रिटायरमेंट के लिए निवेश तो शुरू कर देते हैं, लेकिन बाद में अपने निवेश के पोर्टफोलियो को चेक नहीं करते यह एक आम और गंभीर गलती है। याद रखें, किसी म्यूचुअल फंड का पुराना प्रदर्शन भविष्य में अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं देता। बाजार की स्थिति या फंड मैनेजर की रणनीति में बदलाव से पहले अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड आगे चलकर कमजोर पड़ सकते हैं। इसलिए, हर तीन महीने में कम से कम एक बार अपने रिटायरमेंट पोर्टफोलियो को ज़रूर चेक करें। अपनी म्यूचुअल फंड योजनाओं के रिटर्न की तुलना उनके बेंचमार्क इंडेक्स और समान श्रेणी के अन्य फंडों से करें। अगर कोई फंड लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, तो उससे बेहतर विकल्प चुनने पर विचार करें।
कई लोग अपने नियोक्ता की दी हुई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर निर्भर रहते हैं। लेकिन ध्यान रखें, यह कवरेज रिटायरमेंट के बाद खत्म हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम भी बढ़ता है। अगर आप इन खर्चों के लिए केवल अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स पर निर्भर रहेंगे, तो आपका रिटायरमेंट फंड जल्दी खत्म हो सकता है। इस जोखिम से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि समय रहते अपने और अपने परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर लें। रिटायरमेंट के बाद भी इस पॉलिसी को जारी रखें ताकि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में आपकी सेविंग्स सुरक्षित रहें। कम उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेने का एक और फायदा यह है कि प्रीमियम कम होता है और आपको ज़्यादा बीमारियों के लिए कवरेज मिलता है।